हो जाइए सावधान कुछ ही दिनों में फेसबुक व्हाट्सएप एवं सभी सोशल साइट चलाने वाले ज्यादातर लोग बूढ़े होने वाले हैं मात्र कुछ ही दिनों में बहुत से लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं अपने परिवार के सदस्यों की बच्चों की फेसबुक एवं अन्य सोशल साइट पर ध्यान रखें कहीं अपने परिवार के सदस्य के भी बूढ़ी तस्वीर देख कर आप को झटका ना लग जाए घबराइए गा नहीं क्योंकि यह कमाल है फेस एप्प नामक एक फोटो ऐप्स का जिसके माध्यम से लोग अपनी उम्र से सीधे 68 साल के व्यक्ति जैसे दिखने लगेंगे जी हां सबसे ज्यादा ट्रेड करने वाला यह एप्स पूरे विश्व भर में फेमस हो रहा है सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले ऐप में सबसे अधिक ट्रेड करने वाला यह फोटो फेस एप सर्वप्रथम 2017 में आया था लेकिन उस समय कितना अधिक पॉपुलर नहीं हुआ था लेकिन वर्तमान में इसका क्रेज युवाओं के सर पर चढ़कर बोल रहा है लगभग हर चौथे व्यक्ति की फेसबुक आईडी पर उसके बुढ़ापे की तस्वीर वायरल हो रही है यह युवाओं का उत्साह यहीं तक सीमित नहीं रह रहा है वह अपने चहेते खिलाड़ी फिल्मी हीरो एवं राजनैतिक व्यक्तियों की फोटो को भी इस ऐप की मदद से बूढ़ा बना कर मजे से अपलोड कर रहे हैं सबसे अधिक मजे की बात है इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग पुरुष हैं युवतियां छात्राएं एवं महिलाएं इस ऐप का इस्तेमाल करने से बच रही हैं हां यह बात अलग है कि उनके पुरुष मित्र एवं बच्चे उनकी फोटो को अधिक उम्र का बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर के मजे ले रहे हैं इस ऐप को डाउनलोड करना एकदम आसान है गूगल प्ले स्टोर में जाकर फेस एप के नाम से सर्च कर कर सबसे पहले ट्रेड करने लगेगा उसी को डाउनलोड कर कर आप भी अपने लोगों दोस्त यार परिवार के सदस्यों की बुढ़ापे की तस्वीर बनाकर भविष्य में झांक सकते हैं
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रविवार, 21 जुलाई 2019
यह लड़की नहीं मानेगी हौसले की उड़ान बहुत ऊंची है
भारत की स्टार धाविका हिमा दास ने एक और इतिहास लिख दिया हिमा दास ने लगातार पांचवां स्वर्ण भी अपने नाम करके देश का नाम गर्व से ऊपर कर दिया जहां कुछ दिन पूर्व देश की मीडिया विधायक की लड़की के घर से भागने के कार्यक्रम को चला कर पूरे देश में हंगामा खड़ा कर रही थी उसी समय एक गरीब हिंदुस्तानी लड़की अपने संघर्ष के दम पर चेक रिपब्लिक देश मैं सफलता के झंडे गाड़ गई थी शनिवार को सेट गणराज मैं विश्व स्तरीय दौड़ प्रतियोगिता में 400 मीटर स्पर्धा मैं 52:09 का समय निकालकर प्रथम स्थान हासिल किया पिछले कुछ दिनों से हिमा दास प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत रही थी एक एक करके पांच स्वर्ण पदक अपने नाम करके इस धाविका ने बता दिया दुनिया तुम्हारे काम की सराहना करें या ना करें लेकिन आप अपने कार्य में लगन से लगे रहो आज नहीं तो कल यह दुनिया तुम्हें जरूर सलाम करेगी लगातार पांचवी सफलता के बाद देश के कई महान व्यक्तियों ने इस बहुमुखी प्रतिभा की धनी धाविका को बधाई दे रहे है एवं इसकी सफलता को लेकर पूरा देश एक बार फिर से झूम उठा हिमा दास कुछ दिनों पूर्व समाज सेवा के एक कार्य के लिए चर्चित रही हैं इन्होंने अपनी पुरस्कार राशि का आधा हिस्सा बाढ़ पीड़ितों के लिए दान में दे दिया था जहां एक और लोग संपन्न होने के बाद भी समाज सेवा कार्य में पीठ दिखा जाते हैं वही हिमा दास ने अपनी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी समाजसेवी का महान कार्य करके सभी देशवासियों का दिल जीत लिया सलाम है इस धाविका के हौसले को🌻🌻🙏🙏🙏🙏
शनिवार, 20 जुलाई 2019
रेल चालक द्वारा ट्रेन को रोककर किया खुले में पेशाब पब्लिक में हुई वायरल वीडियो
भारत स्वच्छता अभियान के तहत सरकार आए दिन देश में लाखों करोड़ों की संख्या एवं रुपए में बनने वाले शौचालयों के बारे में प्रचार प्रसार कर के लोगों को बताती रहती है लेकिन सरकार के ही सरकारी कर्मचारी स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ा रहे हैं ताजा मामला मुंबई के लोकल ट्रेन के लोको पायलट जिसे मोटर मैन कहा जाता है उसके द्वारा बीच रास्ते में गाड़ी को रोककर पेशाब करने वाला वीडियो देशभर में वायरल हो रहा है लोग इस वीडियो को शेयर कर कर रेलचालक को बुरा भला कह रहे हैं वही रेल के बारे में जानकारी रखने वाले लोग उक्त चालक की मजबूरी को समझ कर सरकार को कोस रहे है आने वाले समय में सरकार उक्त मोटरमैन के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है यह तो भविष्य मैं पता चलेगा लेकिन अब यह सवाल उठता है कि लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर कर स्वच्छता अभियान चलाने वाली सरकार को रेल चालकों के नित्य क्रिया करने का मूलभूत अधिकार के बारे में फिर से समीक्षा करनी होगी क्या कारण है कि करोड़ों की कीमत के इंजनों में मात्र कुछ हजार रुपए के शौचालय नहीं लग पा रहे हैं आपको बता दें भारतीय रेल में रेल चालक एवं सह चालक जिस इंजन द्वारा मालगाड़ी पैसेंजर गाड़ी लोकल ट्रेन खींचते हैं उसमें किसी भी प्रकार का शौचालय उपलब्ध नहीं होता पैसेंजर गाड़ियों में इंजन के पीछे जो ब्रेक यान एवं जनरल के डिब्बे होते हैं वह सरकारी कर्मचारियों एवं आम नागरिकों से जानवरों की तरह भरे होते हैं जिसमें प्रवेश करना भी अपने आप में एक कला है कई ट्रेनें तो ऐसी हैं जहां शौचालय में 5 से लेकर 7 लोग तक घुसकर खड़े खड़े सैकड़ों मिलों की यात्रा करते हैं कई ऐसी ट्रेनें हैं जो लंबी दूरी की होती हैं जिनका 400 किलोमीटर तक स्टॉपेज भी नहीं होता है ऐसी स्थिति में इन्हें कितनी पीड़ा सहन करती है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है मजबूरी में अगर कोई चालक एवं सह चालक गाड़ी को छोड़कर शौचालय के लिए पास कहीं शौचालय जाता है तो उससे अगर ट्रेन के समय में कोई भी डिटेंशन होती है तो उसकी पूरी जिम्मेवारी लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की मानी जाती है जिसके लिए उन्हें दंडित किया जाता है ऐसी स्थिति में मजबूरन लोको पायलट सहायक लोको पायलट को चलती गाड़ी में इंजन से ही पेशाब करना पड़ता है एवं जहां भीड़भाड़ वाले इलाके हैं वहां रेल इंजन से उतर कर खुले में पेशाब करने के लिए मजबूर होना पड़ता है जिसका जाने अनजाने में कई यात्री एवं व्यक्ति वीडियो बना कर फोटो खींच कर उनकी मजबूरी का मजाक बनाते हैं एवं उन्हें स्वच्छता अभियान का दुश्मन कहकर बुरा भला कहते हैं इसमें रेल चालक को एवं बुरा भला कहने बाले आम आदमियों की गलती नहीं है क्योंकि उन्हें रेल और रेल के कर्मचारियों के विषय में ज्यादा जानकारी नहीं रहती है आपको बता दें नियमानुसार रेल चालक 10 घंटे में गाड़ी खड़ी कर सकता है लेकिन अधिकारियों द्वारा अनावश्यक दबाव डालकर लगभग 10 घंटे से लेकर 16 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जाती है जिस रेल को चालक चला कर आता है ड्यूटी पूरी होने के बाद गारंटी नहीं कि उसी ट्रेन में उसे बैठने के लिए भी जगह मिल जाए ज्यादातर उन्हें खड़े-खड़े ही यात्रा करनी पड़ती है घर पहुंचते-पहुंचते कर्मचारियों की ड्यूटी लगभग 15 से 16 घंटे हो जाती है लंबी ड्यूटी एवं इंजन में शौचालय ना होने के कारण ज्यादातर रेल चालक पेशाब रोक कर रखने एवं कम पानी पीने के कारण पथरी हाइड्रोसिल किडनी लीवर जेसी तमाम गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते है देश में जहां भीषण गर्मी और सर्दी में जानवरों के लिए तमाम मानव अधिकार आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट हैं जिनके अनुसार जानवरों से अधिकतम 8 घंटे से ज्यादा कार्य ना कराया जाए लेकिन रेल चालकों एवं सह चालक एवं गार्ड के लिए हर प्रकार के मानवाधिकार आयोग आंखें बंद कर लेते है अब सवाल यह उठता है कि क्या कारण है कि देश आजाद होने के कितने सालों बाद भी रेल इंजनों में रेल चालक एवं सहायक चालक गार्ड जानवरों की तरह कार्य कर रहे हैं रेल चालकों के अनुसार वर्तमान हालातों से अधिक अच्छे हालात तो इनके अंग्रेजो के समय रेल संचालन में होते थे जहां रेल का इन्हें मुख्य केंद्र बिंदु माना जाता था और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थी वर्तमान समय में रनिंग के कर्मचारियों के अनेक अधिकारों में कटौती की जा रही है जिससे देश की सबसे जुम्मेबारी वं मेहनती नौकरी को करना बेहद ही कठिन होती जा रही है जिसकी जिम्मेदार वर्तमान यूनियन है या फिर सरकार यह तो शोध का विषय है क्योंकि अन्य रेल कर्मचारियों की अपेक्षा रनिंग कर्मचारियों के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार होता चला आ रहा है बने बनाए नियमों को बदलाव कर कर उनके हकों में हमेशा कटौती की की जाती रही है आम लोगों से निवेदन है कि बिना रेल और रेल कर्मचारियों कार्यों को जाने अपने आप से किसी प्रकार की अवधारणा ना बनाएं सबसे ईमानदार परिश्रमी रेल रेल कर्मचारी लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को हमेशा सपोर्ट करें
रविवार, 14 जुलाई 2019
विश्व कप फाइनल के इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबले का 25000 का टिकट बिका 13 लाख में
भारतीय दर्शक अपनी छाप पूरे विश्व में छोड़ जाते हैं वर्तमान में क्रिकेट का महाकुंभ विश्वकप इंग्लैंड में खेला जा रहा है इसका फाइनल मेजबान इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच है इस मैच को देखने के लिए इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के दर्शकों में दीवानगी का आलम यह है कि मात्र 25000 का टिकट 1300000 में खरीद कर यह फाइनल मैच देख रहे हैं मुनाफा कमाना कोई भारतीयों से सीखे क्योंकि भारतीय दर्शकों को आशा थी कि भारतीय टीम विश्व कप फाइनल में अवश्य खेलेगी इसलिए विश्व कप के फाइनल मुकाबला की 41% सीटों की टिकट को भारतीय दर्शकों ने पहले से ही खरीद के रख लिया था सभी को ज्ञात है कि विश्व के सबसे अधिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भारत में रहते हैं भारतीय लोगों को पहले से ही पता है कि किस प्रकार से बुकिंग साइट पर टिकटों के आने से पहले ही साइट को हैक करके पहले से ही टिकट बुक कराए जा सकते हैं आम जीवन में लगभग सभी लोगों ने भारतीय रेल की यात्रा की है सुबह से जब रेल टिकट के रिजर्वेशन की बुकिंग होती है बहुत से ऐसे हैकर होते हैं आम यात्री के टिकट बुक करने के पहले ही 5 मिनट में लगभग पूरे टिकट बुक कर लेते हैं फिर उन्हें कालाबाजारी करके मोटे लाभ पर पर बेचते हैं उसी तरीके से आईसीसी की साइट पर टिकटों की बिक्री होते ही कुछ ही मिनटों में टिकट बिक गए पूरे विश्व कप के सबसे अधिक टिकट खरीदने में सबसे बड़ा योगदान भारतीयों का रहा है किसी भी टीम का मैच होने पर सबसे अधिक भारतीय दर्शक विश्वकप के मैचों में मैं देखने के लिए पहुंचे हैं अब जब भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के सेमीफाइनल से बाहर हो चुकी है लेकिन 41 परसेंट फाइनल के टिकट भारतीयों के पास हैं दूसरी ओर मेजबान इंग्लैंड फाइनल में पहुंच चुकी है स्थानीय होम ग्राउंड और होम देश होने के कारण स्थानीय लोगों को इंग्लैंड के वर्ल्ड कप के मैच खेलने पर उत्साहवर्धन के लिए स्टेडियम में पहुंचने के लिए टिकट की अति आवश्यकता है लेकिन भारतीय दर्शक इन टिकटों को टिकट काउंटर पर वापसी करने के बजाय टिकट की मूल कीमत से लगभग 55 गुना कीमत में बेच रहे हैं अनुमान 6000 से लेकर 25000 और 85000 कीमत तक के टिकटों को भारतीय दर्शक इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के दर्शकों को 13 लाख से अधिक कीमत पर टिकट बेचकर एक मोटा लाभ उठा रहे हैं इसे कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम इससे उन दर्शकों का दुख जरूर कम होगा जो फाइनल का टिकट लेकर इंडिया को फाइनल खेलते हुए देखना चाहते थे भला हो उन सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का जो भारतीय दर्शकों को पूरे विश्व से सबसे पहले टिकट मुहैया कराते हैं भारतीय दर्शकों को आदत है कि तय कीमत से अधिक कीमत पर टिकट खरीदने की इसीलिए वह लाभ भी कमा रहे हैं
सोमवार, 1 जुलाई 2019
1 जुलाई और 1 जनवरी को इतने सारे जन्मदिन आखिर क्यों
कई महान हस्तियों के साथ 1 जुलाई को मेरा भी जन्मदिन था आप सभी को आश्चर्य होगा कि आपकी फेसबुक में 1 जुलाई और 1 जनवरी को सबसे ज्यादा लोगों का जन्मदिन होता बहुत से फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया चलाने वाले लोगों का इतनी लंबी जन्मदिन बालों की लिस्ट देखकर उनका सर चकराने लगता है कि किन किन को बधाई दें कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है ऐसा तो है नहीं कि जुलाई को 1 जनवरी को सबसे बच्चे ज्यादा जन्म लेते हैं फिर क्या कारण है की मार्कशीट और सोशल मीडिया पर 1 जुलाई एवं 1 जनवरी को ज्यादातर लोगों का जन्मदिन होता है इसका मुख्य कारण है आमतौर पर कुछ वर्ष पूर्व लोगों के जन्म प्रमाण पत्र के व्यापक रूप से रजिस्ट्रेशन नहीं होते थे एवं जन्म तिथि का आकलन शैक्षिक मार्कशीट द्वारा होता था इन मार्कशीट में जन्मदिन की घोषणा करने वाले भगवान ब्रह्मा ना होकर स्कूलों के शिक्षक ही उनके जन्मदिन दाता बन जाते थे क्योंकि जब बच्चा स्कूल जाने लायक हो जाता था तो उसके अभिभावक उसे शिक्षा दिलाने हेतु विद्यालयों में दाखिले के लिए सत्र शुरू होते ही अधूरी जानकारी के साथ पहुंच जाते थे तो वहीं पर अध्यापक अपनी सुविधा अनुसार बच्चे का जन्म 1 जुलाई या 1 जनवरी लिखवा देता था जिससे बच्चे की उम्र का सटीक पता लगाया जा सके अगर 1 जनवरी एवं 1 जुलाई को होने से सही साल एवं दिनों का आईडिया हो जाता था इसके दो कारण होते थे एक तो दिन समय जोड़ने का टीचरों की परेशानी खत्म हो जाती थी वही बच्चों के अभिभावकों को भी सुविधा एवं बच्चे की उम्र कम बढ़ा कर हो जाती थी वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया साइटों पर ज्यादातर लोगों अकाउंट बनाने के लिए 16 वर्ष 18 वर्ष पूरा होने के लिए डेट ऑफ बर्थ लिखना पड़ता है ज्यादातर लोग 1 जुलाई और 1 जनवरी को अपना जन्मदिन दिवस दिखा देते है वही उसका आगे चलकर सार्वजनिक जन्म दिवस बन जाता है और लोग उसे शुभकामनाएं देने लगते हैं जन्मदिन हो जाता है मैं आप सभी से इस ब्लॉग के माध्यम से क्षमा चाहता हूं कि मेरा असली जन्मदिन 10 सितंबर है जिन लोगों को मेरे 1 जुलाई वाले जन्मदिन पर शुभकामनाएं देने के लिए असुविधा हुई हो मैं उनसे क्षमा चाहता हूं🌷🎂🍾🌻
बुधवार, 26 जून 2019
वर्ल्ड कप के मैच देखकर जोश में आए विधायक जी चलाया बल्ला
रविवार, 23 जून 2019
अखिलेश से मोहभंग होने का कारण भाई भतीजावाद
पिछले 2 वर्ष से जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी एक होकर गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों को जीता उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन करके भाजपा को चुनौती देने का साहस किया था लेकिन वह गठबंधन किसी कारणवश सफल नहीं हो पाया लोकसभा चुनाव 2019 के बाद बाद देखा जा रहा था की समाजवादी पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी भविष्य में गठबंधन को जारी रखेंगे या गठबंधन को विराम लगेगा गठबंधन पर किसी प्रकार की टिप्पणी ना करने का समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने निर्णय लिया था पहले ही बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती द्वारा घोषणा की गई कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रास्ते अलग होंगे भविष्य में बहुजन समाज पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी यह घोषणा अखिलेश यादव के लिए बड़ी ही दुखद थी क्योंकि उन्होंने अपने परिवार एवं पार्टी को ताक पर रखकर यह गठबंधन कर के धुर विरोधी पार्टी होने का दाग धोया था क्योंकि यह निर्णय दिमाग से नहीं दिल से लिया गया था इसलिए पूरी तरह से बीएसपी की शर्तों पर गठबंधन किया गया जिसका खामियाजा उन्हें लोकसभा चुनाव में अपनी परंपरागत सीटों के नुकसान से उठाना पड़ा वहीं दूसरी ओर गठबंधन का फायदा पूरी तरह से बहुजन समाज पार्टी को मिला जो 2014 के लोकसभा चुनाव में जीरो पर थी वर्तमान में 10 पर पहुंच गई मायावती द्वारा लिया गया अलग होने का निर्णय राजनीतिक पंडितों के लिए आश्चर्य का विषय नहीं है क्योंकि पूर्व में ऐसी चौकानेवाले निर्णय बहन जी ले चुकी है वही बीएसपी की रणनीति पूरी तरह से अखिलेश की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमने लगी थी क्योंकि अखिलेश का लचीला राजनीति करने का तरीका कहीं दलितों को अपनी ओर ना खींच ले क्योंकि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया की राजनीतिक विरासत को संभालने वाला वर्तमान में कोई भी मजबूत राजनीतिक व्यक्ति नहीं दिखाई दे रहा था वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव एक कुशल राजनेता और प्रशासक के रूप में अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित कर चुके हैं इसी को देखते हुए अपने परंपरागत वोट बैंक को बचाकर बहुजन समाज पार्टी अपने ही परिवार से राजनैतिक दावेदार को आगे करना चाहती थी इसीलिए यह गठबंधन को यहीं पर विराम देने का कार्य बहुजन समाज पार्टी की मुखिया द्वारा करके अपने ही परिवार के अपने भाई आनंद कुमार को बहुजन समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अपने भतीजे आकाश को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाकर अपनी भविष्य की विरासत सौंपने का मार्ग बना लिया है यह निर्णय बहुजन समाज पार्टी की आम मिसीनरी कार्यकर्ता किस तरीके से लेते हैं यह तो भविष्य बताएगा लेकिन इन सभी मायावती जी के निर्णय से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को झटका लगा है जो बहुजन समाज पार्टी की विरासत को संभालने का सपना देखने लगे थे बहुत हद तक अपनी रणनीति में सफल भी हुए थे मायावती जी के चिर परिचित अंदाज को कुछ हद तक रोकने में सफल भी हुए थे लेकिन एक निर्णय बदलने में नाकाम हुए वह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने का जिसका खामियाजा कुछ हद तक गठबंधन को हुआ भी बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो की कार्य करने कि शैली जिससे लोगों को हमेशा आशंका बनी रहती है की बहन जी कब किस से नाराज हो जाए यह खुद बहन जी को भी पता नहीं होता क्योंकि बहुजन समाज पार्टी की शुरुआत से लेकर अब तक अनेक पार्टी लीडरों को मायावती जी के गुस्से का शिकार होना पड़ा है बड़े से बड़े पार्टी के लीडर कब अर्श से फर्श पर आ जाए यह उन्हें खुद भी पता नहीं होता है लेकिन वर्तमान में बात भाई भतीजा बात की है इन पर मायावती जी की कृपा दृष्टि कब तक बनी रहती है यह तो भविष्य आने वाला भविष्य ही बताएगा
शुक्रवार, 21 जून 2019
योग को योग रहने दें सर्कस मत बनने दें
आज पूरे विश्व में विश्व योग दिवस मनाया गया साथियों योग अकेला सर्कस नहीं है यह हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति के ऋषि मुनियों के घोर अनुसंधान से अर्जित की हुई वह निधि है जिसके द्वारा एक साधारण मनुष्य महामानव बन सकता है योग में अकेला हाथ पैर हिलाने से योग पूर्ण नहीं हो जाता योग अनेकों युक्तियों से बना पर पूर्ण एक सिस्टम है जिसमें यम नियम आसन प्राणायाम ध्यान समाधि होते हुए व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है वर्तमान में जिस प्रकार से योग का मजाक बनाया जा रहा है वह आने वाले समय में बड़ा ही घातक होगा हां यह अवश्य है कि लोग लाभ लेने से अधिक दिखावा करने में विश्वास कर रहे हैं 1 दिन करने से लाभ की आशा करना बेकार है योग एक निरंतर प्रक्रिया है जो हमें अनेक बरसो करने के बाद चमत्कारिक परिणाम देती है योग की शुरुआत प्राचीन ऋषि पतंजलि द्वारा की गई थी आसन वह प्रक्रिया है जो हमारे संसार में विभिन्न प्रजातियों के जीव जंतुओं द्वारा अपनाई हुई बैठने की प्रक्रिया होती है उसी के लाभ अनुसार हम लोग उन आसन को कॉपी करके लाभ लेने का प्रयास करते हैं योगासन प्राचीन काल से ही लोगों की दुख तकलीफों को दूर करता चला आ रहा है लेकिन कुछ वर्षों में इसका प्रचार प्रसार कर के अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसका व्यवसायीकरण करके करोड़ों अरबों रुपए का व्यवसाय कर चुके हैं फायदा मिला ना मिला यह तो अनुसंधान का विषय है असली योग का फायदा आपको लेना है तो आपको हिमालय जैसे क्षेत्रों में जाकर वहां पर अनेकों वर्षों से इस पर अनुसंधान कर रहे ऋषि मुनियों का सानिध्य लेना पड़ेगा जो आपको अपने अनुभव खानपान जीवन शैली से पूर्ण योग से अवगत कराएंगे
सोमवार, 10 जून 2019
जय श्री राम या जय भीम सोच समझ कर लिखिए
🕊🕊🌱पूरे देश की भाति रेलबे मे भी sc और जनरल के लोगो का शीतवार मूक रूप से देखा जा सकता है लेकिन इसके गबाह सिर्फ लोको पायलट एबं लोको से सम्बधित कर्मचारी होते है क्योकि यह लडाई रेल इन्जन के अन्दर की है जहा बाबा साहेब भीमराब अम्बेडकर जी मे बिश्वास रखने बाले कर्मचारी रेल इन्जन मे जय भीम लिखते है बही दूसरी तरफ भगबान राम मे आस्था रखने बाले कर्मचारी जय श्री राम लिखते है लिखना उतना महत्वपूर्ण नही जितना एक दूसरे का लिखा हुए बाक्यो को मिटाकर लिखना है ऐसे लिखे हुए बाक्य अधिकतर रेल इन्जनो के अन्दर लिखे देखे जा सकते है अब सबाल उठता है कि क्या रेल प्रशासान ऐसे किसी भी बाक्य को लिखने की अनुमति देता है जबाब होगा नही क्योकि रेल इन्जन राष्ट्र सम्पति है सरकार इससे रेल कार्य संचालित कराने के लिए कर्मचारियो को मानदेय देती है इस लिए इस पर कार्य करने बाले कर्मचारी को बिभिन्य धर्मो जातियो मजहब और महापुरषो मे आस्था का ध्यान रखते हुए कार्य करना चाहिए एवं कर्मचारी होने के कारण राज्य कर्म का पालन करना महत्बपूर्ण है । पुरषोत्तम भगबान श्री राम एवं भारत रत्न बाबा साहेब भीमराब अम्बेडकर किसी बाक्य के मोहताज नही है महापुरषो के लिए आस्था लोगो के दिलो मे होती है न कि किसी बाक्य के लिखने पढने से निबेदन है उन शिक्षित कर्मचारियो से जो ऐसे बाक्य लिखकर उन लोगो को मौका देते है जो लिखे बाक्य को मिटाकर महापुरषो का अपमान करते है कृपा करके यह लेखन कार्य न करे न ही किसी को करने दे ।
शनिवार, 8 जून 2019
बड़े मंगल पर पूरे लखनऊ में कोई भी भूखे पेट नहीं सोता
शनिवार, 25 मई 2019
रामराजा सरकार ओरछा धाम यूनेस्को की सूची में शामिल जहां भगवान को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है
हमारा देश अनेक देवी देवताओं धार्मिक आस्था एवं त्योहारों का देश है यहां पर अनेक देवी देवता पूजे जाते हैं जिसमें से भगवान राम प्रत्येक व्यक्ति के आस्था के केंद्र हैं भारत देश एक गणतंत्र देश है इसलिए सभी धर्मों की आस्था को देखते हुए एक आचार संहिता होती है लेकिन बुंदेलखंड के झांसी से कुछ किलोमीटर दूर स्थित ओरछा मैं विराजमान ओरछा धीश रामराजा सरकार रामचंद्र जी के मंदिर में उन्हें राज्य सरकार द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है यहां भगवान राम राजा के रूप में विराजमान हैं ओरछा रियासत पूर्व में देश की एक मजबूत रियासत मानी जाती थी यहां के प्रसिद्ध राजा वीर सिंह जूदेव जो कि पूर्व मुगल सम्राट जहांगीर के परम मित्र थे भगवान श्री राम राजा की परम भक्त यहां की रानी कुंवर गणेशी बाई जिन्होंने अयोध्या में जाकर भगवान राम की प्रतिमा लेकर ओरछा में भगवान राम को राजा के रूप में विराजित कराया एक कहानी प्रसिद्ध है कि गणेशी बाई जोगी राम की परम भक्त उन्होंने अपनी भक्ति से भगवान राम से ओरछा चलने का आग्रह किया जिसे भगवान राम ने उन्हें सपने में निर्देशित किया कि मैं प्रतिमा रूप में आपके साथ प्रमुख पुख नक्षत्र में चलूंगा एवं जिस स्थान पर एक पर विराजित हो जाऊंगा उसके बाद अन्य स्थान पर विस्थापित नहीं हो सकूंगा मेरे ओरछा में विराजमान होने के बाद ओरछा का साम्राज्य वीरान हो जाएगा इस प्रकार के सपने से खुश होकर रानी ने ओरछा में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जिसे आज भी लोग चतुर्भुज भगवान के मंदिर के नाम से जानते हैं जब रानी कुंवर गणेशी जी भगवान राम की प्रतिमा लेकर ओरछा पहुंची तो मंदिर में पूजन के लिए कुछ कमी रह गई थी इस कारण उन्होंने भगवान की प्रतिमा को अपने भोजनालय में स्थापित कर दिया उसके बाद वह प्रतिमा फिर नहीं उठी बाद में यही मंदिर का निर्माण कराकर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई भगवान राम ओरछा में राजा के रूप में विराजमान है ओरछा एक अच्छा एवं प्राकृतिक माहौल से भरपूर पर्यटक स्थल है यहां पर प्रत्येक वर्ष देशी एवं विदेशी सैलानी हजारों की संख्या में आते हैं और यहां के प्राकृतिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का आनंद लेते हैं यहां के अन्य मंदिर लक्ष्मी जी मंदिर छार द्वारी मंदिर एवं सिंह पुरा हनुमान जी मंदिर एक प्रमुख आस्था के केंद्र हैं यहां का जहांगीर किला हरदोल बेटका एवं रिवर फ्रंट शांति एवं सौंदर्य युक्त क्षेत्र है अगर आप यहां आना चाहते हैं तो बुंदेलखंड के झांसी से मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में जाने के लिए रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग दोनों से जाया जा सकता आपको झांसी से कम कीमत में प्रमुख यातायात साधन ओरछा के लिए मिल जाएंगे ओरछा के प्रमुख त्योहार रामनवमी एवं राम विवाह माना जाता है यहां सबसे अधिक मंगल रविवार पुख नक्षत्र सावन तीज को सबसे ज्यादा भीड़ रहती है पुख नक्षत्र में तो सैकड़ों किलोमीटर से लोग पैदल यहां पहुंचते हैं यहां रुकने के लिए अच्छी धर्मशालाएं एवं होटल स्थित है जो आपके बजट में आराम से आ सकते हैं ओरछा एक सस्ता एवं मनोरंजन से भरपूर घूमने का स्थान है फिर सोचना क्या क्यों ना इस बार बरसात एवं गर्मियों की छुट्टी में ओरछा घूमने जाया जाए ✍✍✍✍🌻
🌻Awaj ngo
हमारा देश अनेक देवी देवताओं धार्मिक आस्था एवं त्योहारों का देश है यहां पर अनेक देवी देवता पूजे जाते हैं जिसमें से भगवान राम प्रत्येक व्यक्ति के आस्था के केंद्र हैं भारत देश एक गणतंत्र देश है इसलिए सभी धर्मों की आस्था को देखते हुए एक आचार संहिता होती है लेकिन बुंदेलखंड के झांसी से कुछ किलोमीटर दूर स्थित ओरछा मैं विराजमान ओरछा धीश रामराजा सरकार रामचंद्र जी के मंदिर में उन्हें राज्य सरकार द्वारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है यहां भगवान राम राजा के रूप में विराजमान हैं ओरछा रियासत पूर्व में देश की एक मजबूत रियासत मानी जाती थी यहां के प्रसिद्ध राजा वीर सिंह जूदेव जो कि पूर्व मुगल सम्राट जहांगीर के परम मित्र थे भगवान श्री राम राजा की परम भक्त यहां की रानी कुंवर गणेशी बाई जिन्होंने अयोध्या में जाकर भगवान राम की प्रतिमा लेकर ओरछा में भगवान राम को राजा के रूप में विराजित कराया एक कहानी प्रसिद्ध है कि गणेशी बाई जोगी राम की परम भक्त उन्होंने अपनी भक्ति से भगवान राम से ओरछा चलने का आग्रह किया जिसे भगवान राम ने उन्हें सपने में निर्देशित किया कि मैं प्रतिमा रूप में आपके साथ प्रमुख पुख नक्षत्र में चलूंगा एवं जिस स्थान पर एक पर विराजित हो जाऊंगा उसके बाद अन्य स्थान पर विस्थापित नहीं हो सकूंगा मेरे ओरछा में विराजमान होने के बाद ओरछा का साम्राज्य वीरान हो जाएगा इस प्रकार के सपने से खुश होकर रानी ने ओरछा में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जिसे आज भी लोग चतुर्भुज भगवान के मंदिर के नाम से जानते हैं जब रानी कुंवर गणेशी जी भगवान राम की प्रतिमा लेकर ओरछा पहुंची तो मंदिर में पूजन के लिए कुछ कमी रह गई थी इस कारण उन्होंने भगवान की प्रतिमा को अपने भोजनालय में स्थापित कर दिया उसके बाद वह प्रतिमा फिर नहीं उठी बाद में यही मंदिर का निर्माण कराकर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई भगवान राम ओरछा में राजा के रूप में विराजमान है ओरछा एक अच्छा एवं प्राकृतिक माहौल से भरपूर पर्यटक स्थल है यहां पर प्रत्येक वर्ष देशी एवं विदेशी सैलानी हजारों की संख्या में आते हैं और यहां के प्राकृतिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का आनंद लेते हैं यहां के अन्य मंदिर लक्ष्मी जी मंदिर छार द्वारी मंदिर एवं सिंह पुरा हनुमान जी मंदिर एक प्रमुख आस्था के केंद्र हैं यहां का जहांगीर किला हरदोल बेटका एवं रिवर फ्रंट शांति एवं सौंदर्य युक्त क्षेत्र है अगर आप यहां आना चाहते हैं तो बुंदेलखंड के झांसी से मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में जाने के लिए रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग दोनों से जाया जा सकता आपको झांसी से कम कीमत में प्रमुख यातायात साधन ओरछा के लिए मिल जाएंगे ओरछा के प्रमुख त्योहार रामनवमी एवं राम विवाह माना जाता है यहां सबसे अधिक मंगल रविवार पुख नक्षत्र सावन तीज को सबसे ज्यादा भीड़ रहती है पुख नक्षत्र में तो सैकड़ों किलोमीटर से लोग पैदल यहां पहुंचते हैं यहां रुकने के लिए अच्छी धर्मशालाएं एवं होटल स्थित है जो आपके बजट में आराम से आ सकते हैं ओरछा एक सस्ता एवं मनोरंजन से भरपूर घूमने का स्थान है फिर सोचना क्या क्यों ना इस बार बरसात एवं गर्मियों की छुट्टी में ओरछा घूमने जाया जाए ✍✍✍✍🌻
🌻Awaj ngoबुधवार, 22 मई 2019
बरुआसागर स्वर्ग आश्रम झरना की पवित्र भूमि
बुंदेलखंड का शिमला कहे जाने वाले स्वामी शरणानंद की पवित्र भूमि हमारा नगर बरुआसागर की मिट्टी का कर्ज है हम पर जिसे चुकाने के लिए जीते जी संघर्ष करते रहेंगे यह सोच अकेली मेरी नहीं है मेरे जैसे तमाम नगर के युवाओं की है जो अपने गांव से कहीं दूर सरकारी एवं गैर सरकारी नौकरियां व्यापार सामाजिक संगठनों में कार्य कर रहे हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है हमेशा सुनते आ रहे हैं लेकिन अब आवश्यकता पड़ी है अविष्कार करने की क्योंकि जब कभी ऐसे उदाहरण देखलेते हैं कि किसी छोटे से गांव से कई आईएएस निकले किसी छोटे से गांव से कई बड़े सैन्य अधिकारी निकले किसी गांव से बहुत उद्योगपति निकले तो तो दुख होता है और मन करता है कि क्यों ना हम अपने गांव को भी ऐसा विकसित करें कि यहां से भी कई ऐसी प्रतिभाएं निकले जो विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाए एवं गांव का नाम रोशन करें लेकिन उसके जरूरत है बौद्धिक जागरण मजबूत आर्थिक संपन्न एक जोशीली टीम की जो बदलाव ला सके अपनी प्रतिभा के माध्यम से नगर के भौगोलिक सामाजिक आर्थिक मूलभूत ढांचा मैं क्योंकि हमारा नगर बरुआ सागर एक स्वस्थ एवं स्वच्छ नगर के रूप में जाना जाता है लेकिन आने वाले समय में और इसे विकसित करने के लिए हम सभी नगर के सामाजिक लोगों को आगे आना होगा और इसे भविष्य के लिए विकसित करने के लिए कई योजनाएं को मुहूर्त देने के लिए अपने अपने विचार रखने होंगे जिससे उन विचारों को एक चेहरा दिया जाए और राज्य केंद्र सरकार में बैठे हुए केंद्रीय मंत्रियों अधिकारियों के पास यहां से संबंधित कई विकास कार्यों के लिए विशेष प्रयासरत लिखित मांग की जाए क्योंकि नगर बरुआ सागर इतिहासिक झरना तालाब के किनारे बसा हुआ जो कि अपने आप में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है बात करते हैं यहां के जल संसाधन की पूर्व में नगर तालाब में झीलों का नगर कहलाता था वर्तमान में यहां पेयजल आपूर्ति स्थानीय बेतवा नदी कंपनी बाग के ट्यूबवेल से होती है बेतवा नदी के किनारे होने के बाद भी नगर का बहुत से क्षेत्र पेयजल संकट से जूझता रहता है जिसका मुख्य कारण यहां जो भविष्य के लिए बनाई गई पेयजल योजनाएं हैं वह वर्तमान तक ही सीमित है अधिकारियों की आदूरदर्शिता एवं असंतुलित जल वितरण के कारण समय से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है हमें चाहिए कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए और भी बड़ी जल संसाधन योजनाएं बरुआसागर के लिए बने और बिना किसी भ्रष्टाचार के यहां पर कार्य करें विद्युत पर निर्भर होने के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित होने पर वैकल्पिक पानी की व्यवस्था के लिए झरना तालाब में भी एक बड़ा सा ट्यूबवेल लगाकर आपात स्थिति जनरेटर द्वारा नगर एवं आसपास के क्षेत्रों पेयजल आपूर्ति की जा सके इसके लिए पूंजी की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि वर्तमान में नगर पालिका परिषद इतना सारा इन्वेस्ट नहीं कर सकती क्योंकि नगर पालिका परिषद की एक सीमित आय है उसके लिए हमें विभिन्न विकास निधियों संसद नदी विधायक निधि वित्त पोषित निधि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत चलने वाली निधि से करना होगा उसके लिए योजना बनाकर उसे स्वीकृत होगी यह किसी एक व्यक्ति की जिम्मेवारी नहीं कि वह सभी योजनाओं के लिए कार्य करें इसके लिए नगर के सभी लोग अपने अपने स्तर से कार्य कर सकते हैं खुद अपने विचार या अपनी मांग को लेकर पीएमओ से लेकर राज्य सरकार तमाम जगह भेज सकते है अदरक अरबी रतालू आमला अमरूद किन्नू फल के लिए प्रसिद्ध बरुआसागर की बरसों से चली आ रही फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की मांग मूर्त रूप नहीं ले पा रही है अनेकों बार इस यूनिट के लिए तमाम अधिकारियों से लेकर विभागों को फाइल पहुंचाई गई लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ पाई दूसरी बड़ी समस्या नगर के बीचो-बीच गुजरने वाले भारी वाहन बड़ी समस्या बने है क्योंकि जिस बायपास मार्ग की योजना ठंडे बस्ते में है उसका मुख्य कारण है के किले के पास लगने वाले पहाड़ को काटकर बायपास मार्ग बनाना था लेकिन क्योंकि वह पुरातत्व एवं वन विभाग की जगह होने के कारण एनओसी का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है इसीलिए ठंडे बस्ते में हो सकता है कि बड़े लीडरों एवं अधिकारियों के हस्तक्षेप से यह मांग भी सॉल्व हो सकती है लेकिन उसके लिए पहल करनी पड़ेगी नगर को सुरक्षित बनाने के लिए एक और योजना है जो पूरी तरह से पीपीपी मॉडल पर है जिसमें नगर का जो भी व्यक्ति अपने मोहल्ले एवं घर को सुरक्षित रखना चाहे तो वह नगर पालिका के सहयोग से सीसी कैमरा लगा सकता है जिसमें कुछ परसेंट फंड नगरपालिका दे बकाया सत्तर परसेंट गृह स्वामी दे सकता है जिससे सभी नगर की गलियां सुरक्षित हो सके एक और प्रमुख बड़ा मुद्दा बरुआसागर का नगर तालाब जो कि मध्य प्रदेश के राजापुर में बने डैम की वजह से कुछ वर्षों मैं पूर्ण रूप से नहीं भर पा रहा था लेकिन वर्तमान में पिछले वर्ष जो अच्छी बारिश हुई उससे तो तालाब भर चुका है पिछली बरसात में लाखों की संख्या मैं सैलानियों ने यहां का प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक धार्मिक लाभ उठाया लेकिन भविष्य में फिर से अगर कम बारिश होती है तो यह तालाब पूर्ण रूप से खाली रहेगा जिसका पूरा सर हमारे आसपास होने वाली खेती वाटर लेवल पर पड़ता है और उस से चलने वाले उद्योग धंधों पर इसका व्यापक असर पड़ता है जल बंटवारे को लेकर तमाम सामाजिक संगठनों द्वारा पहल की गई लेकिन मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश के बीच होने के कारण यह मामला फंसा हुआ है केन बेतवा गठजोड़ मैं केन नदी का पानी बेतवा में डालना था मुख्य बिंदु बरुआसागर तालाब था लेकिन जब योजना जमीन पर ही नहीं उतर पाई जिसकी मुख्य संरक्षक पूर्व जल संसाधन विकास की केंद्रीय मंत्री थी एवं मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश दोनों जगह एक ही सरकार की गवर्नमेंट थी अब भविष्य में इसका पूर्ण होना संशय बना हुआ है क्योंकि वर्तमान में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश विपरीत राज्य सरकार हैं जिससे बरुआसागर तालाब राजापुर तालाब के बीच जल बंटवारा होना टेढ़ी खीर होगा क्षेत्रीय स्तर से जल बंटवारा हो सकता है क्योंकि बिना जल बंटवारे के हमेशा पानी के लिए असुरक्षा बनी रहेगी क्योंकि राजापुर में जो जल संचय किया जाता है उसको नहर के माध्यम से निवाड़ी होते हुए बाईपास कर दिया जाता है इसलिए कितना ही पानी आए लेकिन बरुआसागर तालाब में एक बूंद भी पानी नहीं आ सकता वह तो पिछले साल रिकॉर्ड अत्यधिक बरसात से बाढ़ की हालत के हालात होने के कारण मजबूरी में पानी छोड़ना पड़ता है और अभी पूरी तरह से मध्यप्रदेश के राजापुर तालाब से लगी हुई नहरों का विस्तार नहीं हो पाया आने वाले समय में बरुआ सागर झरना तालाब के लिए संकट की घड़ी होगी एवं तालाब अपना वैभव खो देगा अब बात करते हैं नगर के युवाओं एवं छात्रों के लिए उनके लिए विशेष योजनाएं होनी चाहिए क्योंकि वर्तमान में क्रिकेट एवं मोबाइल युग से विपरीत उनके लिए कंपटीशन भावना लाना है तो खेल एवं स्वयं सहायता समूह सामाजिक विकास करना पड़ेगा जिसके लिए नगर में अधूरे पड़े खेल स्थान एवं इनडोर स्टेडियम की व्यवस्था करनी चाहिए जहां छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए दौड़ प्रतियोगिताएं टेबल टेनिस चैस खो खो कबड्डी जूडो कराटे तीरंदाजी जैसे खेलों को खेल कर अपने आप को सामाजिक मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत कर सके और भविष्य में जिले प्रदेश देश एवं ओलंपिक जैसे खेलों में सम्मिलित होकर नगर का नाम रोशन करें महिलाओं के लिए जितना जिले के अन्य क्षेत्र में हुआ नगर में शायद नहीं हो पाया क्योंकि महिला सशक्तिकरण का विकास करने के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा अनेक स्वयं सहायता समूह चलाए जाते हैं जिनमें महिलाएं व्यापारिक सामाजिक आर्थिक मजबूत होने के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़ी होती है आज भी नगर में जरूरत है विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देने वाले प्रोग्रामओं की जो महिलाओं को तमाम व्यापारिक प्रशिक्षण दे सकें अगर नगर की 50 में से 10 महिलाएं भी आर्थिक रुप से मजबूत हो गई तो नगर की तस्वीर ही कुछ और होगी छात्रों के लिए एक विशेष सौगात जो पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव प्रमोद कुमार अग्रवाल जी ने दी थी उसका लाभ उठाकर आज सैकड़ों छात्र सरकारी एवं गैर सरकारी पदों पर आसीन हैं वह है हमारे नगर का एकमात्र पुस्तकालय जो नगर पालिका द्वारा संचालित है उसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार ना होने के कारण आज भी अनेकों छात्र छात्राएं उस लाभ लेने से वंचित है इसके लिए चाहिए उसका प्रचार-प्रसार हो एवं लोगों को किस प्रकार से लाभ पहुंचाया जा सके इस प्रकार योजना बनाई जा सकती है ऐसी अनेक कार्य है जिसके माध्यम से नगर का चौमुखी विकास किया जा सकता है उसके लिए हम सभी को एक ठोस पहल करनी होगी क्योंकि किसी के पास वक्त नहीं है किसी के पास धन नहीं है किसी के पास संसाधन नहीं है लेकिन जब पांचों उंगलियां मुट्ठी बन जाती है तो एक विशेष शक्ति कहलाती हैं इसीलिए हम सब को एक होकर नगर हित में कार्य करने होंगे✍✍✍✍awaj ngo
शनिवार, 18 मई 2019
गांधी एवं गोडसे
पिछले कुछ वर्षों से एक प्रोपोगेंडा चला कर देश के महापुरुषों के चरित्र का हनन करने का प्रचलन बन गया है आज कोई भी सड़क छाप व्यक्ति किसी भी महापुरुष के चरित्र पर कीचड़ उछाल देता है और कथित सोशल मीडिया उस को हवा देने लगती है वर्तमान समय में जिस प्रकार से एक हत्यारे नाथूराम गोडसे जिसने एक अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी को सीने मैं गोली मारकर उनके जीवन का अंत कर दिया था उस मनोरोगी व्यक्ति को महान बताने में लगे हुए है इतिहास हमें बताता है कि किस प्रकार एक व्यक्ति ने अपने खुशहाल आधुनिक जीवन को त्याग करके पूरे विश्व में एक हिंसा के प्रति अहिंसा की लड़ाई लड़कर अहिंसा का जो हथियार दिया है वह वर्तमान समय एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ही कारगर हो रहा है लेकिन वर्तमान में जिस प्रकार से लोगों में हिंसा भरी जा रही है वह आनेे वाली पीढ़ियों के लिए नासूर साबित होगी वर्तमान में पूरे विश्व में जिन देशों में हिंसक लोग रहते हैं उनका हश्र सबके सामने है जर्मनी में जब हिटलर का उदय हुआ था तो वह सब हिंसा पर उतारू हो कर अपने आपको भगवान का प्रतिनिधि मान कर लोगों पर अत्याचार कर रहा था लेकिन बाद में उसका अंत खुद आत्महत्या करने के बाद हुआ था कथित सोशल मीडिया के इतिहास मैं पढ़ाया जा रहा है कि किस प्रकार नाथूराम ने देश हित मैं हत्या की थी हिंसा का अंत बहुत ही खराब होता है अगर वर्तमान में नाथूराम गोडसे ढूंढने के लिए आप सड़कों पर निकलेंगे तो हर गली मोहल्ले में सिरफिरे टाइप के नाथूराम गोडसे मिल जाएंगे लेकिन गांधी को ढूंढने के लिए पीढ़ियां गुजर जाएंगी क्योंकि ऐसी दिव्य आत्मा सदियों में जन्म लेती हैं जिस व्यक्ति अहिंसा सादापन दया भावना एवं परोपकार के लिए पूरी दुनिया नतमस्तक थी और है पूर्व में उस समय के इंग्लैंड के प्रधान मंत्री ब्रिस्टल चर्चील ने इंग्लैंड की महारानी द्वारा आमंत्रित किए गए भोज में महात्मा गांधी के लिबास को देख कर कहा था की आनेे वाली पीढ़ियांं आश्चर्य करेंगी कि ऐसा व्यक्ति भी इस दुनिया में पूर्व में हुआ होगा अब सवाल ये उठता हैैैै कि क्या कारण है कि वर्तमान मैं लोग इतने ज्यादा हिंसक कैसे हो गए की आपसी बातचीत से लेकर सोशल मीडिया तक मैं गालियों से बात करने लगे और हर तर्क वितर्क की बात पर उग्र हो जाते है पहले तो हमारा देश व समाज ऐसा नहीं था 🎯🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳✍awaj ngo
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