शेयर बाजार का चूहा-बिल्ली खेल

 

शेयर बाजार का चूहा-बिल्ली खेल 

शेयर बाजार की दुनिया भी अजब-गजब है। यहां FII (फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड) और DII (डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट फंड) का खेल ऐसा लगता है मानो कोई चूहा और बिल्ली की पुरानी कहानी सुन रहा हो। बस फर्क इतना है कि यहां चूहा-बिल्ली का यह खेल करोड़ों के आंकड़ों में चलता है, और बेचारे छोटे निवेशक को अंत में "मूंगफली" मिलती है।  
सुरक्षित निवेशक का डर 
बेचारे छोटे निवेशक हर सुबह सोचते हैं कि आज "लक्ष्मीजी" का आशीर्वाद मिलेगा। लेकिन बाजार खुलते ही खबर आती है—"FII ने फिर से बिकवाली शुरू कर दी!" यह सुनते ही छोटे निवेशक का दिल तेजी से धड़कने लगता है, जैसे कोई स्कूल का बच्चा गणित की परीक्षा में बिना तैयारी के पहुंच गया हो।  
DII की भूमिका  
अब आते हैं DII, जिन्हें 'देशभक्त' समझा जाता है। ये बेचारे हर रोज़ FII द्वारा फेंकी हुई गेंदों को कैच करते रहते हैं। जैसे ही FII बाजार में बिकवाली करते हैं, DII सोचते हैं, "चलो, मौका है देशभक्ति दिखाने का!" लेकिन असल में ये भी वही खेल का हिस्सा होते हैं।  
छोटे निवेशक का संघर्ष  
छोटे निवेशक, जिनकी पूंजी गिनती में भी FII और DII के चाय के बिल जितनी है, वो सोचते हैं, "कब ये चूहा-बिल्ली का खेल खत्म होगा?" लेकिन खेल खत्म नहीं होता। कभी बाजार ऊपर जाता है तो कभी नीचे, और छोटे निवेशक को हर बार "स्टॉपलॉस" में कटवाकर घर लौटना पड़ता है।  
व्यंग्य का निष्कर्ष 
असल में, शेयर बाजार में कमजोर दिल वाले निवेशकों की हालत वैसी ही होती है, जैसे कोई बच्चा पहली बार हवाई झूले में बैठा हो—न तो चढ़ने की खुशी है, न उतरने का भरोसा।  

तो भाई, अगर शेयर बाजार में निवेश कर रहे हो, तो दिल मजबूत रखो। और याद रखो, FII और DII का खेल हमेशा चलेगा। इस खेल में अगर दिल छोटा है, तो मज़े से चाय पीकर बाजार की कहानी पढ़ो और खुद को समझाओ—"ये बाजार का प्यार है, दर्द सहना पड़ता है!" 

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