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रविवार, 18 फ़रवरी 2024
शनिवार, 8 जुलाई 2023
अंतरिक्ष में मानव निर्मित कचड़े से आने वाली जनरेशन के लिए घातक
पृथ्वी से दूर, अंतरिक्ष में मानव अभियांत्रिकी तेजी से विकसित हो रही है। अंतरिक्ष यात्रा के साथ-साथ मानव निर्मित कलाकारों की भी संख्या में वृद्धि हो रही है। इस वृद्धि के साथ ही अंतरिक्ष में निर्मित उत्पादों से होने वाली समस्याओं को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। इस लेख में हम विभिन्न सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे जो अंतरिक्ष में मानव निर्मित वस्तुओं से होने वाली समस्याओं को बढ़ा सकते हैं:
नगरीय कचरा व्यवस्था: अंतरिक्ष मिशन के दौरान उपयोग किए जाने वाले साधनों, उपकरणों और खाद्य सामग्री का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। इसके साथ ही, उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के अवशेषों का भी प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। अंतरिक्ष मिशन के बाद, इन अवशेषों को सुरक्षित तरीके से प्रबंधित किया जाना चाहिए, ताकि ये पृथ्वी के अंदर वापस लाए जा सकें या सम्पूर्ण रूप से नष्ट कर दिए जा सकें।
जल संकट: अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, जल की मांग बढ़ जाती है, और जल का एक संचयित स्रोत विरान अंतरिक्ष यान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। लंबे समय तक के अंतरिक्ष मिशन में, नवीनतम तकनीकी उपग्रहों के विकास के साथ ही जल संचयन और रीसाइकलिंग की तकनीकों का विकास अनिवार्य होगा।
जहाजों के अवशेष: उपग्रह और अंतरिक्ष यानों के विचारशील डिज़ाइन में जहाज के अवशेषों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की योजना होनी चाहिए। वर्तमान में, अंतरिक्ष यानों के लंबे समय तक के उड़ानों के बाद भी, इन अवशेषों को नष्ट करने के लिए आवश्यक तकनीकों का विकास जारी है।
सूखे संबंधी समस्याएं: अंतरिक्ष में मानव यात्रा के दौरान, विभिन्न सूखे संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, खाद्य सामग्री के संग्रह और संरक्षण
उर्वरकीय प्रदूषण: अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उपयोग होने वाले उर्वरक और रासायनिक पदार्थों का संचय एक मामूली लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दा है। इन पदार्थों को सुरक्षित रूप से नष्ट करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले विधानसभा और प्रयोगशालाएं विकसित की जानी चाहिए ताकि उनका प्रदूषण नवीनतम अंतरिक्ष यानों और उपग्रहों के पर्यावरण पर कोई असर न हो।
अंतरिक्ष जलवायु परिवर्तन: अंतरिक्ष यात्रा मानवों के लिए बड़ी प्रगति है, लेकिन इसके बावजूद यह आपूर्ति और प्रकृति को प्रभावित कर सकती है। अंतरिक्ष में उच्च ऊँचाई, संपीड़न, गुरुत्वाकर्षण की अभाव और विभिन्न प्रदूषण के कारण, यहां परिवर्तनशील ग्रीनहाउस गैसों की उत्पत्ति करना संभव है। इसलिए, वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरत होगी कि उनके उपयोग में आने वाले उपकरणों और तकनीकी प्रगति का अंतरिक्ष जलवायु परिवर्तन पर कोई असर न हो।
संतुलित परिदृश्य: अंतरिक्ष में फैले मानव निर्मित कचरे का प्रबंधन करते समय, संतुलित परिदृश्य और पर्यावरण के लिए ध्यान देना आवश्यक है। जहां तक संभव हो सके, उपग्रहों के अवशेषों को पुनर्चक्रीयता के माध्यम से उपयोग करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें अच्छी तरह से संपादित करना चाहिए। इसके अलावा, प्रकृति की संतुलितता और अंतरिक्ष यानों के व्यापारिक मार्गों के बीच भी संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा।
अंतरिक्ष में मानव निर्मित कलाकारों से होने वाली संभावनाओं के साथ-साथ स्ट्रैटेजिक आइलैंड, अंतरिक्ष द्वीप, और उच्च शिक्षाप्रद कलाकारों को साझा सामूहिक काम करना चाहिए। नवीनतम प्रौद्योगिकी और स्थायी विकास के माध्यम से, हम विवादास्पद और सामरिक अंतरिक्ष यात्रा के नवीनतम मानव निर्मित वस्तुओं से संबंधित समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और साथ ही एक स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।
अंतरिक्ष में मूर्तिकला मानव निर्मित से होने वाली संभावनाओं को दिखाने के साथ-साथ इसके प्रयासों के लिए विभिन्न उपायों का प्रयास किया जा रहा है। यहां हम कुछ प्रमुख समस्याओं के बारे में विचार करेंगे और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे:
स्पेस जंक: स्पेस में फ़्लोरिडा एक्स्ट्रा सैटेलाइट, राकेट टेलीस्कोप, उपयोगिताओं के समूह छोटे और प्रशिक्षुओं की संख्या स्पेस जंक के रूप में जाना जाता है। इसी शुरुआत के लिए, जंक को नष्ट करने और सुरक्षित तरीकों से नष्ट करने के लिए नवीनतम तकनीक का विकास हो रहा है। इनमें से कुछ विधानसभाओं में स्वच्छ अंतरिक्ष मिशन शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष जंक के प्रबंधन और संग्रह को सुनिश्चित करना है।
उपग्रहों के स्पेक्ट्रम: अंतरिक्ष मिशन के बाद उपग्रहों और उपकरणों के स्पेक्ट्रम बच सकते हैं जो पृथ्वी के निकट कक्षा में खतरे पैदा कर सकते हैं। इन अवशेषों को सुरक्षित तरीकों से हटाने और नष्ट करने के लिए सैटेलाइट रिमूवल टेक्नोलॉजी (यूडीटी) का विकास हो रहा है। यूडीटी उपग्रहों के निकट जाने और उन्हें नष्ट करने के लिए सुरक्षित तरीके से प्रदान करने का काम करता है।
सैटेलाइट इंटरसेप्टिंग तकनीक: अंतरिक्ष में सैटेलाइट इंटरसेप्ट करने की तकनीक का भी विकास हो रहा है। इस तकनीक के माध्यम से अविरोधी उपग्रहों को नष्ट किया जा सकता है, जिससे उनका विनाश हो सकता है और क्षति हो सकती है। इस तकनीक के विकास से अंतरिक्ष में उपग्रहों के ठिकानों को कम किया जा सकता है और अंतरिक्ष मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
कैनालटा और आपातकालीन न्यूनैक्रिशन:अंतरिक्ष में गुड़िया की समस्या को हल करने के लिए कैनालटा और आपातकालीन न्यूनैक्रिशन के उपाय अपनाए जा रहे हैं। ये उपाय सामग्री का पुनरुद्धार: प्रयोगिता, रीसाइक्लिंग तकनीक, और खाद्य सामग्री और ऊर्जा का उपयोग बेहतर करने के
निम्नलिखित हैं विश्व के मुख्य अंतरिक्ष एजेंसियाँ और कूलियाँ, जो विभिन्न देशों में स्थापित हैं:
नेशनल एयरोनॉटिक नक्षत्र और अंतरिक्ष प्रशासन मिशन (NASA): यह संयुक्त संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी है, जो मानव और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए जाती है। नासा ने अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट और रोवर्स के माध्यम से अद्यतित सूचना प्रौद्योगिकी और भूकम्प, मौसम, जलवायु परिवर्तन और उपग्रह संचार की तकनीकी विकास किया है।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए): यूरोप के 22 देशों द्वारा संचालित ईएसए, विज्ञान, उपयोगिता और अंतरिक्ष के क्षेत्र में संभावनाओं का समर्थन करता है। यह संगठन उपग्रह निर्माण, अंतरिक्ष आरेख, अंतरिक्ष नेविगेशन और वैज्ञानिक अनुसंधान पर कार्य करता है।
रूसी संघ की अंतरिक्ष एजेंसी (रोस्कोस्मोस): रोस्कोस्मोस रूसी संघ की अंतरिक्ष एजेंसी और प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी में से एक है। इसके प्रमुख अन्वेषणों में मानव अंतरिक्ष यात्राएं, विशाल उपग्रहों की खोज-छिद्र, उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण, अंतरिक्ष अन्वेषण, उपग्रह संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान शामिल हैं।
राष्ट्रीय प्रशासन अंतरिक्ष (सीएनएसए): सीएनएसए चीन की अंतरिक्ष एजेंसी चीन और चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास और सहायक के लिए जिम्मेदार है। अंतरिक्ष यान के माध्यम से अंतरिक्ष अनुसंधान और मिशन वैज्ञानिक कार्रवाई की है।
स्पेस एक स्टॉक एक्सचेंज प्लोरेशन टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन (स्पेसएक्स): स्पेसएक्स एक निजी अमेरिकी उद्यम है जिसे एलन मस्क ने स्थापित किया है। यह मानव और मानव अंतरिक्ष आरेख के लिए दिलचस्प प्रयास कर रही है और उपग्रहों और उपग्रहों के प्रक्षेपण की सुविधा प्रदान करती है। स्पेसएक्स के उद्योग नेतृत्व में रॉकेट्स के पुन:प
सोमवार, 10 अप्रैल 2023
उत्तर प्रदेश सिनेमा उद्योग का प्रमुख केंद्र बिंदु साहू सिनेमा
लखनऊ का साहू सिनेमा उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख सिनेमा है जिसे 1932 में श्री शिव नारायण साहू एव श्री राम नारायण साहू बन्धुओ के द्वारा निर्मित कराया गया था। यह सिनेमा पहली बार 14 मई, 1947 को खुला था। इसके बाद से यह उत्तर प्रदेश में सबसे प्रसिद्ध सिनेमाओं में से एक है। हजरतगंज में‚ 1932 की फ्रेंच शैली की इमारत‚ “साहू थिएटर बिल्डिंग” (साहू थिएटर बिल्डिंग) में नवीनतम पीवीआर (पीवीआर) है। 'प्लाजा' (प्लाजा), 'रीगल' (रीगल), 'फिल्मिस्तान', 'साहू थिएटर' जैसे अतीत में कई नामों के साथ, थिएटर का नया नाम अब 'पीवीआर साहू' (पीवीआर साहू) हो गया है' जो अपने पुराने विश्व आकर्षण को बरकरार रखते हुए आधुनिक दुनिया की सुविधा और विलास को एक साथ लाता है। पहचान से ड्रामा थिएटर, साहू ग्रुप (साहू ग्रुप) का एक सपना था‚ और पीवीआर के प्रबंधन को संभालने से पहले उन्हें क्रियान्वित किया गया था। साहू ग्रुप ने थिएटर में यथोचित वीडियो और स्टाल स्टाइल सीटिंग (स्टाल स्टाइल सीटिंग) के साथ सिंगल स्क्रीन (सिंगल स्क्रीन) को बनाए रखने का फैसला किया, लेकिन देखने के अनुभव पर कोई समझौता नहीं किया, इसे बारको 4के आरजीबी लेजर प्रोजेक्शन (बार्को 4के) आरजीबी लेजर प्रोजेक्शन)‚ हार्कनेस सिल्वर स्क्रीन (हार्कनेस सिल्वर स्क्रीन) और साहू थिएटर बिल्डिंग का प्रवेश द्वार अब पूरी तरह से बदल दिया गया है, यह अब एक सुंदर अमेरिकी जैसी दिखती है, जिसमें निचली ओर महीने और कुर्सियों के साथ प्रतीक्षा क्षेत्र और एक अच्छी तरह से प्रकाशित, सुंदर दिखने वाला बॉक्स ऑफिस और या सिनेमा प्रवेश द्वार है। चमकीला झूमर‚ गर्म रोशनी‚ डिज़ाइनर साइड पैनल और संगमरमर की लॉबी‚ इसका शाही आकर्षण को दर्शाते हैं। इसके अलावा लाल और चमकदार रंगों की आलीशान आंतरिक सज्जा और "आर्ट डेको" शैली की दीवार और छत इसे आकर्षक भी बनाते हैं।
आज के समय में साहू सिनेमा को अपने अत्यधिक सीट कैपेसिटी और उन्नत सुविधाओं के लिए जाना जाता है। साथ ही यह उत्तर प्रदेश की फिल्म उद्योग की नींव में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
लखनऊ का दिल है हजरतगंज बाजार
हजरतगंज लखनऊ का एक बड़ा बाजार है जो उत्तर प्रदेश राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस बाजार में वस्तुओं के विशाल विकल्प हैं जिनमें वस्तुएं, खाद्य पदार्थ, पुस्तकें, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, कपड़े और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
हजरतगंज का नाम मुगल शासक जहाँगीर के गुरु हजरत मखदूम तालिब जहांगीर के नाम पर रखा गया था। इस बाजार में लगभग 2000 से अधिक दुकानें हैं जो अपने आकर्षक उत्पादों के लिए मशहूर हैं।
इस बाजार की शुरुआत लखनऊ के नवाबों द्वारा की गई थी क्योंकि अंग्रेजों के शासन में अंग्रेजों के लिए स्पेशल बाजार हुआ करते थे जहां पर विदेशी सामान बिकता था और खरीददार ज्यादातर अंग्रेज लोग ही होते थे कुछ बाजारों में स्थानीय राजा रजवाड़े के लोग भी सामान खरीदा करते थे उन्हीं की तर्ज पर स्थानीय नवाबों द्वारा आम लोगों एवं खास लोगों की खरीदारी के लिए स्पेशल हजरतगंज बाजार बनवाया था जहां पर ज्यादातर विदेशी दुकानदार अपने उत्पादों को बेचा करते थे और भारतीय लोग इन सामानों को बड़े शौक से खरीदते थे
हजरतगंज का अन्य चर्चित स्थान है
हजरतगंज मंदिर, जो भारत के सबसे बड़े हनुमान जी के मंदिरों में से एक है। इसके अलावा, एक और धार्मिक स्थल है, हजरत मकदूम सहब का मजार, जो शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
लखनऊ के हजरतगंज बाजार में खाने के लिए कई स्थान हैं, जहाँ आप लखनवी खाने का मजा ले सकते हैं।
इनमें तुंडे कबाब, गलौटी कबाब, दही भल्ले, लखनवी बिरियानी, तंदूरी चाय, रॉयल कैफे शाही चाट , शाही पान , स्पेशल मोती महल डोसा, स्पेशल छोले भटूरे, छोले पूरी, आलू कुलचे, जैसे दर्जनों खानपान की वैरायटी की लगभग दर्जनों विश्वविख्यात दुकान यहां पर स्थित है
यहां का बाजार लोगों की आकर्षण का विशेष केंद्र बना रहता है यहां की शाम ए अवध कहलाती है
जो कि मध्य रात्रि तक यहां की खान पान की दुकान खुली रहती है और लोग बड़े आनंद से अपने दोस्त यारों रिश्तेदार एवं परिवार के साथ लखनवी शान ओ शौकत का मजा लेते हैं
शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022
पाकिस्तान को जिम्बाब्वे ने 1 रन से हराया हुआ बवाल
विश्व कप 20-20 किर्केट के एक अहम मुकाबले में पहले से ही भारत से हार चुकी पाकिस्तानी टीम की मुसीबतें बड़ी हुई थी
लेकिन किसी ने सोचा भी न था कि पाकिस्तानी टीम सबसे निचले क्रमांक तालिका की टीम जिम्बाब्वे से भी हार जाएगी
जिम्बाब्वे की क्रिकेट टीम ने अपने अच्छे खेल के बदौलत दुनिया भर के क्रिकेट खेल प्रेमियों चकित कर दिया रोमांचित मुकाबले में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को मात्रा एक रन से हराकर उथल पुथल मचा कर पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ा दी
भारत से हार के बाद जिस तरह से पूरे पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसकों निराशा थी और खेल को एक युद्ध की तरह से देखने के कारण वह पाकिस्तानी क्रिकेट टीम से आशा कर रहे थे कि टीम अपने बचे हुए मुकाबलों को जीत कर सेमीफाइनल और फाइनल मैच के मुक़ाबले में भारतीय क्रिकेट टीम से हार का बदला ले लेकिन जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम से हार के बाद पाकिस्तानी टीम का सेमीफाइनल मुकाबले में पहुंचना मुश्किल हो गया है
सबसे बड़ी वजह जिम्बाब्वे की क्रिकेट टीम से हार के बाद विश्व भर में सभी सोसिल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तानी क्रिकेट टीम और उनके समर्थकों की खिचाई हो
मजाक बनने की शुरुआत होने के बाद तो मिम्स की बाढ सी आ गई है जिसमें जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति का ट्यूट्स और वहा के मीडिया एंकर का न्यूज चैनल पर प्रसारित समाचार में हस्ते हुए जानकारी का वीडियो हर कोई मजे से रीट्यूट्स और शेअर कर रहा है
पाकिस्तान टीम की हार पाकिस्तान में एक राजनैतिक मुद्ददा बन सकता है जो वहा के क्रिकेट बोर्ड और सत्ताधारी सरकार में उथल पुथल मचा सकती हैं और बेचारे पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान के साथ सभी टीम मेंबर की तो समझो शामत आने बाली हैं
इसी लिए तो कहा जाता हैं कि खेल को खेल रहने दो उसे युद्ध का मैदान ना बनाओ
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022
भारतीय मूल के ऋषि सुनक होगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
जिस देश के साम्राज्य में कभी भी सूरज नहीं डूबा उस देश ब्रिटेन में कई दिनों से राजनीतिक उथल-पुथल भरे माहौल के बीच पेरी मांर डेंट के नाम बापिस लेने के बाद आधिकारिक ऐलान किया गया कि भारतीय मूल के ऋषि सुनक होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री यह खबर की जानकारी जब विश्व भर में फैली तो भारत में मन रहे त्योहार दीपावली की खुशी भारतीयों के लिए कई गुना बढ़ गई
क्योंकि हर भारतीय के लिए यह ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है जिस देश को अंग्रेजों द्वारा 100 वर्ष से अधिक समय तक गुलाम बनाए रखा उस देश में से कोई भारतीय मूल का प्रधानमंत्री बनने जा रहा वह भारतीयों के लिए गर्व की बात है
और अंग्रेजो के संविधानिक शक्ति अधिकार की जितनी तारीफ की जाए कम है
आर्थिक मंदी की आशंकाओं और यूक्रेन रशिया युद्ध से बने हालातो के बीच यूरोप भर में राजनैतिक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इस समय में ऋषि सुनक को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद की चुनौतियों का सामना करना आसान काम नहीं है
लेकिन नए प्रधानमंत्री से यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन के लोगों को लेकर काफी आशाएं है कि इस बार के क्रसमिस के पहले सब कुछ सही हो जाएगा
भारतीयो को ऋषि सुनक के प्रधान मंत्री बनने के बाद क्या लाभ होगा यह कह पाना अभी जल्दबाजी होगा क्योंकि राजनीतिक हालात अभी भी पूरी तरह से यूरोपीय संघ और अमेरिकी ,नाटो के राजनीतिक हालात और रूस के अगले कदम से तय होंगे
कुछ भी हो लेकिन भारतीयों में गजब का उत्साह बना हुआ हैं जिसका एक ओर कारण ऋषि सुनक का भारत में बहुसंख्यक समुदाय हिन्दू होना बताया जा रहा है
ऋषि सुनक के प्रधान मंत्री बनने की आधिकारिक घोषणा होने के बाद विश्व भर में सभी सोशिल मीडिया में तरह तरह के मीम्स और कहानी आने लगी हैं
ऋषि सुनक को लेकर लोग उनसे मिलती जुलते फोटो को डालकर जोक्स बना रहे है
रविवार, 12 सितंबर 2021
बरुआसागर का ऐतिहासिक झरना तालाब हुआ ओवरफ्लो कल कल करते हुए बहने लगा झरना
बुंदेलखंड के झांसी जिले से 20 किलोमीटर दूर बरुआसागर में स्थित चंदेल कालीन ऐतिहासिक स्वर्ग आश्रम झरना तालाब जो कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं धार्मिक आस्था के लिए पूरे बुंदेलखंड में बुंदेलखंड के शिमला के रूप में पहचान रखता है जहां के दिव्य संत स्वामी शरणानंद जी एक उच्च कोटि के संत थे बरुआ सागर तालाब से झरने वाला झरना बहुत ही प्रसिद्ध है यहां पर दूर-दूर से देशी एवं विदेशी पर्यटक बरसात के मौसम में झरना देखने के लिए आते हैं कुछ वर्षों से तालाब पूर्ण रूप से ना भर पाने के कारण स्वर्ग आश्रम झरना के प्राकृतिक सौंदर्य एवं झरने वाले कल कल करते झरने पर अठखेलियां करने का लोगों को आनंद नहीं मिल पा रहा था लेकिन कुछ वर्ष पूर्व हुई अत्यधिक बारिश से जहां पिछले वर्षों में लाखों की संख्या में सैलानी बरुआसागर झरने पर आए लेकिन इस बार तालाब के समय से ना भर पाने के कारण अभी तक पर्यटक तालाब के ओवरफ्लो होने के इंतजार में थे लेकिन लोगों की इंतजार की घड़ियां गणेश महोत्सव की शुरुआत होते ही खत्म हो चुकी हैं बरुआसागर का इतिहासिक झरना तालाब पूरी तरह से भर चुका है अब यह ओवरफ्लो होकर पूर्ण रूप से झरना चालू हो गया है
स्थानीय लोगों के साथ दूर-दूर से लोग इसके सुंदर को निहारने के लिए झरना तालाब पर पहुंच रहे हैं आप सभी से निवेदन है की कुछ वर्षों में झरना में पानी का आनंद लेते हुए इस की गहराइयों से अनभिज्ञ बाहरी लोग तालाब की गहराइयों में चले जाते या इसकी तीव्रता से बहने के कारण उसके साथ बह जाते हैं जिससे बड़ी दुर्घटना घटित हो जाती है जिससे प्रसिद्ध इतिहासिक धार्मिक प्राकृतिक स्थल पर घटित बुरी दुर्घटना एक दाग के रूप में दर्ज हो जाती है इसीलिए बाहरी लोगों से निवेदन है कि सतर्क एवं संरक्षित होकर तालाब के पास जाएं और प्राकृतिक सौंदर्य का लाभ उठाएं बरुआसागर झरना तालाब हिंदू धार्मिक आस्था के केंद्र बिंदु मठ परंपरा के कारण जाना जाता है इसलिए यहां मांसाहारी भोजन एवं शराब पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है इसीलिए यहां के धार्मिक माहौल को ध्यान में रखकर भोजन कार्य एवं सफाई का ध्यान रखें सुरक्षित रहें संरक्षित रहें जय बुंदेलखंड जय स्वामी शरणानंद🙏🙏🙏🌦🌦🌧🌝🚩🚩🚩
सोमवार, 14 जून 2021
विश्व रक्तदान दिवस पर 100 बी बार किया रक्तदान देश के हर युवा के लिए विशेष प्रेरणा स्त्रोत निशांत साहू (गगन)
अपने लिए जिया तो क्या जिया कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखो
कोरोनावायरस महामारी काल में जब लोगों के अपनों ने साथ छोड़ दिया तो तब समाज के ऐसे महान लोग सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए भी लोगो की जान बचाने के लिए बिना किसी स्वार्थ के तन मन धन से मदद की उन्हीं में से एक युवा जो बिना किसी पुरस्कार एवं प्रशंसा की लोगों की मदद करता रहा और बरसों से कर भी रहा है
युवा ब्लड डोनर एवं समाजसेवी निशांत साहू गगन
प्रत्येक 14 जून को विश्व में रक्तदान दिवस मनाया जाता है जिसमें लोगों को अधिक से अधिक रक्तदान करने के लिए जागृत किया जाता है सच में जरूरतमंदों को रक्तदान सबसे बढ़ा महादान होता है यह दान धर्म जाति मजहब से परे सिर्फ इंसानियत को देखता है रक्त की अहमियत वह व्यक्ति जानता है 
जिसका कोई अपना परिवार का सदस्य रक्त के बिना जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है हमारे देश में लाखों लोग रक्त की कमी की वजह से समय से पहले मृत्यु को गले लगा लेते हैं आज हमारा देश इतना आधुनिक होने के बाद भी लोगों को रक्तदान के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक नहीं कर पा रहा है
वर्तमान में भी में रक्तदान के प्रति लोगों में कई भ्रांतियां फैली हुई है लोग रक्तदान करने से डरते हैं जबकि सभी को पता स्वस्थ मनुष्य 5 से 6 लीटर तक होता है रक्त नियमित रूप से शरीर में बनता रहता है आपके नजदीक कुछ तो ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी लोग मिल जाएंगे जो जीवन में अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं और अकाल मृत्यु से लोगों की जान बचा चुके हैं
ऐसे ही एक बहुमुखी प्रतिभा का धनी युवा निशांत साहू गगन जो कि देश भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत की तरह है अनेक समाजसेवी उनकी
साधारण और शालीनता भरी उसकी कार्यशैली से काफी प्रभावित है

देश के हृदय बुंदेलखंड के झांसी जिले के छोटे से कस्बे बरुआसागर के निवासी गगन साहू जो कि इलाहाबाद में अपने अध्ययन काल में साथ की पढ़ने वाली छात्रा को माइग्रेन अटैक आने पर उसे स्वेच्छा से प्रथम बार रक्तदान किया इसके बाद अब तक मात्र 29 साल की छोटी सी उम्र में 100 बार रक्तदान कर चुके एवं क्षेत्र के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत वन कर युवाओं के द्वारा 500 से अधिक बार रक्तदान करवा चुके है इनका यह सामाजिक कार्य पूरे क्षेत्र में सराहा जा रहा है
गगन साहू को समाजसेवा अपने परिवार से विरासत में मिली हुई इनके पिता हरी राम साहू नगर के प्रतिष्ठित संगीतकार चित्रकार एवं बहु मुखी प्रतिभा के धनी यह पूर्व में राष्ट्रीय युवा योजना से लेकर अनेक सामाजिक संगठनों से जुड़कर राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक कार्य कर चुके हैं गगन साहू वर्तमान में सिविल सर्विसेज की तैयारी एवं घर के व्यवसाय में हाथ बटाने के साथ ही सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं गगन साहू देश के अनेक हिस्सों में जाकर रक्तदान कर चुके हैं वहीं क्षेत्रीय स्तर पर इनकी विशेष युवाओं की रक्तदाता टीम है

जोकि जरूरतमंद लोगों को रक्त एवं रक्त दाता मुहैया कराती है गगन की टीम के अनेकों सदस्य ऐसे हैं जो अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं एवं उनकी टीम प्रत्येक बल गणेश महोत्सव के अवसर पर एक विशाल रक्तदान शिविर जिला चिकित्सा अधिकारी के संरक्षण एवं सहयोग से आयोजित कराते हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करते हैं एवं लोगों से रक्तदान करने के लिए जागरूक एवं अपील करते हैं इस पुनीत कार्य के लिए गगन साहू एवं उनकी टीम झांसी
जिला अधिकारी झांसी जिला चिकित्सा अधिकारी से लेकर अनेक राजनैतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों द्वारा सम्मानित हो चुकी है
जोकि जरूरतमंद लोगों को रक्त एवं रक्त दाता मुहैया कराती है गगन की टीम के अनेकों सदस्य ऐसे हैं जो अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं एवं उनकी टीम प्रत्येक बल गणेश महोत्सव के अवसर पर एक विशाल रक्तदान शिविर जिला चिकित्सा अधिकारी के संरक्षण एवं सहयोग से आयोजित कराते हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करते हैं एवं लोगों से रक्तदान करने के लिए जागरूक एवं अपील करते हैं इस पुनीत कार्य के लिए गगन साहू एवं उनकी टीम झांसी
जहां एक और लोगों में रक्तदान के प्रति अनेक भ्रांतियां एवं भय रहता है वही गगन एवं गगन साहू की टीम के सदस्य बस एक फोन का इंतजार करते हैं कि किस जरूरतमंद का फोन आए और हम उसे रक्तदाता उपलब्ध कराएं सच में हर कोई चाहता है कि गगन जैसे लोग समाज मैं लोगों के लिए प्रेरणा बने एवं सभी लोग आगे आकर इस प्रकार की पुनीत कार्य करके अपना जीवन सार्थक बनाएं दुनिया में हर कोई महान बन सकता है लेकिन उसके लिए गगन साहू जैसे ईमानदारी के साथ लग्न और दृढ़ इच्छाशक्ति चाहिए क्योंकि वर्तमान में
जिस प्रकार से युवा नशाखोरी हवा हवाई जीवन शैली सोशल मीडिया तक सीमित रह कर राजनीतिक पार्टियों के लीडरों की जय जयकार एवं गालियां देकर अपना समय बर्बाद करता है वही दूसरी ओर असली देश सेवा एवं समाज सेवा गगन जैसे लोग करते हैं एवं अपने जीवन को सार्थक बना लेते हैं निशांत साहू गगन अनेक पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं लेकिन आज भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा पुरस्कार ना मिलने पर स्थानीय लोगों में आश्चर्य है
जब कोरोनावायरस महामारी काल में काम करने वाले लोगों को पुरस्कृत किया जा रहा था तो गगन जैसे अनेक युवा प्रथम पंक्ति के काबिल थे लेकिन अंतिम कतार में भी नजर नहीं आ रहे थे जो समाज के सिस्टम पर सवाल उठाता ऐसे लोगों को प्रोत्साहन मिलना बेहद जरूरी है गगन के सराहनीय कार्य पर हम सभी उन्हें दिल से सलाम करते हैं🙏💐🎉🎉✍️awaj
गुरुवार, 3 जून 2021
विश्व साइकिल दिवस पर वो साइकिल और बचपन की यादें जो शायद कभी लौट कर ना आए
#विश्व_साइकिल_दिवस
हर किसी के बचपन का जुड़ाव साइकिल से किसी ना किसी रूप में जरूर रहा होगा बचपन के उन दिनों की याद जरूर आ जाती है जब साइकिल एक रुपए पर घंटे किराए पर मिला करती थी चला पाए या ना चला पाए वह अलग बात थी क्योंकि आसपास ऐसे दोस्त भी हुआ करते थे कि जो सिखाने के बहाने खुद मजे लूटते थे 1 घंटे के लिए मिलने वाली साइकिल में ज्यादातर समय चैन चढ़ाने और हवा भरने में ही निकल जाता था
यदि सब कुछ ठीक रहा तो किराए की साइकिल की खराब घंटी एवं कमजोर ब्रेक की समस्या हमेशा बनी रहती थी जिसके कारण किसी से टकराया ना उसका उत्तरदायित्व पीछे से गाइड कर रहे दोस्त और अपने पैरों का ज्यादा रहता था कैंची डंडा सीट वाली साइकिल सीखने की प्रक्रिया में चलाते समय सबसे ज्यादा ध्यान फ्रेंड लोगों की तरफ रहता था और सिखाने वाले हमेशा कहते थे सामने देखो यदि साइकिल की स्पीड अधिक हो गई और पीछे से गाइड करने वाले दोस्त पीछे छूट गए तो लोगों को हटाने एवं साइकिल को कंट्रोल करने का एक ही सहारा होता था साइकिल को रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए बार बार चिल्लाना भाई साहब हट जाओ भाई साहब हट जाओ साइकिल में ब्रेक नहीं है फिर भी किसी ना किसी से टकरा जाती थी
उसके बाद शुरू होती थी जांच पड़ताल किसके लड़के हो साइकिल चलाना नहीं आता क्या देखो हमें कितनी लग गई हमारा इलाज कराओ इन सभी सवालों के बीच पीछे साइकिल सिखाने वाले दोस्त रफू चक्कर हो जाते थे मन में डर होता था कि अब शायद घर पर शिकायत ना पहुंच जाए उससे ज्यादा टेंशन किराए की साइकिल की टूट-फूट एवं किराए का एक घंटा पूरे होने का भी रहता था कि अगर 5 मिनट भी ज्यादा हो जाएंगे दूसरे घंटे के भी पैसे देने पड़ेंगे
साइकिल सीखते समय साइकिल का गिरना एक आम बात होती थी और हमेशा सिखाने वाला एक ही डायलॉग मारता था जब तक गिरोगे नहीं तब तक चलाना सीखोगे नहीं आज भी अनेक लोगों के घुटनों में साइकिल से गिरने से बने चोट के निशान बने हुए देखे जा सकते हैं जो कि उस नादान बचपन की याद के तौर पर हैं
उस समय लगभग सभी बच्चों की अपने घर वालों से एक ही आसान और मांग रहती थी कि उन्हें नई साइकिल कब मिलेगी
अब लगभग हर घरों में मोटरसाइकिल कार जरूर आ गए हो लेकिन ओ है किराए की साइकिल चलाने का मजा शायद अब कभी लौट कर ना आए🎯
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