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विश्व शांति दूत जैन मुनि आचार्य विद्यासागर नहीं रहे

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  जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी महाराज, जिनका जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के बेलगांव जिले के चिक्कोडी गांव में हुआ था, मात्र 22 साल की उम्र मे आचार्य ज्ञान सागर जी द्वारा इन्हें दिगंबर जैन मुनि की दीक्षा दी गई, मुनि जी 26 साल की उम्र में आचार्य बने इनके द्वारा अपने माता-पिता सहित 500 से अधिक लोगों को दीक्षा दी गई । मुनि जी का जैन धर्म के प्रति झुकाव मात्र 9 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो गया था  आचार्य विद्यासागर महाराज को अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, बांग्ला भाषाओं का ज्ञान था. जबकि उन्होंने कन्नड़ भाषा में शिक्षा ग्रहण की थी. भारतीय साहित्य, दर्शन, और समाज के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।  आचार्य विद्यासागर वे मानव जाति का प्रकाश पुंज थे, जो धर्म की प्रेरणा देकर जीवन के अंधेरे को दूर करके मोक्ष का मार्ग दिखाने का महान कार्य करते थे. विद्यासागर जी ने अपने जीवन को जैन धरोहर के प्रचार-प्रसार में समर्पित किया और उन्होंने अपने ज्ञान और तपस्या से लाखों लोगों को मार्गदर्शन किया। उनका योगदान साहित्य, विचारशीलता, और सामाजिक परिवर्तन...