रिस्क तो हमे भी फिर रिस्क एलाउन्स क्यो नही
भारतीय रेल मे सहायक लोको पायलट को जिस प्रकार रिस्क एलाउन्स से बन्चित किया उससे इस प्रकार के नियम बनाने बाले अधिकारी का निम्न बौध्दिक स्थर को स्वतः ही समझा जा सकता है क्योकि रेल मे जितनी महत्वपूर्ण भूमिका लोको पायलट एवं गार्ड निभाते है उसी बराबरी से सहायक लोको पायलट भी महत्बपूर्ण भूमिका के साथ सभी प्रकार के डियूटी पर जोखिम उठाता है जिसमे स्पेयर आते जाते समय चलती गाॅडी मे चडना उतरना ,ड्यूटी पर आते जाते समय ट्राफिक मे, मेन लाइन पर छैःगाडी मे हैन्ड ब्रेक छुटाते लगाते समय,इन्जन चैक करते समय ,गाडी का जी डी आर बनाते समय, ए सी पी होने पर झाडियो मे अनगिनत साॅपो एबं बिच्छओ को पैरो से रौदते हुए,ड्यूटी से आते जाते समय गलियो के आबारा कुत्तो, चोर बदमाशो से अपने जीबन को जोखिम मे डालकर रेल कार्य करता है उसके बाद भी उन्हे अब तक रिस्क एलाउन्स से बन्चित रखना समझ से परे उसके बिपरीत ए सी मे बैठकर बिना लाइन पर चले कुछ रेल कर्मचारी रिक्स एलाउन्स ले रहे है। सह सब कुछ होने के बाद भी सबसे बडी रेल यूनियन के बडे लीडर कहते है कि आखिर रेल मे सहायक लोको पायलट का काम क्या होता है पानी और चाय प...