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AI टूल्स डायरेक्टरी — निष्पक्ष पत्रिका
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निष्पक्ष पत्रिका · AI टूल्स डायरेक्टरी · संपादक: रविंद्र साहू
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रविवार, 25 अप्रैल 2021

कोरोनावायरस महामारी की लड़ाई में सबसे कमजोर कड़ी बुजुर्ग इंसान




🌍वैश्विक 😷कोरोना🐉वायरस ☠️महामारी काल की सबसे 🎭कमजोर कड़ी उम्र दराज 👴बुजुर्ग लोग हैं विश्व भर में जितने भी आंकड़े आए हैं उस पर सबसे ज्यादा मृत्यु दर एवं समस्या बुजुर्ग लोगों की हो रही है क्योंकि  उम्र के अंतिम पड़ाव में विभिन्न बीमारियों से घिरे बुजुर्ग दादी दादा मां बाप अन्य लोग जो कि लगभग साथ 65 साल से ऊपर के हैं उन्हें इस समय बेहद की देखभाल की जरूरत है कोरोनावायरस की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी मैं उसकी जानकारी ना दे क्योंकि डर भरे माहौल में एक नेगेटिव सूचना उनके जीवन की डोर को तोड़ सकती है  इसलिए जितना हो सके इस समय उनके साथ रहकर उनकी उचित देखभाल कर कर उन्हें पॉजिटिव सोचने एवं पॉजिटिव रहने के लिए माहौल देने की विशेष जरूरत है मीडिया के माध्यम से बेहद थी दर्द भरी दुखी करने वाली  घटनाएं सामने आ रही है जिसमें सभ्य समाज के पढ़े-लिखे लोग जिनके लिए उनके मां बाप ने बेहतर भविष्य के लिए अपने सपनों को कुर्बान कर दिया और जीवन के अंतिम पड़ाव में उनसे अपने अच्छे जीवन के पल की आशा करके उनको सब कुछ दे दिया लेकिन वह अपने बुजुर्ग परिवार के सदस्यों को अपने हाल पर छोड़ कर अपने अपने काम में व्यस्त हैं हालात ये हैं कि बुजुर्गों की सामान्य स्थिति होने के बाद भी हॉस्पिटल में भर्ती करके उनकी सुध लेने लेने की जरूरत नहीं समझते और जब वह किसी अपने को अपने बीच ना पाकर अपनी जिंदगी से हार मानकर मौत के सामने समर्पण कर देते हैं या हॉस्पिटल के कर्मचारी उनकी जान की कीमत को मामूली समझकर किसी और को वरीयता देकर उन्हें उचित देखभाल एवं दवाइयां ना देकर उन्हें समय से पहले मरने के लिए छोड़ रहे है मरने के बाद  उनकी डेड बॉडी को भी लेने के लिए उनके  अपने लोग हाथ खड़े कर रहे हैं इस प्रकार के हालात से समाज का कुरूप चेहरा देखने को मिल रहा है जो बेहद ही दुखद एवं निंदनीय है आप सभी से निवेदन है कि अपने बुजुर्ग परिवार के सदस्यों का उचित ख्याल रखें क्योंकि जीवन रहे ना रहे लेकिन समाज का ताना-बाना बना रहना चाहिए और ऊपर वाले की लाठी से डरना चाहिए क्योंकि आज हमारा समय है कल किसी और का होगा🎯

शनिवार, 24 अप्रैल 2021

भारत में कोरोना वायरस महामारी को चरम पर पहुंचने में आखिर गलती किसकी है

 


कहते हैं कि #बेवकूफ और #बहादुर  में नाम मात्र का फर्क होता है कामयाब हुए तो बहादुर वरना बेवकूफी कहा जाएगा वर्तमान समय में जिस हालात से हमारा देश गुजर रहा है उसमें सबसे बड़ी जिम्मेवार हमारे देश की सरकार की विदेश नीति एवं आम लोगों की लापरवाही नीतिया हैं क्योंकि लगभग एक साल पहले हम लोग पूरे विश्व मैं #कोरोनावायरस महामारी के विकराल रूप को देखकर बड़े-बड़े देशों को बेवकूफ समझ रहे थे अपने आप को हार्ड ह्यूमैनिटी पावर का स्वयंभू स्वामी समझ रहे थे विश्व बैंक एवं विश्व हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के साथ बड़े-बड़े देशों ने भारत के लिए अनेक घोषणा पहले से कर दी थी कि कोरोनावायरस महामारी सबसे ज्यादा तबाही भारत जैसे विकासशील देश में मचाएगी जिसमें लगभग 20 लाख लोगों के संक्रमण से मौतों  की संभावना व्यक्त की थी जिसके बचाव एवं आपातकालीन व्यवस्था की तैयारी के लिए उन्होंने भारत को लाखों करोड़ों डॉलर का कर्ज एवं सहायता दी जो प्लान और टारगेट के हिसाब से 2024 तक पूरे भारत में जन जागरूकता अभियान सुरक्षा समय-समय पर लॉकडाउन वैक्सीनेशन प्रोग्राम बड़े-बड़े हॉस्पिटल एवं चिकित्सक सामग्री तैयार करने के लिए थे लेकिन कुछ कारणवश पिछले वर्ष वह वायरस इतना प्रभावी नहीं हुआ जिस कारण यहां की सरकार एवं लोग पूरी तरीके से लापरवाह हो गए और अपने आपको  कोरोना वायरस महामारी से जंग में खुद विजेता घोषित कर दिया और जितने भी देश के संसाधन थे दानवीर बन कर विभिन्न देशों में बेचना और बांटना चालू कर दिया इतने बड़े देश की जरूरतों को अनदेखा कर देश में बनी वैक्सीन को अनेक देशों में वितरित करना एवं भारी मात्रा में विभिन्न देशों को बिन मांगे राहत सामग्री पहुंचा कर अपने आप को तीस मारखा साबित करने की कोशिश की गई वर्तमान समय में जब कोरोनावायरस महामारी हमारे देश में चरम पर है और पूरा चिकित्सा तंत्र छिन्न-भिन्न होने की कगार पर है देश के हर कोने में त्राहि-त्राहि मची हुई है दवाओं की कालाबाजारी ऑक्सीजन की किल्लत और श्मशान में जलती लाशों के बीच कुछ  अमेरिका जैसे एहसान फरामोश देशों द्वारा भारत को वैक्सीन बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल सॉल्ट एवं मेडिकल सामग्री को देने से स्पष्ट मना कर दिया जो भारत अपने आप को दानवीर कहकर दोनों हाथों से अपने संसाधन दुनिया भर के देशों पर लुटा रहा था उस विशाल देश को मदद के समय कोई भी बड़ा देश सामने नहीं आ रहा क्योंकि वर्ल्ड बैंक और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने स्पष्ट दो टूक कहा कि भारत की अंदरूनी राजनीतिक नीतियों के कारण बड़ी लापरवाही एवं फंड का सही से इस्तेमाल नहीं किया है एवं विशेष निर्देश देने के बाद भी राजनीतिक चुनाव धार्मिक आयोजन पर लगाम नहीं लगाई गई अब ऐसे समय में दोष किसको दिया जाए जान है तो जहान है अपने देश के लोग खुशी हो तभी देश महान है 🎯

शनिवार, 17 अप्रैल 2021

देश के उद्योगपतियों को आगे आकर कोरोना वायरस महामारी में उपयोग होने वाली दवाएं इंजेक्शन वेंटिलेटर निशुल्क उपलब्ध कराकर लोगों को इस महामारी से उभरने में सहयोग करने की जरूरत

 


🐉कोरोनावायरस ☠️महामारी के संक्रमण से भयानक होते माहौल में सबसे ज्यादा कमी महसूस की जा रही है तो वह है यह  रेमडेसिवरी इंजेक्शन वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन की जिसके डोज से काफी हद तक कोरोना वायरस के विभिन्न स्टेज के मरीज को राहत प्रदान की जाती है वर्तमान समय में पूरे देश भर में  यह  रेमडेसिवरी इंजेक्शन कालाबाजारी के कारण चर्चित है हॉल सेल बाजार में मात्र हजार रुपए का आने वाला इंजेक्शन 15000 से लेकर ₹30000 तक में बेचा जा रहा है फार्मा सेक्टर के बारे में पिछले वर्ष बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है और भारत के पास इतनी क्षमता है कि वह है विश्व भर के लोगों को राहत प्रदान कर सकता है लेकिन वर्तमान में एक प्रदेश दूसरे प्रदेश को भी यह इंजेक्शन सप्लाई करने दे मैं हाथ खड़े कर रहे हैं जिस तरीके से हालात एकदम से बेकाबू हुए हैं उससे लोगों में दहशत का माहौल है क्योंकि देश की चिकित्सा व्यवस्था चरमराने की  कगार पर है अपने टेलीविजन पर पिछले वर्ष कई देशों के हालात देखकर लोग चर्चा करते थे अब वही हालात हमारे देश में भी बनती दिखाई दे रहे हैं ऐसे समय में लोग अपने हाल पर जीवन और मृत्यु से जूझ रहे हैं ऐसे समय में प्राइवेट हॉस्पिटल और दवाओं की कालाबाजारी लोगों के कारण मानवता का क्रूस चेहरा उजागर हुआ है ऐसे समय में बड़े-बड़े उद्योगपतियों को आगे आकर लोगों को इस प्रकार की दवाएं और इंजेक्शन निशुल्क मुहैया कराने के लिए कार्य करने की जरूरत है क्योंकि यदि देश के हालत जरूरत से ज्यादा बिगड़ेंगे तो सबसे ज्यादा लोगों का गुस्सा सरकार एवं उद्योगपतियों पर ही फूटेगा 🎯

बुधवार, 14 अप्रैल 2021

प्रत्येक सर्दी जुखाम खांसी 🐉कोरोनावायरस संक्रमण नहीं होता

 


☠️डर के आगे जीत है?                     वर्तमान समय में फैली महामारी से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है महामारी जितनी बड़ी है उससे बड़ा प्रचार प्रसार और प्रोपेगेंडा जिसके तहत अनजाने में ही लोग मनोरोगी बन रहे हैं प्रत्येक वर्ष चैत माह मैं वायरल सर्दी जुखाम बुखार दस्त होना आम बात लेकिन हर तरफ कोरोना वायरस महामारी के डर से लोग अनजाने में अपने होने वाले आम सर्दी जुखाम फीवर को भी कोरोनावायरस का संक्रमण समझ रहे हैं और अंदर ही अंदर घुटन के कारण लो बीपी हाई बीपी हार्ड की समस्याओं और गर्म तासीर के काढ़ा जरूरत से ज्यादा गरम पानी पीकर अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं कोरोनावायरस महामारी से सुरक्षा जरूरी है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है अपने अंदर आत्मविश्वास लाना कि हम किसी प्रकार के वायरस से लड़ सकते हैं और हमारा शरीर इतना परिपक्व है की हम कुछ दिनों में सही हो जाएंगे इसी सोच को लेकर हम महामारी पर और इस  मानसिक बीमारी पर जीत हासिल कर सकते हैं कोरोनावायरस महामारी से मरने वालों में सबसे अधिक संख्या उन लोगों की है जो पहले से ही विभिन्न बीमारियों से ग्रसित रहे और कोरोना वायरस के डर से हार्ड फेल एवं जीवन जीने की आस को छोड़ देने वाले ही लोग ज्यादा है जिन्हें भी कोरोनावायरस का संक्रमण हुआ है उन्हें एक पॉजिटिव सोच रखनी बेहद जरूरी है तभी हम इस बेहतर जीवन को और बेहतर बना सकते मानसिक तनाव को कम करें टीवी कम देखें हल्का-फुल्का व्यायाम करें प्राणायाम करें फीवर सर्दी जुकाम होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल विटामिन सी की दवा का यूज़ करें स्वस्थ एवं सात्विक भोजन करें और अपने आप को विश्वास दिलाय कि हम यदि संक्रमित हो जाएंगे तो स्वस्थ भी हो जाएंगे स्वस्थ निर्देशों का पालन करते हुए घर पर रहें सुरक्षित रहें।       🙏धन्यवाद 💐💐

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

आम जनमानस के लिए नासूर बन चुकी दवा कंपनियों की कमीशन खोरी की इस व्यवस्था को बदलने की अति आवश्यकता है


 🤔आखिर कब तक चलेगी देश में इस प्रकार की लूट भ्रष्टाचार मिटाने की बाते तो बड़े-बड़े  मंचों लाल किले संसद भवन से की जाती है लेकिन वास्तविक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान उन्हीं लोगों का है जो इस प्रकार के लूट का खसोट  षड्यंत्रकारी कार्य कराने में बड़ी-बड़ी कंपनियां का सहयोग करते हैं आज भारत देश में चिकित्सा पद्धति पूरी तरीके से व्यापार बन चुकी है जो डॉक्टर दवा कंपनी  भगवान का रूप  माने जाते थे वह साक्षात मौत के सौदागर बन गए हैं लोग जानते हुए भी कि सामने वाला हमें लूटने के लिए बैठा है फिर भी लूटने के लिए मजबूर है दवा कंपनियों की लूट का आलम यह है कि किसी दवाई का मूल्य उसके तय मूल्य से हजार गुना से भी अधिक बढ़ाया जा सकता है जो दवा कंपनियों की इस कमीशन खोरी को जानता है वह तो रेट कम करा लेता है लेकिन जो गरीब आम व्यक्ति है वह हमेशा कथित लूट का शिकार होते हैं अब सवाल यह है हमेशा आम जन हित की बात करने वाली सरकारे कई दशकों बाद भी जन हित में अंतर्राष्ट्रीय दवा कंपनियों के इस मायाजाल को तोड़ने के लिए विशेष कानून लाकर नीति निर्धारण करके एक सीमित मार्जन पर दवाइयां बेचने के लिए दवा कंपनियों को कानूनी रूप से बाध्य क्यों नहीं करती सोचने का विषय है 🎯 ✍️ आवाज एक सच्चाई की

शनिवार, 13 मार्च 2021

हर किसी पर आंख बंद कर विश्वास घातक हो सकता है सनम तो डूबेंगे आप को भी ले डूबेंगे


 जीवन में मनुष्य कुछ पाने  के लिए हर किसी पर आंख बंद कर विश्वास करने लगता है और वह सोचता है कि जिस पर मैं विश्वास कर रहा हूं वह मुझे सफलता के आसमान पर पहुंचा देगा

लेकिन हर रथ के  सारथी श्री कृष्ण नहीं होते  अनजाने में लोग ऐसे व्यक्तियों पर भी विश्वास कर लेते हैं जो कुशल सारथी होने का ढोंग कर कर गलत तरीके से रथ पर बैठ जाते हैं जो भविष्य में उन्हें पूरी तरीके से बर्बादी के रास्ते पर पहुंचा देते 


प्रथम विश्व युद्ध के बाद  विश्व भर में अपने कारनामों एवं अपनी अहंकारी नीतियों को लागू करके हिटलर पूरे विश्व भर में अपनी तानाशाही के बल पर अपने आप को सर्वश्रेष्ठ कहलाने के लिए लोगों को गुमराह करता था उसका मत था कि वह ईश्वर का प्रतिनिधि है एवं वह पूरे विश्व पर राज करने के लिए उसने इस पृथ्वी पर जन्म लिया हैं शुरुआत में कुछ सफलता मिलने पर जर्मनी एवं उसके सहयोगी देश एवं वहां के लोग उसे ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर उसके एक इशारे पर अपनी एवं अपने परिवार की जान दाव पर लगा देते थे

उसी के इशारों पर अनेक यहूदियों एवं शत्रु देशों के सैनिकों एवं लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया एवं उपनिवेश एवं साम्राज्य बढ़ाने के लिए कई घातक हथियारों का निर्माण करके पूरे विश्व भर में उथल-पुथल मचा दी

लेकिन बुरे का अंत बुरा होता है अंत में हिटलर एवं जर्मनी का पतन हुआ और हिटलर ने सबसे बड़ा कायराना कार्य करके  आत्महत्या कर ली


और अपने सभी सहयोगियों को बर्बादी की कगार पर छोड़ दिया  इस प्रकार के व्यक्तियों को बढ़ावा देने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उन लोगों का भी होता है जो कुछ चाहने की चाहत में हर किसी पर आंख बंद करके विश्वास कर लेते हैं बिना किसी अंजाम की परवाह किए बगैर लेकिन हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती इसी सरकार कुछ सफलता अर्जित करने वाला व्यक्ति ईश्वर का प्रतिनिधि नहीं हो सकता अपने स्वविवेक का इस्तेमाल करें अपने अच्छे और बुरे को इत्मीनान से समझकर प्रत्येक कार्य करें इसी में मानव जाति की भलाई 

गुरुवार, 11 मार्च 2021

आध्यात्मिक की गहराइयों में डूबने का पवित्र महापर्व है महाशिवरात्रि


  #महाशिवरात्रि #Mahashivratri

अघोरी शास्त्र स्वरोदय विज्ञान तंत्र मंत्र यंत्र से लेकर मानव कल्पना से परे दिव्य अलौकिक आध्यात्मिक की गहराइयों को जानने की उत्सुकता प्रत्येक मनुष्य के मन में होती है जीवन का सत्य जानने के लिए लोग सैकड़ों वर्ष की तपस्या मैं भी जो फल प्राप्त नहीं कर पाते जो साल भर में एक बार आने वाले


महापर्व महाशिवरात्रि पर साधना करके कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है जीवन में व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत एक नास्तिक व्यक्ति बन कर करनी चाहिए क्योंकि वह व्यक्ति हर प्रकार के तर्क वितर्क एवं अपनी जिज्ञासाओं को अध्यात्म के रास्ते की गहराइयों में डूब कर खुद हर लमहे को जीकर एवं पाकर अपनी कल्पना से वास्तविक ईश्वर की पहचान कर सकता है


संपूर्ण ब्रह्मांड में एकमात्र शिव स्वरूप परमात्मा जो कि निराकार रूप में सभी और व्याप्त है उसकी खोज मनुष्य का प्रमुख उद्देश्य होता है जिसे पाकर व्यक्ति मोक्ष की कामना करता है


शिव के एक रूप अघोरी जिसके बारे में प्रत्येक व्यक्ति के अंदर उसे जानने की उत्सुकता होती है अघोरी जीवन एक ऐसा जीवन है कि जो सभी प्रकार कामनाओं पर विजय प्राप्त करने के बाद ही जिया जा सकता है


एक अघोरी हर उस वस्तु को जो उसे दिखाई दे सुनाई दे या महसूस हो उसे शिव के स्वरूप के रूप में देखता है जिसके कारण उन्हें कोई भी कर्म है या चीज बुरी नहीं लगती है वह हमेशा इस प्रकार का जीवन जीते हैं जो आम व्यक्ति की समझ से परे है यह जीवन घोर अध्यात्म का होता है


जब मनुष्य इनके वास्तविक आध्यात्मिक को समझता है तो उसे समझ में आता है कि सांसारिक जीवन से भी बढ़कर अध्यात्म और अध्यात्म से बढ़कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए किए गए विशेष हट योग एवं कर्म से मानव उत्थान एवं कल्याण का रास्ता ही वास्तविक ईश्वर भक्ति एवं ईश्वर को प्राप्त करने का रास्ता है


महाशिवरात्रि को ब्रह्मांड में एक अलौकिक शक्ति का उदय होता है जो उसे एक मनुष्य को शिव स्वरूप बना देती है लेकिन इसके वास्तविक चमत्कारों का लाभ वही व्यक्ति उठा पाता है कि


जो शिवरात्रि के दिन पूर्ण रूप से शिवमय होकर आराधना कर सके

मंगलवार, 9 मार्च 2021

समाज में फैले भ्रष्टाचार की कहानियों का पिटारा मुसद्दीलाल का ऑफिस ऑफिस प्रोग्राम


 सरकारी विभागों एवं आम जीवन में आम व्यक्ति की समस्याओं को लेकर ऑफिस ऑफिस मुसद्दीलाल सीरियल जो कि काफी वर्ष पहले पंकज कपूर के मुसद्दीलाल किरदार के इर्द-गिर्द घूमने वाले पात्रों एवं विभिन्न घटनाओं समस्याओं को रेखांकित करके समाज के कुरूप चेहरे को दर्शकों के सामने परोसा गया था जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया था यह सीरियल काफी फेमस हुआ था क्योंकि इसमें आम व्यक्ति की व्यथा दिखाई गई थी कि किस प्रकार वह लोगों का भला करने के लिए एवं अपनी समस्याओं को सॉल्व करने के लिए किस प्रकार चकरघिन्नी बन जाता है और सभी ओर से शोषण का शिकार होता है वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर मुसद्दी लाल के प्रोग्राम वायरल हो रहे हैं जिसे लोग मनोरंजन एवं सामाजिक ताने-बाने को लेकर आश्चर्यचकित होकर देख रहे हैं कि इतने बरसों बाद भी अभी भी समस्या जस की तस बनी हुई है इस प्रोग्राम में जितनी भी समस्याएं बताई गई हैं वह अभी पहले की ही भांति निरंतर चलती चली आ रही हैं समाज में फैले इस प्रकार के कुरूप चेहरे को वर्तमान की मीडिया दिखाने में पूरी तरीके से बचती है जो की समझ से परे है वर्तमान समय में जरूरत है मुसद्दीलाल जैसे सीरियलों की जो कि समाज में फैली भ्रष्टाचार एवं आम जनमानस के शोषण के साम्राज्य को आम जनमानस के सामने लाकर इसे खत्म कराने के लिए समाज में संदेश दें वह चाहे स्वास्थ्य विभाग में हो शिक्षा विभाग में हो या अन्य किसी भी विभाग में हो चारों ओर से जहां आम व्यक्ति का शोषण होता है है इसे खत्म करने के लिए बड़े स्तर से प्रयास किए जाने की जरूरत है

शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

स्वस्थ जीवन एवं स्वस्थ शरीर के लिए केमिकल युक्त पेय पदार्थों से बचें

 


🍹बसंत ऋतु  के साथ ही देश में गर्मी का मौसम आ जाता है गर्मियों के मौसम में सभी बच्चों का आकर्षण का केंद्र होता है बर्फ का गोला और उस पर चढ़ा लाल हरा नारंगी पीला केमिकल रंग युक्त चीनी सेक्रीन की बनी चासनी और ढेर सारी कंपनियों के पेय पदार्थ जो पूरी तरीके से केमिकल से बनाए जाते हैं लेकिन टेलीविजन एवं विभिन्न संचार माध्यमों से होने वाले प्रचार-प्रसार के बाद बच्चे हों या बड़े महिला हो या पुरुष सभी को ऐसा लगता है कि इन पर पदार्थों के पीने से उनके शरीर को एक्स्ट्रा एनर्जी और ठंडक महसूस होगी लेकिन मैं आपको बता दूं कि यह पूरी तरीके से विदेशी कंपनियों के प्रोपेगेंडा के अनुसार केमिकल युक्त फॉर्मूला पर आधारित पहले पदार्थ होते हैं जो कि शरीर के लिए काफी हानिकारक माने जाते हैं बर्फ छूने एवं महसूस करने पर ठंडी जरूर होती है लेकिन उस की तासीर गर्म होती है जो कि शरीर के अंदर नमी को सोख शरीर में गर्मी बढ़ाकर दोहरा नुकसान पहुंचाती है यदि बच्चे बाजारों के पेय पदार्थों के लिए ज्यादा ही जिद करें तो उनके लिए घर पर भी आइसक्रीम एवं लस्सी नींबू की शिकंजी  जैसे पेय पदार्थ बनाए जा सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ कम बजट में आपको बेहतर विकल्प दे सकते हैं गर्मी भरे मौसम और बच्चों को हमेशा के लिए आदत डालें कि जितना हो सके केमिकल युक्त इन पदार्थों से दूर रहे हैं जो उनके जीवन के लिए काफी हितकर होगा विभिन्न प्रकार के मेडिकल रिसर्च के अनुसार इन पेय पदार्थों से मानव शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है जिस कारण अनेक देशों में इन पेय पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है🎯👬👭👫🏌️🤾,🍺🍵🍸🍨🍧

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

जीवन में संघर्ष व्यक्ति को खरा सोना बना देता है



 🏋️जीवन भी इन रेल की पटरीयों की भांति  उलझा हुआ दिखाई देता है लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के सामने एक ही चुनौती होती है इन उलझनो को सुलझा कर अपने जीवन को निरंतर आगे बढ़ाना बचपन में संसाधनों की कमी के बावजूद संघर्ष करने के बाद  बेरोजगारी और उसके बाद समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष और एवं परिवार की जिम्मेवारी  कहीं ना कहीं  लोगों को हताश कर देती है लेकिन आप अकेले नहीं है इस दुनिया में जो जीवन में संघर्ष कर रहे हैं आपके पहले इस दुनिया में हर आने वाले व्यक्ति को जीवन मैं कुछ पाने एवं पहचान बनाने लोगों को जगाने के लिए संघर्ष करना पड़ता हैं बात करते हैं कुछ महापुरुषों की  जिनके जीवन संघर्ष को देखकर हर व्यक्ति को  अपना संघर्ष काफी तुच्छ दिखाई देने लगता है भगवान श्री राम के अयोध्या के राजकुमार होने के बाद भी  विधाता के बनाए कालचक्र  के कारण जंगल जंगल अनेक कठिनाइयों से जूझते हुए अपने परिवार एवं न्याय अन्याय ब स्वाभिमान की रक्षा के लिए रावण जैसी महाशक्तिशाली असुर से भी संघर्ष करना पड़ा वही बात करते हैं श्री कृष्ण जी की जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत ही जीवन संघर्ष से की इनका जन्म काल कोठरी के अंदर  हुआ था जन्म लेने के बाद से इनके जीवन संघर्ष की  कठिनाइयां सहनी पड़ी  रिश्ते नाते परिवार सत्य असत्य की लड़ाई के लिए  इनका पूरा जीवन संघर्ष मय रहा है विश्व में अनेक उदाहरण हैं ईसा मसीह से लेकर मोहम्मद साहब  गौतम बुद्ध से लेकर महावीर स्वामी नानक से लेकर दलाई लामा तक हमेशा से ही संघर्षशील व्यक्तित्व के लोगों का जीवन आसान नहीं रहा है इसीलिए बात इतनी सी है कि अपने जीवन में आने वाले संघर्ष को हमेशा खुश होकर सहना सीखिए मानव जीवन ही संघर्ष एवं कठिनाई का नाम है इस जीवन मैं कठिनाइयों से जूझ कर ही व्यक्ति खरा सोना बनता है🎯

शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

बाबा का ढाबा

 दिल्ली में बाबा के ढाबा के नाम से कुछ दिनों से सोशल वायरल पर फेमस हुए वीडियो ने लोगों को मजबूर कर दिया उन बूढ़े बुजुर्ग की खुशियां वापस करने के लिए जो कि उम्र के अंतिम पड़ाव में भी अपनी मेहनत एवं स्वाभिमान से जीवन को बड़ी सादगी से जी रहे थे लेकिन पूरे विश्व भर में फैली क्रोना वायरस महामारी ने जहां अच्छे-अच्छे उद्योगपति से लेकर आम नागरिक के उद्योग धंधों को पूरी तरीके से चौपट कर दिया वही बाबा के ढाबा जैसे अनेक लोगों की रोजी-रोटी छीनने का कार्य हुआ है देश के लिए वर्तमान समय बड़ा ही विपरीत परिस्थितियों वाला है ऐसे समय में बाबा का ढाबा जैसे गरीब लोगों की मदद करना सुकून देने वाला कार्य है जिस प्रकार से इस दंपत्ति को मदद करने के लिए हजारों की संख्या में लोगों के हाथ बड़े हैं उससे अंदाजा लगा सकता है कि अब भी लोगों में मानवता कायम है लेकिन वहीं दूसरी ओर बाबा के ढाबा जैसे हजारों लोग अब भी सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए तैयार खड़े हैं लेकिन इतना भी आसान नहीं है हर किसी को बाबा का ढाबा जैसी दंपत्ति की लोकप्रियता पा सके लेकिन सरकार को भी चाहिए इस प्रकार के लोगों को चिन्हित करके इनके स्वाभिमानी जीवन को जीने के लिए भरपूर सहयोग एवं मदद करें जिससे देश में लोगों मैं संघर्ष में जूझने एवं लड़कर कामयाबी पाने का जज्बा कायम रहे  एवं हताशा का माहौल ना बने आप सभी लोगों से निवेदन है कि अपने क्षेत्र में इस प्रकार के छोटे-छोटे कार्य करके अपना जीवन यापन करने वाले लोगों से खरीददारी अवश्य करें क्योंकि संपूर्ण लॉकडाउन में इसी प्रकार के लोगों के माध्यम से इस देश में अराजकता नहीं खेल पाई इस प्रकार के ढाबा गली गली टुकड़ों पर होने के कारण लोगों को विदेशी संस्कृति वॉलीबॉल पद्धति के कारण होने वाले दुष्परिणाम ज्यादा नहीं भोगने पड़े एक और विश्व की आर्थिक महाशक्ति अमेरिका जर्मनी कनाडा ब्रिटेन जैसे देश मॉल पद्धति के कारण अपने लोगों को राशन सामग्री से लेकर भोजन भी उपलब्ध नहीं करा पाए थे लानत है ऐसे अर्थव्यवस्था पर जहां लोगों में इस प्रकार का नेटवर्क ना हो जिससे वह किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपना कम से कम पर तो भर सकें लेकिन भारतीय संस्कृति एवं संयुक्त परिवार एवं छोटे मजले एवं कुटीर उद्योग जो की गली मोहल्लों में छोटी-छोटी दुकानों से लेकर ठेले खोमचे तक हर किसी को अपने बजट के हिसाब से भोजन उपलब्ध कराकर उन्हें इस महंगाई एवं भागदौड़ भरी जिंदगी में राहत पहुंचाने का कार्य करते हैं इसीलिए इस संस्कृति को बचाने की बड़ी आवश्यकता है छोटे मझोले कुटीर उद्योग करने वालों को हमेशा सपोर्ट करें एवं उन से सामान खरीद कर समाज में इस जाल को बनाए रखें जिस से आने वाली किसी भी प्राकृतिक समस्याओं से आसानी से निपटा जा सके एवं देश  प्रगति के मार्ग पर निरंतर चल सके

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

महाकाल की नगरी में पकड़ा गया विकास कानूनी पचड़े में तारीख पे तारीख लेगा या गिरेगी पुलिस एनकाउंटर में लाश

#विकास_दुबे।                                                                   पूरे देश में चौबेपुर कांड के कारण चर्चा में आया कुख्यात बदमाश विकास दुबे आखिरकार महाकाल की नगरी उज्जैन में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा पकड़ा गया जिस तरीके से मध्य प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे को पकड़ा है उससे इतना तो तय है कि इसने यहां पर अपने आप को समर्पण करके अपने अन्य साथियों की तरह होने वाले पुलिस  इनकाउंटर से पूरी तरह से अपने आप को सुरक्षित करने की कोशिश की गई है कानपुर से लखनऊ फरीदाबाद सहारनपुर जैसी लोकेशन अपडेट करते हुए कैसे कुख्यात बदमाश महाकाल की नगरी में पहुंच कर अपने आप को पुलिस के हवाले करता है यह पूरी कहानी फिल्मी लगती है इस तरह से एक शहर से दूसरे शहर लगभग एक सैकड़ा पुलिस टीमों की आंख में धूल झोंक कर यह 5 लाख का इनामी बदमाश हजारों किलोमीटर की यात्रा करके देश के विभिन्न हिस्सों में घूमता रहा लेकिन देश के मजबूत खुफिया नेटवर्क की पकड़ में ना आ सका इसका मुख्य कारण कहीं ना कहीं बड़े लोगों का हाथ इस पर अब भी बना हुआ है हर न्यूज़ चैनल पत्र-पत्रिकाओं राजनैतिक गलियों में चौबेपुर हत्याकांड की चर्चाएं पिछले कई दिनों से चल रही थीक्या विकास दुबे का एनकाउंटर होगा या उसे अभयदान मिलेगा महाकाल की नगरी उज्जैन में उसकी गिरफ्तारी के बाद कयास लगाए जा रहे शायद कानूनी दांवपेच से उसे बचा लिया जाए या फिर कुछ सफेदपोश लोगों के चेहरे उजागर ना हो इसलिए विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद उससे अनेकों राज खुलवाए जा सकते हैं लेकिन जिस प्रकार देश भर में उत्तर प्रदेश सरकार की किरकिरी का कारण बना यह बदमाश पुलिस महकमे के साथ उत्तर प्रदेश शासन के लिए आंख की किरकिरी बना हुआ है आने वाले कुछ घंटे अति महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन की कस्टडी में होने के कारण उत्तर प्रदेश की पुलिस इसे कस्टडी में लेकर इस पर क्या एक्शन लेती है  उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि आने वाले समय में कोर्ट एवं कानून के दो पे फस कर इस कांड में यह अपराधी हीरो बनकर तारीख पर तारीख वाले सिस्टम को अपने हिसाब से तोड़ कर अपने आप को बचाने की कोशिश ना कर पाए एवं वर्तमान में देशभर के पुलिस प्रशासन के साथ आमजन की जन भावनाओं को देखकर इसका एनकाउंटर होना लगभग तय है 🎯आवाज✍️