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आध्यात्मिक की गहराइयों में डूबने का पवित्र महापर्व है महाशिवरात्रि

#महाशिवरात्रि #Mahashivratri
अघोरी शास्त्र स्वरोदय विज्ञान तंत्र मंत्र यंत्र से लेकर मानव कल्पना से परे दिव्य अलौकिक आध्यात्मिक की गहराइयों को जानने की उत्सुकता प्रत्येक मनुष्य के मन में होती है जीवन का सत्य जानने के लिए लोग सैकड़ों वर्ष की तपस्या मैं भी जो फल प्राप्त नहीं कर पाते जो साल भर में एक बार आने वाले
महापर्व महाशिवरात्रि पर साधना करके कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है जीवन में व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत एक नास्तिक व्यक्ति बन कर करनी चाहिए क्योंकि वह व्यक्ति हर प्रकार के तर्क वितर्क एवं अपनी जिज्ञासाओं को अध्यात्म के रास्ते की गहराइयों में डूब कर खुद हर लमहे को जीकर एवं पाकर अपनी कल्पना से वास्तविक ईश्वर की पहचान कर सकता है
संपूर्ण ब्रह्मांड में एकमात्र शिव स्वरूप परमात्मा जो कि निराकार रूप में सभी और व्याप्त है उसकी खोज मनुष्य का प्रमुख उद्देश्य होता है जिसे पाकर व्यक्ति मोक्ष की कामना करता है
शिव के एक रूप अघोरी जिसके बारे में प्रत्येक व्यक्ति के अंदर उसे जानने की उत्सुकता होती है अघोरी जीवन एक ऐसा जीवन है कि जो सभी प्रकार कामनाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद ही जिया जा सकता है
एक अघोरी हर उस वस्तु को जो उसे दिखाई दे सुनाई दे या महसूस हो उसे शिव के स्वरूप के रूप में देखता है जिसके कारण उन्हें कोई भी कर्म है या चीज बुरी नहीं लगती है वह हमेशा इस प्रकार का जीवन जीते हैं जो आम व्यक्ति की समझ से परे है यह जीवन घोर अध्यात्म का होता है
जब मनुष्य इनके वास्तविक आध्यात्मिक को समझता है तो उसे समझ में आता है कि सांसारिक जीवन से भी बढ़कर अध्यात्म और अध्यात्म से बढ़कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए किए गए विशेष हट योग एवं कर्म से मानव उत्थान एवं कल्याण का रास्ता ही वास्तविक ईश्वर भक्ति एवं ईश्वर को प्राप्त करने का रास्ता है
महाशिवरात्रि को ब्रह्मांड में एक अलौकिक शक्ति का उदय होता है जो उसे एक मनुष्य को शिव स्वरूप बना देती है लेकिन इसके वास्तविक चमत्कारों का लाभ वही व्यक्ति उठा पाता है कि

जो शिवरात्रि के दिन पूर्ण रूप से शिवमय होकर आराधना कर सके
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