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विश्व रक्तदान दिवस पर 100 बी बार किया रक्तदान देश के हर युवा के लिए विशेष प्रेरणा स्त्रोत निशांत साहू (गगन)

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अपने लिए जिया तो क्या जिया  कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखो  कोरोनावायरस महामारी काल में जब लोगों के अपनों ने साथ छोड़ दिया तो तब समाज के ऐसे महान लोग सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए भी लोगो की जान बचाने के लिए बिना किसी स्वार्थ के तन मन धन से मदद की उन्हीं में से एक युवा जो बिना किसी पुरस्कार एवं प्रशंसा की लोगों की मदद करता रहा और  बरसों से कर भी रहा है युवा ब्लड डोनर एवं समाजसेवी निशांत साहू गगन प्रत्येक  14 जून को विश्व में  रक्तदान दिवस मनाया जाता है जिसमें लोगों को अधिक से अधिक रक्तदान करने के लिए जागृत किया जाता है सच में जरूरतमंदों को रक्तदान  सबसे बढ़ा महादान होता है यह दान  धर्म जाति मजहब  से परे  सिर्फ इंसानियत को देखता है   रक्त की अहमियत  वह व्यक्ति जानता है  जिसका कोई अपना परिवार का सदस्य रक्त के बिना जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है  हमारे देश में लाखों लोग  रक्त की कमी की वजह से समय से पहले मृत्यु को गले लगा लेते हैं आज हमारा देश इतना आधुनिक होने के बाद भी लोगों को रक्तदान के प्र...

विश्व साइकिल दिवस पर वो साइकिल और बचपन की यादें जो शायद कभी लौट कर ना आए

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 #विश्व_साइकिल_दिवस  हर किसी के बचपन का जुड़ाव साइकिल से किसी ना किसी रूप में जरूर रहा होगा बचपन के उन दिनों की याद जरूर आ जाती है जब साइकिल एक रुपए पर घंटे किराए पर मिला करती थी चला पाए या ना चला पाए वह अलग बात थी क्योंकि आसपास ऐसे दोस्त भी हुआ करते थे कि जो सिखाने के बहाने खुद मजे लूटते थे 1 घंटे के लिए मिलने वाली साइकिल में ज्यादातर समय चैन चढ़ाने और हवा भरने में ही निकल जाता था  यदि सब कुछ ठीक रहा तो किराए की साइकिल की खराब घंटी एवं कमजोर ब्रेक की समस्या हमेशा बनी रहती थी जिसके कारण किसी से टकराया ना उसका उत्तरदायित्व पीछे से गाइड कर रहे दोस्त और अपने पैरों का ज्यादा रहता था कैंची डंडा  सीट वाली साइकिल सीखने की प्रक्रिया में चलाते समय सबसे ज्यादा ध्यान फ्रेंड लोगों की तरफ रहता था और सिखाने वाले हमेशा कहते थे सामने देखो यदि साइकिल की स्पीड अधिक हो गई और पीछे से गाइड करने वाले दोस्त पीछे छूट गए तो लोगों को हटाने एवं साइकिल को कंट्रोल करने का एक ही सहारा होता था  साइकिल को रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए बार बार चिल्लाना भाई साहब हट जाओ भाई साहब हट जाओ साइकिल में...