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सोमवार, 10 अप्रैल 2023
लखनऊ का दिल है हजरतगंज बाजार
हजरतगंज लखनऊ का एक बड़ा बाजार है जो उत्तर प्रदेश राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस बाजार में वस्तुओं के विशाल विकल्प हैं जिनमें वस्तुएं, खाद्य पदार्थ, पुस्तकें, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, कपड़े और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
हजरतगंज का नाम मुगल शासक जहाँगीर के गुरु हजरत मखदूम तालिब जहांगीर के नाम पर रखा गया था। इस बाजार में लगभग 2000 से अधिक दुकानें हैं जो अपने आकर्षक उत्पादों के लिए मशहूर हैं।
इस बाजार की शुरुआत लखनऊ के नवाबों द्वारा की गई थी क्योंकि अंग्रेजों के शासन में अंग्रेजों के लिए स्पेशल बाजार हुआ करते थे जहां पर विदेशी सामान बिकता था और खरीददार ज्यादातर अंग्रेज लोग ही होते थे कुछ बाजारों में स्थानीय राजा रजवाड़े के लोग भी सामान खरीदा करते थे उन्हीं की तर्ज पर स्थानीय नवाबों द्वारा आम लोगों एवं खास लोगों की खरीदारी के लिए स्पेशल हजरतगंज बाजार बनवाया था जहां पर ज्यादातर विदेशी दुकानदार अपने उत्पादों को बेचा करते थे और भारतीय लोग इन सामानों को बड़े शौक से खरीदते थे
हजरतगंज का अन्य चर्चित स्थान है
हजरतगंज मंदिर, जो भारत के सबसे बड़े हनुमान जी के मंदिरों में से एक है। इसके अलावा, एक और धार्मिक स्थल है, हजरत मकदूम सहब का मजार, जो शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
लखनऊ के हजरतगंज बाजार में खाने के लिए कई स्थान हैं, जहाँ आप लखनवी खाने का मजा ले सकते हैं।
इनमें तुंडे कबाब, गलौटी कबाब, दही भल्ले, लखनवी बिरियानी, तंदूरी चाय, रॉयल कैफे शाही चाट , शाही पान , स्पेशल मोती महल डोसा, स्पेशल छोले भटूरे, छोले पूरी, आलू कुलचे, जैसे दर्जनों खानपान की वैरायटी की लगभग दर्जनों विश्वविख्यात दुकान यहां पर स्थित है
यहां का बाजार लोगों की आकर्षण का विशेष केंद्र बना रहता है यहां की शाम ए अवध कहलाती है
जो कि मध्य रात्रि तक यहां की खान पान की दुकान खुली रहती है और लोग बड़े आनंद से अपने दोस्त यारों रिश्तेदार एवं परिवार के साथ लखनवी शान ओ शौकत का मजा लेते हैं
शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2022
पाकिस्तान को जिम्बाब्वे ने 1 रन से हराया हुआ बवाल
विश्व कप 20-20 किर्केट के एक अहम मुकाबले में पहले से ही भारत से हार चुकी पाकिस्तानी टीम की मुसीबतें बड़ी हुई थी
लेकिन किसी ने सोचा भी न था कि पाकिस्तानी टीम सबसे निचले क्रमांक तालिका की टीम जिम्बाब्वे से भी हार जाएगी
जिम्बाब्वे की क्रिकेट टीम ने अपने अच्छे खेल के बदौलत दुनिया भर के क्रिकेट खेल प्रेमियों चकित कर दिया रोमांचित मुकाबले में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को मात्रा एक रन से हराकर उथल पुथल मचा कर पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ा दी
भारत से हार के बाद जिस तरह से पूरे पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसकों निराशा थी और खेल को एक युद्ध की तरह से देखने के कारण वह पाकिस्तानी क्रिकेट टीम से आशा कर रहे थे कि टीम अपने बचे हुए मुकाबलों को जीत कर सेमीफाइनल और फाइनल मैच के मुक़ाबले में भारतीय क्रिकेट टीम से हार का बदला ले लेकिन जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम से हार के बाद पाकिस्तानी टीम का सेमीफाइनल मुकाबले में पहुंचना मुश्किल हो गया है
सबसे बड़ी वजह जिम्बाब्वे की क्रिकेट टीम से हार के बाद विश्व भर में सभी सोसिल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तानी क्रिकेट टीम और उनके समर्थकों की खिचाई हो
मजाक बनने की शुरुआत होने के बाद तो मिम्स की बाढ सी आ गई है जिसमें जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति का ट्यूट्स और वहा के मीडिया एंकर का न्यूज चैनल पर प्रसारित समाचार में हस्ते हुए जानकारी का वीडियो हर कोई मजे से रीट्यूट्स और शेअर कर रहा है
पाकिस्तान टीम की हार पाकिस्तान में एक राजनैतिक मुद्ददा बन सकता है जो वहा के क्रिकेट बोर्ड और सत्ताधारी सरकार में उथल पुथल मचा सकती हैं और बेचारे पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान के साथ सभी टीम मेंबर की तो समझो शामत आने बाली हैं
इसी लिए तो कहा जाता हैं कि खेल को खेल रहने दो उसे युद्ध का मैदान ना बनाओ
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022
भारतीय मूल के ऋषि सुनक होगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
जिस देश के साम्राज्य में कभी भी सूरज नहीं डूबा उस देश ब्रिटेन में कई दिनों से राजनीतिक उथल-पुथल भरे माहौल के बीच पेरी मांर डेंट के नाम बापिस लेने के बाद आधिकारिक ऐलान किया गया कि भारतीय मूल के ऋषि सुनक होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री यह खबर की जानकारी जब विश्व भर में फैली तो भारत में मन रहे त्योहार दीपावली की खुशी भारतीयों के लिए कई गुना बढ़ गई
क्योंकि हर भारतीय के लिए यह ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है जिस देश को अंग्रेजों द्वारा 100 वर्ष से अधिक समय तक गुलाम बनाए रखा उस देश में से कोई भारतीय मूल का प्रधानमंत्री बनने जा रहा वह भारतीयों के लिए गर्व की बात है
और अंग्रेजो के संविधानिक शक्ति अधिकार की जितनी तारीफ की जाए कम है
आर्थिक मंदी की आशंकाओं और यूक्रेन रशिया युद्ध से बने हालातो के बीच यूरोप भर में राजनैतिक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इस समय में ऋषि सुनक को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद की चुनौतियों का सामना करना आसान काम नहीं है
लेकिन नए प्रधानमंत्री से यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन के लोगों को लेकर काफी आशाएं है कि इस बार के क्रसमिस के पहले सब कुछ सही हो जाएगा
भारतीयो को ऋषि सुनक के प्रधान मंत्री बनने के बाद क्या लाभ होगा यह कह पाना अभी जल्दबाजी होगा क्योंकि राजनीतिक हालात अभी भी पूरी तरह से यूरोपीय संघ और अमेरिकी ,नाटो के राजनीतिक हालात और रूस के अगले कदम से तय होंगे
कुछ भी हो लेकिन भारतीयों में गजब का उत्साह बना हुआ हैं जिसका एक ओर कारण ऋषि सुनक का भारत में बहुसंख्यक समुदाय हिन्दू होना बताया जा रहा है
ऋषि सुनक के प्रधान मंत्री बनने की आधिकारिक घोषणा होने के बाद विश्व भर में सभी सोशिल मीडिया में तरह तरह के मीम्स और कहानी आने लगी हैं
ऋषि सुनक को लेकर लोग उनसे मिलती जुलते फोटो को डालकर जोक्स बना रहे है
रविवार, 12 सितंबर 2021
बरुआसागर का ऐतिहासिक झरना तालाब हुआ ओवरफ्लो कल कल करते हुए बहने लगा झरना
बुंदेलखंड के झांसी जिले से 20 किलोमीटर दूर बरुआसागर में स्थित चंदेल कालीन ऐतिहासिक स्वर्ग आश्रम झरना तालाब जो कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं धार्मिक आस्था के लिए पूरे बुंदेलखंड में बुंदेलखंड के शिमला के रूप में पहचान रखता है जहां के दिव्य संत स्वामी शरणानंद जी एक उच्च कोटि के संत थे बरुआ सागर तालाब से झरने वाला झरना बहुत ही प्रसिद्ध है यहां पर दूर-दूर से देशी एवं विदेशी पर्यटक बरसात के मौसम में झरना देखने के लिए आते हैं कुछ वर्षों से तालाब पूर्ण रूप से ना भर पाने के कारण स्वर्ग आश्रम झरना के प्राकृतिक सौंदर्य एवं झरने वाले कल कल करते झरने पर अठखेलियां करने का लोगों को आनंद नहीं मिल पा रहा था लेकिन कुछ वर्ष पूर्व हुई अत्यधिक बारिश से जहां पिछले वर्षों में लाखों की संख्या में सैलानी बरुआसागर झरने पर आए लेकिन इस बार तालाब के समय से ना भर पाने के कारण अभी तक पर्यटक तालाब के ओवरफ्लो होने के इंतजार में थे लेकिन लोगों की इंतजार की घड़ियां गणेश महोत्सव की शुरुआत होते ही खत्म हो चुकी हैं बरुआसागर का इतिहासिक झरना तालाब पूरी तरह से भर चुका है अब यह ओवरफ्लो होकर पूर्ण रूप से झरना चालू हो गया है
स्थानीय लोगों के साथ दूर-दूर से लोग इसके सुंदर को निहारने के लिए झरना तालाब पर पहुंच रहे हैं आप सभी से निवेदन है की कुछ वर्षों में झरना में पानी का आनंद लेते हुए इस की गहराइयों से अनभिज्ञ बाहरी लोग तालाब की गहराइयों में चले जाते या इसकी तीव्रता से बहने के कारण उसके साथ बह जाते हैं जिससे बड़ी दुर्घटना घटित हो जाती है जिससे प्रसिद्ध इतिहासिक धार्मिक प्राकृतिक स्थल पर घटित बुरी दुर्घटना एक दाग के रूप में दर्ज हो जाती है इसीलिए बाहरी लोगों से निवेदन है कि सतर्क एवं संरक्षित होकर तालाब के पास जाएं और प्राकृतिक सौंदर्य का लाभ उठाएं बरुआसागर झरना तालाब हिंदू धार्मिक आस्था के केंद्र बिंदु मठ परंपरा के कारण जाना जाता है इसलिए यहां मांसाहारी भोजन एवं शराब पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है इसीलिए यहां के धार्मिक माहौल को ध्यान में रखकर भोजन कार्य एवं सफाई का ध्यान रखें सुरक्षित रहें संरक्षित रहें जय बुंदेलखंड जय स्वामी शरणानंद🙏🙏🙏🌦🌦🌧🌝🚩🚩🚩
सोमवार, 14 जून 2021
विश्व रक्तदान दिवस पर 100 बी बार किया रक्तदान देश के हर युवा के लिए विशेष प्रेरणा स्त्रोत निशांत साहू (गगन)
अपने लिए जिया तो क्या जिया कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखो
कोरोनावायरस महामारी काल में जब लोगों के अपनों ने साथ छोड़ दिया तो तब समाज के ऐसे महान लोग सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए भी लोगो की जान बचाने के लिए बिना किसी स्वार्थ के तन मन धन से मदद की उन्हीं में से एक युवा जो बिना किसी पुरस्कार एवं प्रशंसा की लोगों की मदद करता रहा और बरसों से कर भी रहा है
युवा ब्लड डोनर एवं समाजसेवी निशांत साहू गगन
प्रत्येक 14 जून को विश्व में रक्तदान दिवस मनाया जाता है जिसमें लोगों को अधिक से अधिक रक्तदान करने के लिए जागृत किया जाता है सच में जरूरतमंदों को रक्तदान सबसे बढ़ा महादान होता है यह दान धर्म जाति मजहब से परे सिर्फ इंसानियत को देखता है रक्त की अहमियत वह व्यक्ति जानता है 
जिसका कोई अपना परिवार का सदस्य रक्त के बिना जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है हमारे देश में लाखों लोग रक्त की कमी की वजह से समय से पहले मृत्यु को गले लगा लेते हैं आज हमारा देश इतना आधुनिक होने के बाद भी लोगों को रक्तदान के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक नहीं कर पा रहा है
वर्तमान में भी में रक्तदान के प्रति लोगों में कई भ्रांतियां फैली हुई है लोग रक्तदान करने से डरते हैं जबकि सभी को पता स्वस्थ मनुष्य 5 से 6 लीटर तक होता है रक्त नियमित रूप से शरीर में बनता रहता है आपके नजदीक कुछ तो ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी लोग मिल जाएंगे जो जीवन में अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं और अकाल मृत्यु से लोगों की जान बचा चुके हैं
ऐसे ही एक बहुमुखी प्रतिभा का धनी युवा निशांत साहू गगन जो कि देश भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत की तरह है अनेक समाजसेवी उनकी
साधारण और शालीनता भरी उसकी कार्यशैली से काफी प्रभावित है

देश के हृदय बुंदेलखंड के झांसी जिले के छोटे से कस्बे बरुआसागर के निवासी गगन साहू जो कि इलाहाबाद में अपने अध्ययन काल में साथ की पढ़ने वाली छात्रा को माइग्रेन अटैक आने पर उसे स्वेच्छा से प्रथम बार रक्तदान किया इसके बाद अब तक मात्र 29 साल की छोटी सी उम्र में 100 बार रक्तदान कर चुके एवं क्षेत्र के युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत वन कर युवाओं के द्वारा 500 से अधिक बार रक्तदान करवा चुके है इनका यह सामाजिक कार्य पूरे क्षेत्र में सराहा जा रहा है
गगन साहू को समाजसेवा अपने परिवार से विरासत में मिली हुई इनके पिता हरी राम साहू नगर के प्रतिष्ठित संगीतकार चित्रकार एवं बहु मुखी प्रतिभा के धनी यह पूर्व में राष्ट्रीय युवा योजना से लेकर अनेक सामाजिक संगठनों से जुड़कर राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक कार्य कर चुके हैं गगन साहू वर्तमान में सिविल सर्विसेज की तैयारी एवं घर के व्यवसाय में हाथ बटाने के साथ ही सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं गगन साहू देश के अनेक हिस्सों में जाकर रक्तदान कर चुके हैं वहीं क्षेत्रीय स्तर पर इनकी विशेष युवाओं की रक्तदाता टीम है

जोकि जरूरतमंद लोगों को रक्त एवं रक्त दाता मुहैया कराती है गगन की टीम के अनेकों सदस्य ऐसे हैं जो अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं एवं उनकी टीम प्रत्येक बल गणेश महोत्सव के अवसर पर एक विशाल रक्तदान शिविर जिला चिकित्सा अधिकारी के संरक्षण एवं सहयोग से आयोजित कराते हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करते हैं एवं लोगों से रक्तदान करने के लिए जागरूक एवं अपील करते हैं इस पुनीत कार्य के लिए गगन साहू एवं उनकी टीम झांसी
जिला अधिकारी झांसी जिला चिकित्सा अधिकारी से लेकर अनेक राजनैतिक एवं गैर राजनीतिक संगठनों द्वारा सम्मानित हो चुकी है
जोकि जरूरतमंद लोगों को रक्त एवं रक्त दाता मुहैया कराती है गगन की टीम के अनेकों सदस्य ऐसे हैं जो अनेकों बार रक्तदान कर चुके हैं एवं उनकी टीम प्रत्येक बल गणेश महोत्सव के अवसर पर एक विशाल रक्तदान शिविर जिला चिकित्सा अधिकारी के संरक्षण एवं सहयोग से आयोजित कराते हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग रक्तदान करते हैं एवं लोगों से रक्तदान करने के लिए जागरूक एवं अपील करते हैं इस पुनीत कार्य के लिए गगन साहू एवं उनकी टीम झांसी
जहां एक और लोगों में रक्तदान के प्रति अनेक भ्रांतियां एवं भय रहता है वही गगन एवं गगन साहू की टीम के सदस्य बस एक फोन का इंतजार करते हैं कि किस जरूरतमंद का फोन आए और हम उसे रक्तदाता उपलब्ध कराएं सच में हर कोई चाहता है कि गगन जैसे लोग समाज मैं लोगों के लिए प्रेरणा बने एवं सभी लोग आगे आकर इस प्रकार की पुनीत कार्य करके अपना जीवन सार्थक बनाएं दुनिया में हर कोई महान बन सकता है लेकिन उसके लिए गगन साहू जैसे ईमानदारी के साथ लग्न और दृढ़ इच्छाशक्ति चाहिए क्योंकि वर्तमान में
जिस प्रकार से युवा नशाखोरी हवा हवाई जीवन शैली सोशल मीडिया तक सीमित रह कर राजनीतिक पार्टियों के लीडरों की जय जयकार एवं गालियां देकर अपना समय बर्बाद करता है वही दूसरी ओर असली देश सेवा एवं समाज सेवा गगन जैसे लोग करते हैं एवं अपने जीवन को सार्थक बना लेते हैं निशांत साहू गगन अनेक पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं लेकिन आज भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा पुरस्कार ना मिलने पर स्थानीय लोगों में आश्चर्य है
जब कोरोनावायरस महामारी काल में काम करने वाले लोगों को पुरस्कृत किया जा रहा था तो गगन जैसे अनेक युवा प्रथम पंक्ति के काबिल थे लेकिन अंतिम कतार में भी नजर नहीं आ रहे थे जो समाज के सिस्टम पर सवाल उठाता ऐसे लोगों को प्रोत्साहन मिलना बेहद जरूरी है गगन के सराहनीय कार्य पर हम सभी उन्हें दिल से सलाम करते हैं🙏💐🎉🎉✍️awaj
गुरुवार, 3 जून 2021
विश्व साइकिल दिवस पर वो साइकिल और बचपन की यादें जो शायद कभी लौट कर ना आए
#विश्व_साइकिल_दिवस
हर किसी के बचपन का जुड़ाव साइकिल से किसी ना किसी रूप में जरूर रहा होगा बचपन के उन दिनों की याद जरूर आ जाती है जब साइकिल एक रुपए पर घंटे किराए पर मिला करती थी चला पाए या ना चला पाए वह अलग बात थी क्योंकि आसपास ऐसे दोस्त भी हुआ करते थे कि जो सिखाने के बहाने खुद मजे लूटते थे 1 घंटे के लिए मिलने वाली साइकिल में ज्यादातर समय चैन चढ़ाने और हवा भरने में ही निकल जाता था
यदि सब कुछ ठीक रहा तो किराए की साइकिल की खराब घंटी एवं कमजोर ब्रेक की समस्या हमेशा बनी रहती थी जिसके कारण किसी से टकराया ना उसका उत्तरदायित्व पीछे से गाइड कर रहे दोस्त और अपने पैरों का ज्यादा रहता था कैंची डंडा सीट वाली साइकिल सीखने की प्रक्रिया में चलाते समय सबसे ज्यादा ध्यान फ्रेंड लोगों की तरफ रहता था और सिखाने वाले हमेशा कहते थे सामने देखो यदि साइकिल की स्पीड अधिक हो गई और पीछे से गाइड करने वाले दोस्त पीछे छूट गए तो लोगों को हटाने एवं साइकिल को कंट्रोल करने का एक ही सहारा होता था साइकिल को रोकने की नाकाम कोशिश करते हुए बार बार चिल्लाना भाई साहब हट जाओ भाई साहब हट जाओ साइकिल में ब्रेक नहीं है फिर भी किसी ना किसी से टकरा जाती थी
उसके बाद शुरू होती थी जांच पड़ताल किसके लड़के हो साइकिल चलाना नहीं आता क्या देखो हमें कितनी लग गई हमारा इलाज कराओ इन सभी सवालों के बीच पीछे साइकिल सिखाने वाले दोस्त रफू चक्कर हो जाते थे मन में डर होता था कि अब शायद घर पर शिकायत ना पहुंच जाए उससे ज्यादा टेंशन किराए की साइकिल की टूट-फूट एवं किराए का एक घंटा पूरे होने का भी रहता था कि अगर 5 मिनट भी ज्यादा हो जाएंगे दूसरे घंटे के भी पैसे देने पड़ेंगे
साइकिल सीखते समय साइकिल का गिरना एक आम बात होती थी और हमेशा सिखाने वाला एक ही डायलॉग मारता था जब तक गिरोगे नहीं तब तक चलाना सीखोगे नहीं आज भी अनेक लोगों के घुटनों में साइकिल से गिरने से बने चोट के निशान बने हुए देखे जा सकते हैं जो कि उस नादान बचपन की याद के तौर पर हैं
उस समय लगभग सभी बच्चों की अपने घर वालों से एक ही आसान और मांग रहती थी कि उन्हें नई साइकिल कब मिलेगी
अब लगभग हर घरों में मोटरसाइकिल कार जरूर आ गए हो लेकिन ओ है किराए की साइकिल चलाने का मजा शायद अब कभी लौट कर ना आए🎯
रविवार, 25 अप्रैल 2021
कोरोनावायरस महामारी की लड़ाई में सबसे कमजोर कड़ी बुजुर्ग इंसान
🌍वैश्विक 😷कोरोना🐉वायरस ☠️महामारी काल की सबसे 🎭कमजोर कड़ी उम्र दराज 👴बुजुर्ग लोग हैं विश्व भर में जितने भी आंकड़े आए हैं उस पर सबसे ज्यादा मृत्यु दर एवं समस्या बुजुर्ग लोगों की हो रही है क्योंकि उम्र के अंतिम पड़ाव में विभिन्न बीमारियों से घिरे बुजुर्ग दादी दादा मां बाप अन्य लोग जो कि लगभग साथ 65 साल से ऊपर के हैं उन्हें इस समय बेहद की देखभाल की जरूरत है कोरोनावायरस की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भी मैं उसकी जानकारी ना दे क्योंकि डर भरे माहौल में एक नेगेटिव सूचना उनके जीवन की डोर को तोड़ सकती है इसलिए जितना हो सके इस समय उनके साथ रहकर उनकी उचित देखभाल कर कर उन्हें पॉजिटिव सोचने एवं पॉजिटिव रहने के लिए माहौल देने की विशेष जरूरत है मीडिया के माध्यम से बेहद थी दर्द भरी दुखी करने वाली घटनाएं सामने आ रही है जिसमें सभ्य समाज के पढ़े-लिखे लोग जिनके लिए उनके मां बाप ने बेहतर भविष्य के लिए अपने सपनों को कुर्बान कर दिया और जीवन के अंतिम पड़ाव में उनसे अपने अच्छे जीवन के पल की आशा करके उनको सब कुछ दे दिया लेकिन वह अपने बुजुर्ग परिवार के सदस्यों को अपने हाल पर छोड़ कर अपने अपने काम में व्यस्त हैं हालात ये हैं कि बुजुर्गों की सामान्य स्थिति होने के बाद भी हॉस्पिटल में भर्ती करके उनकी सुध लेने लेने की जरूरत नहीं समझते और जब वह किसी अपने को अपने बीच ना पाकर अपनी जिंदगी से हार मानकर मौत के सामने समर्पण कर देते हैं या हॉस्पिटल के कर्मचारी उनकी जान की कीमत को मामूली समझकर किसी और को वरीयता देकर उन्हें उचित देखभाल एवं दवाइयां ना देकर उन्हें समय से पहले मरने के लिए छोड़ रहे है मरने के बाद उनकी डेड बॉडी को भी लेने के लिए उनके अपने लोग हाथ खड़े कर रहे हैं इस प्रकार के हालात से समाज का कुरूप चेहरा देखने को मिल रहा है जो बेहद ही दुखद एवं निंदनीय है आप सभी से निवेदन है कि अपने बुजुर्ग परिवार के सदस्यों का उचित ख्याल रखें क्योंकि जीवन रहे ना रहे लेकिन समाज का ताना-बाना बना रहना चाहिए और ऊपर वाले की लाठी से डरना चाहिए क्योंकि आज हमारा समय है कल किसी और का होगा🎯
शनिवार, 24 अप्रैल 2021
भारत में कोरोना वायरस महामारी को चरम पर पहुंचने में आखिर गलती किसकी है
कहते हैं कि #बेवकूफ और #बहादुर में नाम मात्र का फर्क होता है कामयाब हुए तो बहादुर वरना बेवकूफी कहा जाएगा वर्तमान समय में जिस हालात से हमारा देश गुजर रहा है उसमें सबसे बड़ी जिम्मेवार हमारे देश की सरकार की विदेश नीति एवं आम लोगों की लापरवाही नीतिया हैं क्योंकि लगभग एक साल पहले हम लोग पूरे विश्व मैं #कोरोनावायरस महामारी के विकराल रूप को देखकर बड़े-बड़े देशों को बेवकूफ समझ रहे थे अपने आप को हार्ड ह्यूमैनिटी पावर का स्वयंभू स्वामी समझ रहे थे विश्व बैंक एवं विश्व हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के साथ बड़े-बड़े देशों ने भारत के लिए अनेक घोषणा पहले से कर दी थी कि कोरोनावायरस महामारी सबसे ज्यादा तबाही भारत जैसे विकासशील देश में मचाएगी जिसमें लगभग 20 लाख लोगों के संक्रमण से मौतों की संभावना व्यक्त की थी जिसके बचाव एवं आपातकालीन व्यवस्था की तैयारी के लिए उन्होंने भारत को लाखों करोड़ों डॉलर का कर्ज एवं सहायता दी जो प्लान और टारगेट के हिसाब से 2024 तक पूरे भारत में जन जागरूकता अभियान सुरक्षा समय-समय पर लॉकडाउन वैक्सीनेशन प्रोग्राम बड़े-बड़े हॉस्पिटल एवं चिकित्सक सामग्री तैयार करने के लिए थे लेकिन कुछ कारणवश पिछले वर्ष वह वायरस इतना प्रभावी नहीं हुआ जिस कारण यहां की सरकार एवं लोग पूरी तरीके से लापरवाह हो गए और अपने आपको कोरोना वायरस महामारी से जंग में खुद विजेता घोषित कर दिया और जितने भी देश के संसाधन थे दानवीर बन कर विभिन्न देशों में बेचना और बांटना चालू कर दिया इतने बड़े देश की जरूरतों को अनदेखा कर देश में बनी वैक्सीन को अनेक देशों में वितरित करना एवं भारी मात्रा में विभिन्न देशों को बिन मांगे राहत सामग्री पहुंचा कर अपने आप को तीस मारखा साबित करने की कोशिश की गई वर्तमान समय में जब कोरोनावायरस महामारी हमारे देश में चरम पर है और पूरा चिकित्सा तंत्र छिन्न-भिन्न होने की कगार पर है देश के हर कोने में त्राहि-त्राहि मची हुई है दवाओं की कालाबाजारी ऑक्सीजन की किल्लत और श्मशान में जलती लाशों के बीच कुछ अमेरिका जैसे एहसान फरामोश देशों द्वारा भारत को वैक्सीन बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल सॉल्ट एवं मेडिकल सामग्री को देने से स्पष्ट मना कर दिया जो भारत अपने आप को दानवीर कहकर दोनों हाथों से अपने संसाधन दुनिया भर के देशों पर लुटा रहा था उस विशाल देश को मदद के समय कोई भी बड़ा देश सामने नहीं आ रहा क्योंकि वर्ल्ड बैंक और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने स्पष्ट दो टूक कहा कि भारत की अंदरूनी राजनीतिक नीतियों के कारण बड़ी लापरवाही एवं फंड का सही से इस्तेमाल नहीं किया है एवं विशेष निर्देश देने के बाद भी राजनीतिक चुनाव धार्मिक आयोजन पर लगाम नहीं लगाई गई अब ऐसे समय में दोष किसको दिया जाए जान है तो जहान है अपने देश के लोग खुशी हो तभी देश महान है 🎯
बुधवार, 21 अप्रैल 2021
कोरोनावायरस में महामारी काल में डर भरे माहौल में अभिताभ बच्चन की आवाज में प्रेरणा देने वाली कविता
बुरा वक्त ही तो है गुजर जाएगा फिर से अच्छा बक्त आएगा
शनिवार, 17 अप्रैल 2021
देश के उद्योगपतियों को आगे आकर कोरोना वायरस महामारी में उपयोग होने वाली दवाएं इंजेक्शन वेंटिलेटर निशुल्क उपलब्ध कराकर लोगों को इस महामारी से उभरने में सहयोग करने की जरूरत
🐉कोरोनावायरस ☠️महामारी के संक्रमण से भयानक होते माहौल में सबसे ज्यादा कमी महसूस की जा रही है तो वह है यह रेमडेसिवरी इंजेक्शन वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन की जिसके डोज से काफी हद तक कोरोना वायरस के विभिन्न स्टेज के मरीज को राहत प्रदान की जाती है वर्तमान समय में पूरे देश भर में यह रेमडेसिवरी इंजेक्शन कालाबाजारी के कारण चर्चित है हॉल सेल बाजार में मात्र हजार रुपए का आने वाला इंजेक्शन 15000 से लेकर ₹30000 तक में बेचा जा रहा है फार्मा सेक्टर के बारे में पिछले वर्ष बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है और भारत के पास इतनी क्षमता है कि वह है विश्व भर के लोगों को राहत प्रदान कर सकता है लेकिन वर्तमान में एक प्रदेश दूसरे प्रदेश को भी यह इंजेक्शन सप्लाई करने दे मैं हाथ खड़े कर रहे हैं जिस तरीके से हालात एकदम से बेकाबू हुए हैं उससे लोगों में दहशत का माहौल है क्योंकि देश की चिकित्सा व्यवस्था चरमराने की कगार पर है अपने टेलीविजन पर पिछले वर्ष कई देशों के हालात देखकर लोग चर्चा करते थे अब वही हालात हमारे देश में भी बनती दिखाई दे रहे हैं ऐसे समय में लोग अपने हाल पर जीवन और मृत्यु से जूझ रहे हैं ऐसे समय में प्राइवेट हॉस्पिटल और दवाओं की कालाबाजारी लोगों के कारण मानवता का क्रूस चेहरा उजागर हुआ है ऐसे समय में बड़े-बड़े उद्योगपतियों को आगे आकर लोगों को इस प्रकार की दवाएं और इंजेक्शन निशुल्क मुहैया कराने के लिए कार्य करने की जरूरत है क्योंकि यदि देश के हालत जरूरत से ज्यादा बिगड़ेंगे तो सबसे ज्यादा लोगों का गुस्सा सरकार एवं उद्योगपतियों पर ही फूटेगा 🎯
बुधवार, 14 अप्रैल 2021
प्रत्येक सर्दी जुखाम खांसी 🐉कोरोनावायरस संक्रमण नहीं होता
☠️डर के आगे जीत है? वर्तमान समय में फैली महामारी से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है महामारी जितनी बड़ी है उससे बड़ा प्रचार प्रसार और प्रोपेगेंडा जिसके तहत अनजाने में ही लोग मनोरोगी बन रहे हैं प्रत्येक वर्ष चैत माह मैं वायरल सर्दी जुखाम बुखार दस्त होना आम बात लेकिन हर तरफ कोरोना वायरस महामारी के डर से लोग अनजाने में अपने होने वाले आम सर्दी जुखाम फीवर को भी कोरोनावायरस का संक्रमण समझ रहे हैं और अंदर ही अंदर घुटन के कारण लो बीपी हाई बीपी हार्ड की समस्याओं और गर्म तासीर के काढ़ा जरूरत से ज्यादा गरम पानी पीकर अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं कोरोनावायरस महामारी से सुरक्षा जरूरी है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है अपने अंदर आत्मविश्वास लाना कि हम किसी प्रकार के वायरस से लड़ सकते हैं और हमारा शरीर इतना परिपक्व है की हम कुछ दिनों में सही हो जाएंगे इसी सोच को लेकर हम महामारी पर और इस मानसिक बीमारी पर जीत हासिल कर सकते हैं कोरोनावायरस महामारी से मरने वालों में सबसे अधिक संख्या उन लोगों की है जो पहले से ही विभिन्न बीमारियों से ग्रसित रहे और कोरोना वायरस के डर से हार्ड फेल एवं जीवन जीने की आस को छोड़ देने वाले ही लोग ज्यादा है जिन्हें भी कोरोनावायरस का संक्रमण हुआ है उन्हें एक पॉजिटिव सोच रखनी बेहद जरूरी है तभी हम इस बेहतर जीवन को और बेहतर बना सकते मानसिक तनाव को कम करें टीवी कम देखें हल्का-फुल्का व्यायाम करें प्राणायाम करें फीवर सर्दी जुकाम होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल विटामिन सी की दवा का यूज़ करें स्वस्थ एवं सात्विक भोजन करें और अपने आप को विश्वास दिलाय कि हम यदि संक्रमित हो जाएंगे तो स्वस्थ भी हो जाएंगे स्वस्थ निर्देशों का पालन करते हुए घर पर रहें सुरक्षित रहें। 🙏धन्यवाद 💐💐
सोमवार, 12 अप्रैल 2021
आम जनमानस के लिए नासूर बन चुकी दवा कंपनियों की कमीशन खोरी की इस व्यवस्था को बदलने की अति आवश्यकता है
🤔आखिर कब तक चलेगी देश में इस प्रकार की लूट भ्रष्टाचार मिटाने की बाते तो बड़े-बड़े मंचों लाल किले संसद भवन से की जाती है लेकिन वास्तविक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान उन्हीं लोगों का है जो इस प्रकार के लूट का खसोट षड्यंत्रकारी कार्य कराने में बड़ी-बड़ी कंपनियां का सहयोग करते हैं आज भारत देश में चिकित्सा पद्धति पूरी तरीके से व्यापार बन चुकी है जो डॉक्टर दवा कंपनी भगवान का रूप माने जाते थे वह साक्षात मौत के सौदागर बन गए हैं लोग जानते हुए भी कि सामने वाला हमें लूटने के लिए बैठा है फिर भी लूटने के लिए मजबूर है दवा कंपनियों की लूट का आलम यह है कि किसी दवाई का मूल्य उसके तय मूल्य से हजार गुना से भी अधिक बढ़ाया जा सकता है जो दवा कंपनियों की इस कमीशन खोरी को जानता है वह तो रेट कम करा लेता है लेकिन जो गरीब आम व्यक्ति है वह हमेशा कथित लूट का शिकार होते हैं अब सवाल यह है हमेशा आम जन हित की बात करने वाली सरकारे कई दशकों बाद भी जन हित में अंतर्राष्ट्रीय दवा कंपनियों के इस मायाजाल को तोड़ने के लिए विशेष कानून लाकर नीति निर्धारण करके एक सीमित मार्जन पर दवाइयां बेचने के लिए दवा कंपनियों को कानूनी रूप से बाध्य क्यों नहीं करती सोचने का विषय है 🎯 ✍️ आवाज एक सच्चाई की
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