संघ बजट 2026: उत्तर प्रदेश के लिए सौगातें और कटौतियां
एक तटस्थ समीक्षा | दिनांक: 02 फरवरी 2026
नमस्कार! भारत के केंद्रीय बजट 2026-27 को 'विकसित भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश, देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य होने के कारण, बजट से बहुत उम्मीदें रखता है—खासकर 2027 विधानसभा चुनावों के नजरिए से। इस ब्लॉग में हम यूपी को मिली सौगातों और हुई कटौतियों का संतुलित, तथ्य-आधारित विश्लेषण करेंगे।
बजट का समग्र परिदृश्य
बजट 2026-27 में कुल व्यय लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है। यूपी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर फोकस है, लेकिन कृषि-ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ राष्ट्रीय कटौतियां चिंता का विषय हैं।
उत्तर प्रदेश को मिली प्रमुख सौगातें
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में उछाल
- दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलिगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर — पूर्वी यूपी में पर्यटन और व्यापार को नई गति
- वाराणसी में नया शिप रिपेयर इकोसिस्टम — गंगा पर कार्गो मूवमेंट और स्थानीय रोजगार बढ़ेगा
- लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो के अगले चरणों के लिए 32,075 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री हब बनने की राह
- नोएडा (जेवर एयरपोर्ट के पास) देश का पहला सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग पार्क
- लखनऊ में एआई सिटी का विकास — युवाओं के लिए हाई-स्किल जॉब्स
- प्रयागराज में नया इंडस्ट्रियल नोड के लिए विशेष फंड
सामाजिक और अन्य महत्वपूर्ण लाभ
- 75 जिलों में एक-एक गर्ल्स हॉस्टल — उच्च शिक्षा में लड़कियों को बढ़ावा
- महात्मा गांधी हैंडलूम योजना और एक जिला-एक उत्पाद को मजबूती
- छोटे तीर्थ स्थलों का विकास + खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प को सपोर्ट
कटौतियां और चुनौतियां
ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्रों में कमी
- ग्रामीण विकास में ~53,000 करोड़, कृषि में ~7,000 करोड़ की कटौती — यूपी की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था प्रभावित
- जल जीवन मिशन का बजट भारी कटौती — ग्रामीण जल आपूर्ति पर असर
- एमजीएनआरईजीए/ग्रामीण रोजगार योजना में बड़ी कमी — ग्रामीण मजदूरों के लिए चुनौती
अन्य क्षेत्रों में प्रभाव
- शिक्षा और स्वास्थ्य में नाममात्र वृद्धि, लेकिन मुद्रास्फीति के बाद वास्तविक कमी
- आरआरटीएस (नमो भारत) प्रोजेक्ट में ~25% कटौती — दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर धीमा पड़ सकता है
समग्र निष्कर्ष
बजट यूपी के लिए मिश्रित पैकेज है। इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी में मिली सौगातें लंबे समय में राज्य को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर ले जा सकती हैं। लेकिन ग्रामीण विकास, कृषि और सामाजिक कल्याण में कटौतियां असमानता बढ़ा सकती हैं।
यदि परियोजनाएं समय पर लागू हों और राज्य-केंद्र समन्वय मजबूत रहे, तो यूपी की विकास गति 12%+ तक पहुंच सकती है। लेकिन ग्रामीण आबादी की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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