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निष्पक्ष पत्रिका · AI टूल्स डायरेक्टरी · संपादक: रविंद्र साहू
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शनिवार, 9 मई 2020

एक बगल में 🌝चांद होगा 🛠️एक बगल में 🍪रोटियां @🇮🇳पलायन एक आशा या निराशा

 कोरोनावायरस से फैली महामारी के कारण एक और दर्दनाक दुखद मानवीय संवेदना को झकझोर देने वाली घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद में घटित हुई जिसमें प्रवासी मजदूर लगभग 6 सप्ताह से लॉक डाउन हटने का इंतजार करने के बाद अपने घर पहुंचने की आशा लिए  भूखे प्यासे सूखी रोटियां के साथ  राज्य एवं केंद्र सरकार के बीच में फिटबॉल बन चुके यह प्रवासी मजदूर सरकारों की लोगों को  उनके घरों की ओर भेजने की घोषणा होने के बाद आशा लेकर विभिन्न स्टेशनों पर पहुंचना शुरू हुए क्योंकि  महामारी बंदी के कारण विभिन्न यातायात के साधन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित थे एवं जितनी भी बचत पहुंची थी वह खत्म हो चुकी थी फैक्ट्री के मालिक से लेकर मकान मालिक अपने अपने तरीके से प्रवासी मजदूरों पर पलायन के लिए दबाव बना रहे थे इस कारण विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने  परिवार के साथ रेल की पटरी के सहारे बड़े स्टेशनों के लिए निकल पड़े उन्हें आशा थी के वहां से उनके कई सैकड़ों किलोमीटर दूर गांव के लिए ट्रेनों में सरकार उन्हें भेजने की व्यवस्था करगी उन्हें क्या पता था की रेल लाइन पर चलते चलते बुद्ध पूर्णिमा पूनम की यह रात उनके लिए अंतिम रात होगी और  मौत मालगाड़ी का रूप बनकर अपने आगोश में ले लेगी

क्योंकि पूरे देश भर के रेलवे द्वारा ऑपरेशन अति शीघ्र चलाया जा रहा है जिसमें सभी गाड़ियां अपनी मानक समय स्पीड यानी के फुल स्पीड में चलाए जा सही हैं इसके लिए विभिन्न रेलवे में पहले से ही दिशा निर्देश दे दिए गए लोको स्पेक्टर इसकी निगरानी कर रहे हैं इसका प्रमुख उद्देश्य सही समय पर राहत सामग्री एवं लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था से है जब गाड़ियां अपनी फुल स्पीड में होती हैं तो हर प्रकार के ब्रेक लगाने के बाद भी गाड़ी को लगभग आधा किलोमीटर से भी अधिक दूरी की आवश्यकता होती है जिससे वह पूर्ण रूप से रोकी जा सके रेलगाड़ी  का कोई भी ड्राइवर एवं कर्मचारी कभी नहीं चाहता कि उससे किसी भी प्रकार की घटना घटित हो जिससे उसके दामन पर दाग लगे उसके साथ उसके परिवार एवं समाज के लोगों में उसकी छवि धूमिल हो हर तरीके से बचाने के बाद भी यह दुर्घटना टालने में ट्रेन के ड्राइवर एवं सहायक नाकाम हुए  विभिन्न न्यूज़ चैनलों द्वारा एवं सूत्रों द्वारा बताया गया कि सभी मजदूर रेल की पटरी पर सो रहे थे अगर इस प्रकार का साक्ष रेलवे द्वारा संज्ञान लिया जाता है तो उसमें मुआवजे में इन मजदूरों के परिवारों को दिक्कत आ सकती है रेल नियम अनुसार रेलवे ट्रैक पर किसी प्रकार की गतिविधि रेल कानून तोड़ने के रूप में मानी जाती है जिसके लिए रेल लॉ एक्ट मैं विभिन्न प्रकार की कानूनी प्रावधान हैं  घटनास्थल पर  पड़ी सूखी रोटियां पलायन की मजबूरी को दिखा रहा है

कि लोग 2 जून की रोटी के लिए अपने घर परिवार से हजारों किलोमीटर दूर संघर्ष करते-करते यूं ही मर जाते हैं वही कुछ लोग हजारों करोड़ों रुपए का घोटाला करके जिंदगी मजे से काटते हैं   मानवता को शर्मसार कर देने वाली 2 जून रोटी के लिए पलायन उसके बाद  संघर्ष करते-करते अपनी जिंदगी को यूं ही लूटा देना जिंदगी कितनी सस्ती होती है ऐसी घटनाओं से  मानवता के असंतुलित बेरहम चेहरे नजर आते है लगभग दर्जन लोग मृत्यु एवं गंभीर रूप से घायल हो चुके   विभिन्न न्यूज़ चैनल एवं समाचार पत्रों  अपने तरीके से अपने आकाओं के अनुसार कवरेज को अंजाम दिया जा रहा है कुछ न्यूज़ चैनल इस घटनाओं को दिखाने की जगह अपना पुराना एजेंडा भारत-पाकिस्तान को दिखाने में कि भारत देगा पाकिस्तान के मौसम की जानकारी मैं लगे हुए हैं प्रत्येक घटना के राज्य सरकार   केंद्र सरकार एवं विभिन्न संस्थान इन मजदूरों के लिए मुआवजा की घोषणा करेंगे लेकिन अभी तक के इतिहास से यह कह पाना मुश्किल है कि इन मजदूरों के परिवार तक संवेदना प्रोत्साहन राशि पहुंच पाएगी या नहीं कहीं ना कहीं देशभर में फंसे हुए लोगों  मजदूरों तीर्थयात्रियों छात्रों के लिए रणनीति बनाने में सरकार से चूक हुई है लॉक  डाउन के शुरुआती चरण में जब विभिन्न देशों में भारतीय लोगों को देश में लाने की बात चली तो विभिन्न प्रकार की एयरलाइंस कंपनी अपने अपने तरीके से घोषणा करने लगे क्या हुआ थे कि विदेशों से लोगों को अपने एयरलाइंस कंपनी द्वारा शीघ्र से शीघ्र भारत में ला सकती हैं लेकिन देश के ही एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक गरीब मजदूरों को पहुंचाने के लिए किसी भी प्रकार की कंपनियों द्वारा घोषणा नहीं की गई विभिन्न प्रकार की ऑफर उपलब्ध कराने वाली एयरलाइंस कंपनियां जो कि मात्र हजार ₹700 में देश के एक कोने से दूसरे कोने की यात्रा करा दिया करती  थी अब जब पूरे विश्व में तेल सस्ता है विश्व भर की सभी एयरलाइंस जमीन पर खड़ी हैं और अपने हो रहे घाटे को दिन प्रतिदिन सरकार को बतला कर अपने कर्ज माफी की याचना करने के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किए हुए फिर इस भीषण प्राकृतिक महामारी में उन सभी कंपनियों द्वारा अपने आप को अलग करना क्यों  उचित समझा वहीं रेल द्वारा भी घोषणा करने के बावजूद लोगों से टिकट के पैसे वसूलने की घटना कहीं ना कहीं देश को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की गई एक अमीरों वाला देश एक गरीब मजदूरों वाला देश उद्योगपतियों का कर्जा माफ या बट्टे खाते में डालने जैसी घटनाएं कहीं ना कहीं उस किसान और मजदूर की जेहन में तीर की तरह चुभ रही है जिसके मात्र पांच ₹10000 के कर्जे के लिए उसकी जमीन और ट्रैक्टर नीलाम किया जाता था विभिन्न प्रकार के औद्योगिक संस्थानों के मालिकों द्वारा अपने पावर का फायदा उठाकर महामारी से बचाव के लिए पलायन कर रहे मजदूरों को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए लेबर कानून को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है कुछ दिन पूर्व एक फैक्ट्री के गैस प्लांट अकेली हो ने के कारण हजारों लोग बीमार पड़ गए लगभग एक दर्जन लोगों की मृत्यु हो गई ऐसी घटनाओं में 4 दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात 2 दिन मीडिया चिल्लाएगी तीसरे दिन से घटना के साथ सभी मांगो एवं जांचों का वजूद  खत्म हो जाता है बीमा कंपनी भी अपने हाथ खड़े कर देती हैं जांच कमेटी भी अपनी रिपोर्ट को फैक्ट्री मालिकों के हिसाब से बना देते हैं देश का क्या होगा यह तो पता नहीं लेकिन शोषण हमेशा गरीब का होता ही रहेगा

रविवार, 3 मई 2020

@ ना आना अभी हमारे देश# ☠️ दम तोड़ता पर्यटन उद्योग

विश्व भर में महामारी बन के कोरोनावायरस ने पूरे विश्व का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है इसके कारण विश्व भर में खाद्य पदार्थ दवाइयां एवं जरूरी संसाधन के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है आने वाले समय में से भारी आर्थिक उथल-पुथल पूरे विश्व भर में हो सकती है भारत में भी इसका असर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा सबसे अधिक भारत के पर्यटन उद्योग की कमर टूटने वाली है क्योंकि प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व भर से देश के पर्यटक स्थलों को देखने के लिए लाखों की संख्या पर्यटक आकर यहां पर लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते थे पर्यटन उद्योग के लिए बड़े-बड़े उद्योग समूह द्वारा भारी भरकम इन्वेस्ट करके रखा था देश की जहां तक पर्यटन स्थल रेल मार्ग यातायात मार्ग वायु मार्ग से जुड़े हुए हैं विभिन्न लग्जरी वाहनों के साथ विश्वस्तर की डेकोरेट इंपोर्टेड सामानों से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कराया जाता था भारत के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को देखने के लिए पूरे विश्व भर से लोग भारत की ओर खींचे चले आते थे लेकिन वर्तमान में पूर्व विश्व में फैली कोरोनावायरस विचित्र बीमारी के कारण कहीं ना कहीं पूरे विश्व भर के लोगों  में दूरियां बढ़ चुकी हैं सोशल डिस्टेंस जैसे शब्द लोगों की दिनचर्या में स्थान बनाने लगे इसके कारण पूरे विश्व भर में लोगों में विश्व पर्यटन के लिए अवधारणाएं पूरी तरह से बदल चुकी हैं आर्थिक महामारी बन के आई यह बीमारी से पूरे विश्व भर में करोड़ों की संख्या में लोगों का रोजगार छिन चुका है लोगों को जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ेगा लाखों की संख्या में विश्व के सबसे बड़ी आर्थिक महा शक्तियों वाले देशों के लोगों की लाखों की संख्या में जान गंवानी पड़ रही है इस स्थिति में भविष्य में पर्यटन उद्योग को बढ़ने की कल्पना करना सपने जैसा होगा इस उद्योग पर निर्भर लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार होकर कहीं ना कहीं अपने जीवन के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे देश के विकास मैं बहुमूल्य योगदान देने वाले पर्यटन उद्योग को औद्योगिक दिशा में मोड़ कर कहीं ना कहीं इसका लाभ उठाया जा सकता है क्योंकि संसाधनों से युक्त पर्यटक क्षेत्रों में औद्योगिक इकाई स्थापित करने में जाना कठिनाइयां नहीं होगी देसी विदेशी निवेश पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा संसाधन युक्त पर्यटक क्षेत्रों में सरकार थोड़े से ही प्रयास में अधिक लाभ उठाकर कहीं ना कहीं लाखों की संख्या में बेरोजगार होने वाले लोगों को राहत प्रदान कर सकती हैं|भारत सरकार के साथ राज्य सरकारों को विशेष कार्य योजना बनाकर आर्थिक पैकेज में इन क्षेत्रों को विशेष महत्त्व देकर अति शीघ्र विश्व भर मैं आर्थिक उथल-पुथल का लाभ उठा सकती हैं

बुंदेलखंड के लिए वरदान साबित हो सकता है कोरोना वायरस

पूरे विश्व में इतिहास की सबसे बड़ी भयानक महामारी का रूप ले चुके कोरोनावायरस से अब तक लाखों की संख्या में लोग अपनी जान गवा बैठे हैं एवं  पूरे विश्व भर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है आज   फिर से  देशभर में लॉक डाउन को दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया  है पूरा विश्व भर के देश वर्तमान समय मैं दवा भोजन एवं राहत सामग्री के लिए एक दूसरे देशों के मुंह ताक रहे हैं विश्व भर का एक बड़ा हिस्सा घरों में कैद होकर रह गया  इस महामारी के कारण पूरे विश्व भर में व्यापारिक आर्थिक सामाजिक लाभ लेने के कारण कहीं  ना कहीं पूरे विश्व भर में चीन देश की छवि एक मौकापरस्त एवं लालची देश की बन चुकी है विश्व के प्रमुख देशों ने चीनी सरकार से कोरोना वायरस के कारण हुए नुकसान का हर्जाना मांगा जा रहा है विश्व में चीन को अलग-थलग करने की विश्व के देशों द्वारा एकजुटता  की आशंका जताई जा रही आने वाले समय में चीन में औद्योगिक इकाइयां लगाकर व्यापार कर रही विश्व भर की हजारों कंपनियां अपने व्यापार को उठाकर कहीं दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए मजबूर हैं विभिन्न आर्थिक महाशक्ति कहलाने वाले देशों ने अपने अपने देश की कंपनियों से चाइना जैसे मौकापरस्त देश से अपने व्यापार को अलग करने के लिए दिशा निर्देश देना चालू कर दिया है विभिन्न देशों द्वारा चीनी निवेश को प्रतिबंधित कर के आने वाले भविष्य में चीन के प्रति किसी प्रकार की रियायत नहीं देने का स्पष्ट संकेत दे दिया हैजिस प्रकार भारत द्वारा विश्वसनीय रूप से पूरे विश्व भर में राहत सामग्री दवाइयां एवं खाद्य पदार्थ भेज कर पूर्व से चली आ रही विश्व बंधुत्व की भावनाओं को बनाए रखा उससे विश्व भर में भारत की छवि एक ईमानदार राष्ट्र के रूप में फिर से उभरी हुई है आने वाले समय में हजारों की संख्या में कंपनियां भारत में उद्योग लगा सकती हैं जिस प्रकार देशभर के बड़े महानगरों से इस महामारी में कामगार मजदूरों का पलायन हुआ एवं अभी भी लाखों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं महानगरों में जनसंख्या घनत्व भी अत्यधिक विस्फोटक  रूप तक पहुंच रहा है उससे आने वाले भविष्य में भारत में उद्योगों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा जहां श्रमिकों की संख्या एवं भूमि के साथ संसाधन उपलब्ध हो ऐसी जगह औद्योगिक इकाइयां स्थापित कराने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकारें कार्य करेंगे आने वाले समय में देश के सबसे पिछड़े कहलाने वाले

बुंदेलखंड उड़ीसा झारखंड छत्तीसगढ़ पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश से औद्योगिक इकाइयां लगाकर विश्व व्यापार को संतुलन में लाने की कोशिश की जाएगी इस कारण इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह महामारी कोरोना जैसीघातक बीमारी भविष्य में वरदान बनकर कार्य कर सकती है आपको बता दें पूरे देश भर में मध्य में स्थित बुंदेलखंड क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है इसकी पिछड़ेपन को अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर के नेताओं द्वारा एवं मीडिया के माध्यम से उठाया जा चुका है अनेकों बार पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर विभिन्न प्रकार के आंदोलन होते रहे बुंदेलखंड प्रसिद्ध खजुराहो ओरछा  विदेशी पर्यटकों के लिए केंद्र बिंदु बने हुए थे लेकिन कोरोना जैसी बीमारी से अब आने वाले भविष्य में पर्यटन उद्योग फिर से उठ पाएगा यह कहना सही नहीं बुंदेलखंड का यह क्षेत्र पठारी होने के कारण सस्ती श्रम शक्ति भूमि सस्ते संसाधन होने के कारण उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में आर्मी एवं रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क होने के  कारण सुरक्षित एवं संरक्षित है यहां इलेक्ट्रॉनिक फूड इंडस्ट्रीज सोलर एनर्जी खनिज संसाधन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज ग्रेनाइट उद्योग के साथ अनेक प्रकार के औद्योगिक इकाई लगाने के लिए अनुकूल है भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुछ वर्ष पूर्व से यहां पर डिफेंस कॉरिडोर की योजना को लेकर काफी कार्य किए जा रहे हैं अगर डिफेंस कॉरिडोर में विश्व भर की इकाइयों को समायोजित करके एक बड़ी कार योजना स्थापित की जाए तो आने वाले 10 वर्षों में यह पूरा क्षेत्र विश्व भर में उभर कर आ सकता है आपको बता दें यह आगरा भोपाल कोटा इलाहाबाद कानपुर एवं जबलपुर जैसे देश के बड़े शहरों के मध्य बसा हुआ है इनके आसपास खनिज पदार्थों की अपार संपदा छुपी हुई है बुंदेलखंड पूरे देश भर से रेल के माध्यम से जुड़ा हुआ है यहां किसी भी स्थिति में देशभर के किसी भी कोने में 24 घंटों के अंदर जाया जा सकता वर्तमान में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के मध्य स्थित बुंदेलखंड के लिए अनुकूल स्थिति है क्योंकिकेंद्र एवं मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश तीनों स्थान पर एक ही पार्टी की सरकार है जिस कारण आर्थिक निर्णय लेने में किसी प्रकार की परेशानी की संभावना बेहद कम है भारत सरकार एवं राज्य सरकार से अनुरोध है कि विश्व भर से आने वाले औद्योगिक निवेश मैं बुंदेलखंड को केंद्र में रखकर कार्य योजना बनाई जाए जो भविष्य में देश के साथ पूरे विश्व के लिए हितकर रहेगा क्योंकि यह क्षेत्र पूरी तरह से भूकंप बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटनाओं से पूरी तरह से सुरक्षित एवं महफूज है बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े सभी राजनैतिक आराजनैतिक  युवा किसान व्यापारी वकील पत्रकार मजदूर छात्र साथियों से निवेदन है की औद्योगिक विकास एवं इकाई लगाने के लिए एक विशेष मुहिम चलाकर बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को सामने रखकर इस क्षेत्र के विकास के लिए आंकड़े जुटाने की कृपा करें जिससे इस क्षेत्र का भला हो सके हमें पता है कि कोरौना जैसी घातक बीमारी पूरे विश्व के साथ भारत के लिए भी एक चुनौती का विषय है लेकिन हर एक रात के बाद सुबह जरूर होती है आज नहीं तो कल हम सभी इस घातक वायरस से लड़कर इस पर विजय प्राप्त करके रहेंगे |   

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

रेल को टारगेट बनाकर युवा कर रहे हैं जीवन से खिलवाड़ वीडियो फोटो से जांदा कीमती मनुष्य जीवन है

पिछले दिनों यह वीडियो पूरे देश भर में वायरल हुआ जिसमें एक युवा द्वारा यूट्यूब वीडियो बनाने के लिए आती हुई ट्रेन के बगल में खड़े होकर चलते हुए बिना किसी गति एवं दूरी का अनुमान लगाकर जिस कारण ट्रेन का पार्ट उस युवक ने टकराता है और वह दूर जाकर गिर जाता है मुझे पता नहीं क्यों है इस दुनिया में है या नहीं लेकिन ऐसे हादसे कहीं ना कहीं उस युवा के परिवार एवं रेल गाड़ी चला रहे चालक एवं सहायक चालक एवं आसपास तैनात रेल कर्मचारियों के लिए जीवन भर के लिए   टीस दे जाते हैं की कहीं ना कहीं वह सोचती है कि  मैं शायद उसे बचा सकता था और सतर्कता ना बरतने के कारण यह दुर्घटना हुई थी आए दिन रेल के संबंध में ऐसी घटनाएं आती रहती है जिसमें नवयुवक  एवं व्यक्ति परिवार की समस्याओं से जूझ कर  ट्रेन के आगे आकर अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं जाने वाला तो चला जाता है लेकिन कहीं ना कहीं कई लोगों के दिमाग में एक सदमा जैसा दे जाता चालक एवं सहायक चालक के साथ रहने वाले गार्ड उस एरिया में काम करने वाले पॉइंटमैन लाइनमैन एवं गेटमैन कहीं ना कहीं घटित होने वाली दुर्घटना के बाद काफी दिनों तक सदमे में रहते हैं  एवं उनके लिए कुछ घटनाएं याद के रूप में बड़ी दुखद यादें दे जाती है परिवार के साथ एवं खाना खाने के समय पूजा करने के समय उसे वही दृश्य घूमता रहता है पता नहीं किन परिस्थितियों में लोग जीवन से तंग आकर ऐसे अपराधिक निर्णय ले लेते हैं जिसकी भरपाई करना उनके परिवार के लिए बड़ा ही असंभव कार्य होता है आए दिन रेलवे की  विद्युत लाइन ओ एच ई को पकड़कर जल जाने की घटनाएं होती रहती है ओ एच ई का करंट इतना हाई होता है की छूते ही संबंधित व्यक्ति के पूरे शरीर को पल भर में जला देती है लोगों द्वारा कई तर्क दिए जाते हैं दिमागी रूप से कमजोर व्यक्ति तार को पकड़ते लेकिन समझ में नहीं आता आखिर लोग रेल को ही क्यों टारगेट बना रहे हैं धीरे धीरे आत्महत्याओं करने का सबसे आसान तरीका रेलवे बनता जा रहा है लोगों को पता भी है की ऐसी दुर्घटनाओं में रेल प्रशासन संबंधित व्यक्ति के परिवार को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं देती फिर भी लोग रेलवे को टारगेट करते हैं आपको बता दें की कटकर रेल दुर्घटना होने के बाद अनेक प्रकार की फॉर्मेलिटी पोस्टमार्टम होने के उपरांत ही संबंधित दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के शव को उनके परिवार को सौंपा जाता इस प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा समय लग जाता है इस प्रक्रिया में संबंधित रेल कर्मचारियों के साथ व्यक्ति के परिवारिक सदस्यों को जो पीड़ा एवं तनाव झेलना पड़ता है उसकी कल्पना करना असंभव है जीवन जैसी अमूल्य निधि की महत्ता को समझते हुए रेल प्रशासन एवं रेल कर्मचारियों द्वारा विशेष प्रयास किए जाते हैं कि किसी भी प्रकार की दुर्घटनाएं ना घटित हो जिससे जेल प्रशासन पर एवं कर्मचारियों पर किसी भी प्रकार का दाग लगे भारतीय रेल द्वारा समय-समय पर लोगों को अनेक प्रकार से जागरूक किया जाता है की जितना हो सके रेल लाइन से  दूर  रहे एवं ट्रैक को पार करते हुए किसी प्रकार के मोबाइल एवं गैजेट का प्रयोग ना करें एवं  मोबाइल फोन से वीडियो फोटो खींचने के लिए अपने जीवन को जोखिम में ना डालें वाहन को गेट बंद होने के बाद जबरदस्ती  रेल लाइन से निकालने की कोशिश ना करें जैसे अनेक प्रकार के कारण जो दुर्घटना का कारण बनते हैं रेल प्रशासन एक मोटी राशि खर्च कर लोगों को जागरूक करने का कार्य करती है उसके बाद भी इस प्रकार की दुर्घटनाएं कहीं ना कहीं लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त ना होने का कारण हो सकती है जीवन अमूल्य है जीवन का मूल्य उनसे पूछिए जो एक किडनी एक आंख बिना हाथ पैर गंभीर बीमारी से ग्रसित होकर एक-एक दिन ईश्वर से दया के रूप में मांगते हैं फिर क्यों व्यक्ति छोटी-छोटी मानसिक समस्याओं एवं लापरवाही मैं जीवन को दांव पर लगा देते कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिन्हें माफ करना भगवान के लिए भी असंभव हो जाता है रेल  से दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बचने वाले लोगों का हाल भी बहुत बुरा हो जाता है इसीलिए सभी  छोटे बड़े भाई बहन एवं अन्य समस्याओं से ग्रसित लोगों से निवेदन है जीवन में भगवान ने भी संघर्ष  किया हम तो मात्र इंसान हैं मनुष्य जीवन का नाम ही संघर्ष होता है सभी के जीवन में संघर्ष आता है एवं दुख के बादल छठते भी हैं अच्छे समय का इंतजार कीजिए आत्म संतोष रखिए आज नहीं तो कल आप जीवन में जरुर सफल होंगे असफलता ही सफलता की कुंजी होती है खुश रहे अपने एवं अपने परिवार का ख्याल रखें सुरक्षित रहें संरक्षित रहें

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

1857 की क्रांति की प्रथम दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई जन्मदिन विशेष

देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति की प्रमुख  लीडर महारानी  लक्ष्मीबाई जी का जन्म आज पूरे विश्व भर में मनाया जा रहा है वीरता ऐश्वर्या नेतृत्व क्षमता परिवारिक संरक्षण घुड़सवारी युद्ध कौशल जैसे अनेक क्षमताओं से दक्ष महारानी लक्ष्मी बाई देवता का पर्याय मानी जाती थी लॉर्ड डलहौजी की राज्य हड़प नीति के माध्यम से देश की अनेकों रियासतों को अंग्रेजी शासन में शामिल करने के लिए किए गए कुचक्र के विरोध में रानी लक्ष्मीबाई द्वारा अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक कर देशभर में फैली अंग्रेजों के प्रति धधकती ज्वाला को तीव्र किया था एवं अनेक क्रांतिकारी गुटों का नेतृत्व कर कर विश्व भर के  देशों का ध्यान भारत की तरफ आकर्षित कराया था रानी लक्ष्मीबाई देश के लिए लड़ते लड़ते अपनी जान निछावर कर गई महारानी लक्ष्मी बाई जी के जन्मदिन पर हम सभी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं रानी लक्ष्मी बाई के जीवन पर महान कवित्री सुमित्रा कुमारी चौहान जी द्वारा लिखित  विश्व प्रसिद्ध कविता                                                         सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

वीर शिवाजी की गाथायें उसको याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़।

महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आयी थी झांसी में।

चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।

निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।

रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात?
जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।

बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
'नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।

यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी,

जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में।

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,

दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।

तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

जीने के लिए भोजन जरूरी है पैसा ही सब कुछ नहीं होता



भागदौड़ भरी जिंदगी में रुकना मना है पैसा है परिवार है इज्जत है सम्मान फिर भी कभी-कभी हम भूखे रह जाते ऐसी ही जिंदगी है कुछ देश की कठिन नौकरियों की जिनमें देश की सरहद पर रक्षा करने वाला फौजी रेल में दिन-रात सर्दी गर्मी कोहरा सब  का डटकर मुकाबला करने वाले रेल के कर्मचारी लोको पायलट एवं गार्ड अनेकों सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के कर्मचारी  जोकि भागते दौड़ते अपनी मंजिल  पर पहुंचने की आपाधापी मैं भूखे रह जाते हैं उन्हीं को भोजन डिलीवरी करते हुए बनाई गई कुछ सेकेंड की वीडियो  देखकर  सच में  आंसू आ जाएंगे वैसे तो देश में अनेकों विभाग एवं ऑफिस  विपरीत परिस्थितियों में कठिन एवं भागदौड़ भरा कार्य करते हैं उनमें से एक है भारतीय रेलवे कर्मचारी उनकी जागरूकता एवं सतर्कता से ही देश की लाइफलाइन भारतीय रेलवे दिन रात निरंतर चलती रहती है सबसे ज्यादा समस्या लर्निंग कर्मचारी को होती है ड्यूटी पर आने पर किसी प्रकार का कोई टाइम टेबल नहीं होता जिसमें मालगाड़ी की वर्किंग बड़ी ही कठिन होती है ड्यूटी आने के मात्र 2 घंटे पहले पता चलता है की आज कहां जाएंगे उसके बाद शुरू होता है उनका झटपट तैयार होकर नित्य क्रिया से निर्मित होकर अपने पूरे काम कर बैग में राशन पानी भर के दौड़ कर दो घंटे के अंदर ड्यूटी ऑन करनी पड़ती है रेलवे से संबंधित औजार किताबें पानी खाना कपड़े आदि से भरकर पूरा बैग फुल हो जाता है अगर किसी कारण बस घर पर खाने का इंतजाम नहीं हो पाया उस दिन भगवान भरोसे ही इनकी नौकरी चलती है मुंबई के डिब्बे वाले पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है जो कि मुंबई के अधिकतर ऑफिसों में खाना पहुंचाते हैं और लोगों को खाने के इंतजाम से पूरी तरह से टेंशन फ्री रखते हैं लेकिन देशभर में ऐसी व्यवस्था नहीं है लेकिन वर्तमान में जिस तरह से स्टार्टअप की वजह से शहरी क्षेत्रों में ओला जोमैटो जैसे सुविधा जनक संसाधन उपलब्ध होने से कहीं ना कहीं लोको पायलट  एवं गार्ड जैसी विपरीत परिस्थितियों वाली  नौकरियों में कहीं ना कहीं राहत मिली है किसी कारण बस खाना उपलब्ध ना होने के कारण पहले से ही संबंधित स्थान पर ऑर्डर बुक करा दिया जाता है तारीफ के काबिल है वह डिलीवरी ब्वॉय जो अपने कार्य में सक्रियता दिखा कर कहीं ना कहीं अपनी कंपनी एवं मानवीय कार्य को मजबूत बनाते हैं जोमैटो  जैसी कंपनियों में कार्य करके डिलीवरी करने वाले यह कर्मचारी जोकि कई लोगों के द्वारा धर्म और जाति का ईशु बनाकर बखेड़ा खड़ा कर देने से दुविधा में पड़ जाते हैं कहीं ना कहीं ऐसे अनेक लोगों के पास मुंह का निवाला लेकर पहुंच जाते हैं जिनके पास सब कुछ है पैसे इज्जत शोहरत सब कुछ लेकिन उनके पास उनका  किसी कारण बस भूखे रहने की  स्थिति  या मनपसंद खाना बनाने बनाने वाले एवं पहुंचाने वाले शायद पैसों की लिए कहीं दौड़ लगा रहे हैं कई ऐसे परिवार हैं जिनकी कई मंजिलों के ऊपर रिटायर्ड हो चुके जिनके  बुजुर्ग मां बाप के लिए यह डिलीवरी बॉय उनके  परिवार से भी बढ़कर है एक बात हमेशा ध्यान रखिए इंसान हमेशा भोजन खाता है ना कि पैसे जीवन के लिए पैसा ही सब कुछ नहीं होता कृपया भागदौड़ भरी जिंदगी में अपना एवं अपने परिवार का ख्याल रखें 

सोमवार, 4 नवंबर 2019

छठ का त्यौहार हिमालय स्वर्ग या स्विजरलैंड नहीं यह हमारी राजधानी दिल्ली की यमुना नदी है

सूर्य की उपासना का प्रमुख त्योहार छठ जो कि पूरे विश्व में पूर्वांचल एवं बिहार के लोगों द्वारा मनाया जा  रहा है साल दर साल बढ़ती इस पवित्र त्यौहार की लोकप्रियता को देखकर बड़ा ही आश्चर्य होता है प्रकृति के साथ जुड़ाव एवं अपनी मूल जड़ों की ओर लौटने वाला अपनी संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए प्रत्येक वर्ष दीपावली  के बात छठे दिन मनाए जाने वाली प्राकृतिक उपासना पर्व पर डूबते हुए सूर्य की उपासना की जाती है इस पर्व पर विश्व भर में फैले बिहार एवं पूर्वांचल छत्तीसगढ़ झारखंड जैसे अनेक उत्तर भारतीय क्षेत्रों के राज्यों में निवास करने वाले लोग अपने घरों में लौटते हैं एवं अपने परिवार के साथ इस पवित्र त्योहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं यह त्योहार वर्तमान नव पीढ़ी को प्रकृति के साथ जोड़ने एवं अपनी मूल जड़ों की ओर वापस लौटने का संदेश देता है आधुनिक हो चली दुनिया में शहरों में नदी तालाबों का हाल बद से बदतर होता जा रहा है
आने वाले भविष्य में बस किताबों में नदियां तालाब दिखाए जाएंगे पूरे विश्व भर में मनाए जा रहे इस त्योहार की तस्वीरें न्यूज़ चैनल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर में छाई हुई थी उसी बीच कुछ तस्वीरें दिल्ली के यमुना नदी से सूर्य उपासना करती महिलाओं की  तस्वीरें आनी चालू  हुई
लोग आश्चर्यचकित रह गए प्रथम दृष्टया स्वर्ग जैसी एवं  पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव  एवं पृथ्वी के स्वर्ग  स्विजरलैंड कश्मीर की भांति दिखने वाली यमुना नदी पर प्रदूषण से बने झाग कहीं ना कहीं रेगिस्तान में बनने वाले मृग मारीच जैसी अनुभूति लाने के लिए पर्याप्त  थे देश की प्रमुख नदियों में शुमार यमुना नदी जोकि भगवान श्री कृष्ण के कर्म स्थली एवं पांडवों की राजधानी के किनारे से बहने वाली प्रमुख नदी थी इस नदी का वर्तमान में यह आलम है कि यह मात्र एक बदबूदार नाला बन कर रह गई है जिसमें सैकड़ों की संख्या में कारखानों एवं  सीवर का पानी जमा हो रहा है जो कि वर्तमान  एवं आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा ही घातक सिद्ध होगा पूर्वांचल के लोगों द्वारा मनाया गया जाने वाला छठ का त्यौहार हम सभी मानव जाति को प्रकृति के इस पवित्र रूप नदियों एवं तालाबों की दुर्दशा को दिखला गया है एवं एक संदेश भी दे गया है कि आने वाले समय में देश एवं दुनिया के लिए बड़ा ही कठिन होने वाला है छठ का उपवास रहने वाली महिलाओं को इन बदबूदार नदी तालाबों में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते हुए देखना दिल को अंदर तक झकझोर देने वाला सीन था

जहां एक और स्वर्ग एवं बर्फीले क्षेत्र की अनुभूति देने वाली इस नदी के झाग में तमाम युवा सेल्फी लेकर आनंद ले कर टिक टॉक फेसबुक इंस्टाग्राम के लिए कलेक्शन बना रहे थे वही कुछ दार्शनिक एवं प्राकृतिक प्रेमी आने वाले भविष्य को देखकर व्यथित एवं चिंतित थे अनेक प्रकार के दिशा निर्देश एवं कार्य योजना बनने के बाद कई हजार करोड़ रुपए खर्च कर देने के उपरांत भी देश की नदी तालाबों की हालत बद से बदतर होती चली जा रही है जहां  देश में बढ़ गई भयंकर जनसंख्या एवं कम होते प्राकृतिक संसाधनों से लोगों  के जीवन को कठिन बना दिया है  विश्व की प्रमुख संस्थाएं इस भीषण समस्या से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही हैं वही हमारे देश में नदी  तालाबों कुओं के उत्थान एवं हालात को सुधारने के लिए होने वाले बजट में कमी की जा रही है जिसमें एक कारण सबसे अधिक भ्रष्टाचार का है विश्व की सबसे प्रमुख एवं पवित्र नदी गंगा के हालात सुधारने के लिए एक मोटा बजट जल संसाधन मंत्रालय को दिया गया था अनेक प्रमुख एजेंसी एवं विशेषज्ञों को गंगा उत्थान के लिए लगाया गया था सभी नदियों के बजट को अनदेखा कर गंगा के उत्थान में जितना बजट लगाया गया था उससे भी गंगा नदी के हालात जस के तस बने हुए हैं हमारे देश में राष्ट्रीय स्तर पर छठ जैसे पवित्र त्योहारों को भारत सरकार द्वारा मान्यता देनी चाहिए जिससे हमें भविष्य में इन प्राकृतिक स्त्रोतों को बेहतर एवं संभालने के लिए एक प्रेरणा मिल सके

अनेक संपन्न परिवार के लोगों द्वारा अपने घरों के पास ही गड्ढे खोदकर नदी एवं तालाबों का रूप देकर परिवार की महिलाओं को छठ के पवित्र त्यौहार पर सूर्य की उपासना करने के लिए विशेष प्रयास कराएं आने वाले समय में नदी एवं तालाबों की नाला बन  चुके हैं उनके पास भी खड़ा होना भी मुश्किल हो जाएगा पैर रखने की तो बात ही छोड़िए  आपको बता दें कि दिल्ली के यमुना के आसपास इसी नदी के पानी से अनेक प्रकार की सब्जियां एवं फल उगाए जाते हैं जो कि पूरे दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में धड़ल्ले से बेचे जाते हैं इस सब्जी एवं फलों में कहीं ना कहीं नदी में फैला घातक केमिकल एवं रसायन खाने के माध्यम से  हमारे शरीर में पहुंचकर हमारी आने वाली पीढ़ी को कमजोर करने का कार्य कर रही है जिसके भविष्य में बेहद घातक दुष्परिणाम सामने आएंगे केंद्र एवं राज्य सरकार एवं आम लोगों के साथ देश में सामाजिक कार्य कर रहे अनेक सरकारी एवं गैर सरकारी स्वयं सहायता समूह एवं संगठन युवा पीढ़ी जो कि मात्र सोशल मीडिया में खोई हुई है यह सब मिलकर विश्व स्तरीय कार्य योजना बनाकर देश की जीवनधारा नदियों को अपने मूल स्थिति में लाने के लिए प्रयास करें जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी भी अपनी आंखों से नदी तालाबों को देख सकें🎯🕊✍😢😢😢☠

शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

ओरछा सत्तार एक्सीडेंट की वीडियो देशभर में वायरल मध्यप्रदेश मना रहा है स्थापना दिवस

आज भारत  का प्रमुख राज्य मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया गया भारत के मध्य में स्थित होने के कारण इसका नाम मध्य प्रदेश रखा गया था पूर्व में इसके साथ छत्तीसगढ़ भी जुड़ा हुआ था लेकिन बाद में यह एक अलग राज्य बन गए मध्यप्रदेश बीमारू राज्य हुआ करता था लेकिन इसने अपने सीमित संसाधनों के बल पर एक संपन्न राज्य बनने का गौरव प्राप्त कर लिया मध्यप्रदेश में सांची के बौद्ध स्तूप खजुराहो का कजारिया महादेव मंदिर समूह पचमढ़ी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल है इस राज्य में बहने वाली नर्मदा बेतवा जामनी जैसी नदियां हैं
यहां सबसे अधिक तिलहन की पैदावार होती है जहां एक ओर पूरा मध्य प्रदेश अपने स्थापना दिवस को मना रहा था वही कुछ दिन पूर्व मध्य प्रदेश के ओरछा पर्यटन स्थल के पास सत्तार नाम के स्थान जहां  चंद्रशेखर आजाद द्वारा  अंग्रेजों से छुपकर  आजादी के लिए विशेष  संघर्ष छेड़ा हुआ था  उसी स्थान पर  छोटी एवं सकरी पुलिया पर हुए टेंपो एवं मारुति कार के एक्सीडेंट का वीडियो पूरे देश में वायरल हो रहा था जिसमें मारुति वाहन चालक की गाड़ी अन्य गाड़ी से टकराती हुई पुल के नीचे गहरे पानी में डूबने लगी गाड़ी में बैठकर यात्रा कर रहे परिवार एवं कुछ  माही के बच्चे को बचाने के लिए लोगों को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी आपको बता दें ओरछा के पास बेतवा पर बने हुए पुल एवं जामनी नदी पर बने हुए पलों को प्राचीन एवं छोटे सक्रिय होने के कारण बरसात के समय 4 माह के लिए परमानेंट बंद कर दिया जाता है एवं सकरी छोटी पुल के ऊपर हमेशा जाम लगा रहता है देश आजाद होने के 70 वर्षों बाद मध्य प्रदेश में स्थित यह बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल जहां  भगवान श्रीराम को राजा के रूप में  पूजा जाता है
प्राकृतिक सौंदर्य प्राचीन भव्य इमारतें  देखने के लिए  प्रत्येक वर्ष  हजारों की संख्या में देसी विदेशी पर्यटक आते हैं आज अपने बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है देश आजाद होने के पूर्व अपनी संपन्नता के लिए पूरे देश विदेश मैं पहचाना जाता था यहां के राजाओं द्वारा झांसी टीकमगढ़  जैसे आसपास कई शहर एवं   कस्बा को बसाया और वहां के किलो का निर्माण कराया था  यहां की राजा वीर सिंह  मुगल सम्राट जहांगीर के परम मित्र थे उनके नाम पर जहांगीर महल ओरछा में बनाया था 
जहांगीर की दोस्ती निभाने के लिए उन्होंने अकबर के नवरत्न में से एक रतन  को हमेशा के लिए ऊपर पहुंचा दिया था ऐसा था यहां का राजनैतिक एवं संपन्नता का वैभव लेकिन आजादी के बाद यहां के विकास के लिए कितनी योजनाएं बनी थी वह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाए राजा महाराजा  काल के  पुल सड़के एवं छोटे सकरी पुलिया से अब भी कार्य चलाया जा रहा है यहां पर राजनीति उद्योगपति एवं वीवीआईपी मूवमेंट हमेशा बना रहता है अनेक भारतीय फिल्मों की शूटिंग भी इस क्षेत्र में हो चुकी है
आध्यात्मिक नगरी होने के कारण तीज त्योहारों एवं पर्व पर यहां पर लाखों की संख्या में लोगों का आना आम बात लेकिन पुराने काल के पुल एवं छोटी सक्रिय सड़कें होने के कारण हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है जिससे बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पाठकों में ओरछा जैसे भगत एवं प्राकृतिक सौंदर्य युक्त ऐतिहासिक स्थान की छवि धूमिल होती है  देश में प्रमुख स्थान रखने वाला ओरछा  पर्यटन स्थल  जोकि  मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमा पर बुंदेलखंड के क्षेत्र में स्थित है भारत सरकार एवं  उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सरकार को  इस क्षेत्र के लिए एक विशेष कार्य योजना बनाकर कार्य कराना चाहिए जो कि भविष्य में यहां आने वाले देशी-विदेशी पाठकों के साथ आध्यात्मिक नगरी  के विकास के लिए नव निर्माण कार्य नींव का पत्थर बनकर उभरे यहां विकास की बहू मुखी योजनाएं सार्थक रूप से लागू हो जाए🎯✍🚩🚩🚩🚩🚩🚩🙏

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

रेलवे ऑन ड्यूटी यात्रा अथॉरिटी पास हुए चोरी मचा हड़कंप रेल यूनियनों ने बताया निजी करण का दुष्परिणाम

भारतीय रेल में वर्तमान समय मैं कुछ भी अच्छा  घटित नहीं हो रहा है रेल की प्रमुख यूनियने काफी समय से भारत सरकार द्वारा किए जा रहे रेल के निजीकरण के विरोध में मुहिम चला रही थी एवं भविष्य में होने वाले दुष्परिणामों के लिए रेल प्रशासन को आगाह भी कर रही थी इसी बीच एक ताजा मामला आया है जबलपुर रेलवे स्टेशन के लोको रनिंग लाॅबी का जहां पर क्रू कंट्रोलिंग लाॅबी में प्राइवेट कंपनी एवं ठेकेदार के कर्मचारियों को को  पास बनाने बुकिंग फोन करने एवं सफाई जैसे कार्यों के लिए लगाया गया था सभी को ज्ञात है कि जितने भी प्राइवेट कंपनियों एवं ठेकेदारों द्वारा प्राइवेट कर्मचारी लगाए गए हैं उनकी जो अनुबंधित सैलरी होती है उससे आधी भी उनके हाथ में नहीं पहुंच पाती है जिस एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से यह कर्मचारी लगाए जाते हैं वह इनकी मिलने वाली वेतन से अपना एक मोटा कमीशन निकाल लेता है कम पैसों में प्राइवेट कर्मचारी कहीं ना कहीं अपने आप को ठगा महसूस करते  हैं और उसकी पूर्ति करने के लिए कहीं से भी दाएं बाएं करके अपना बजट पूरा करने की कोशिश करते हैं उसी के दुष्परिणाम स्वरूप पश्चिम रेलवे के जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थित लोको रनिंग लॉबी की यह घटना सामने आई जिसमें महत्वपूर्ण अभिलेखों की देखभाल में तैनात प्राइवेट कर्मचारी द्वारा रेल के लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को  ऑन ड्यूटी  पास ड्यूटी के दौरान दिए जाने वाले अथॉरिटी पास की चोरी की गई यह मामला तब उजागर हुआ जब  लोको लॉबी सुपरवाइजर द्वारा लोको  पायलट एवं सहायक को दिए जाने वाले ड्यूटी के दौरान ट्रेन यात्रा के लिए रनिंग पास की बुकलेट का निरीक्षण करने पर उसमें से दो पास गायब मिले आनन-फानन में इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के साथ आरपीएफ को दी गई जब रेल विजिलेंस जांच दल द्वारा इस मामले की जांच की गई  तो सीसी कैमरे में यात्रा पास की चोरी करते हुए दो प्राइवेट कर्मचारी को देखा गया  इसके बाद  पूरी टीम द्वारा यात्रा पास चोरी करने वाले कथित प्राइवेट कर्मचारी को दबोचा गया एवं दूसरा बिहार भाग गया अब इन प्राइवेट कर्मचारी पर रेल प्रशासन क्या कार्यवाही करता है यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इस घटना से तमाम रेल कर्मचारियों के साथ रेल की यूनियनों द्वारा निजीकरण का विरोध तेज करने का मौका मिल गया है रेल कर्मचारी एवं रेल यूनियन  को भी ज्ञात  हैं कि  यह सब चोरी जैसी क्रियाकलाप मैं  परिस्थिति के मारे  इन प्राइवेट कर्मचारियों का कहीं ना कहीं ठेकेदार एवं  विभिन्न कार्य कराने वाली प्राइवेट संस्था के द्वारा शोषण किया जा रहा है उन्हें तय कीमत पर रखने के बाद भी उनके एटीएम एवं पासबुक के माध्यम से उनकी सैलरी निकलवा ली जाती है और उन्हें ऊंट के मुंह में जीरा जैसी  सैलरी पकड़ा दी जाती है विरोध करने पर नौकरी से निकाल कर किसी दूसरे को रखने  की धमकी दी जाती है ऐसी स्थिति में वह विरोध भी नहीं कर   पाते हैं कम सैलरी में उन्हें अपना घर परिवार चलाना बड़ा ही मुश्किल हो गया है अधिक लाभ कमाने  लालच एवं घर की जरूरतों की पूर्ति के लिए कहीं ना कहीं  प्राइवेट कर्मचारी भारतीय रेल के सुरक्षा एवं संरक्षा से बने हुए ताने-बाने से खिलवाड़   करते रहते हैं जिससे आने वाले समय में रेल सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनकर यह प्राइवेट कर्मचारी रेल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं एवं कोई भी अनहोनी घटना  होने पर क्योंकि यह कंपनी एवं ठेकेदार द्वारा लगाए गए होते हैं तो किसी भी कानूनी कार्रवाई से ठेकेदार एवं कंपनी अपना पल्ला झाड़ लेगी और दुष्परिणाम इन गरीब एवं परिस्थिति के मारे हुए कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा जोकि ठेकेदार द्वारा भविष्य में परमानेंट रेलवे में नियुक्ति होने का सब्जबाग दिखाकर एवं दलाली के तौर पर एक मोटी रकम जमा करने के बाद इन्हें  रेल के विभिन्न  स्थानों एवं कार्यों में प्राइवेट तौर पर रखते हैं सैलरी के नाम पर मात्र पांच से ₹7000 पकड़ा कर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं प्रशासन को इस प्रकार की भविष्य में होने वाली गड़बड़ी एवं सुरक्षा की अनदेखी को दूर करने के लिए प्राइवेटकरण पर सोच समझकर कदम उठाने चाहिए👮✍💣💣🙏🙏🙏🙏🙏

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

साहित्यकारों की चमत्कारी दूरदर्शिता संघर्ष के संदर्भ में

जब मैं कुछ इतिहासकार एवं साहित्यकारों को पढ़ता हूं तो हर बार मुझे कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलता है आज मेरे सामने मुंशी प्रेमचंद जी की एक कविता आ गई जिसे पढ़कर पता चला कि सच में कुछ चीजें इतने सालों के बाद भी आज भी जैसी की वैसी है इस भागदौड़ भरी जिंदगी में मुकाम को पाने की चाहत लिए कई पड़ाव को पार करता हुआ इंसान कहीं ना कहीं अपने दोस्त रिश्तेदार परिवार के लोगों के साथ अच्छे बुरे अनुभव प्राप्त करता है लेकिन लोगों में एक नजरिया होता है कौन कहां कब किस मोड़ पर गलत को सही साबित कर दें सही को गलत यह व्यक्तियों की सोच पर निर्भर करता है  उसी प्रकार की अधेड़ बुन में लिखी गई यह कविता सच में मुंशी प्रेमचंद जी के संघर्षों को बयां करती है लगभग हर व्यक्ति के संघर्ष से संबंधित  कुछ शब्द इस कविता से होकर  गुजरते हैं
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     *मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता*


_ख्वाहिश नहीं मुझे_
_मशहूर होने की,

        _आप मुझे पहचानते हो_
        _बस इतना ही काफी है._

_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा जाना मुझे,_

        _क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_
        _उसने उतना ही पहचाना मुझे._

_जिन्दगी का फलसफा भी_
_कितना अजीब है,_

        _शामें कटती नहीं और_
        _साल गुजरते चले जा रहें है._

_एक अजीब सी_
_दौड है ये जिन्दगी,_

        _जीत जाओ तो कई_
        _अपने पीछे छूट जाते हैं और_

_हार जाओ तो_
_अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं._

_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अकसर,_

        _क्योंकि मुझे अपनी_
        _औकात अच्छी लगती है._

_मैंने समंदर से_
_सीखा है जीने का सलीका,_

        _चुपचाप से बहना और_
        _अपनी मौज मे रेहना._

_ऐसा नहीं की मुझमें_
_कोई ऐब नहीं है,_

        _पर सच कहता हूँ_
        _मुझमें कोई फरेब नहीं है._

_जल जाते है मेरे अंदाज से_
_मेरे दुश्मन,_

              _क्यों की एक मुद्दत से मैंने,
.... न मोहब्बत बदली
      और न दोस्त बदले हैं._

_एक घडी खरीदकर_
_हाथ मे क्या बांध ली_

        _वक्त पीछे ही_
        _पड गया मेरे._

_सोचा था घर बना कर_
_बैठुंगा सुकून से,_

        _पर घर की जरूरतों ने_
        _मुसाफिर बना डाला मुझे._

_सुकून की बात मत कर_
_ऐ गालिब,_

        _बचपन वाला इतवार_
        _अब नहीं आता._

_जीवन की भाग दौड मे_
_क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?_

        _हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
        _आम हो जाती है._

_एक सवेरा था_
_जब हँसकर उठते थे हम,_

        _और आज कई बार बिना मुस्कुराये_
        _ही शाम हो जाती है._

_कितने दूर निकल गए_
_रिश्तों को निभाते निभाते,_

        _खुद को खो दिया हम ने_
        _अपनों को पाते पाते._

_लोग केहते है_
_हम मुस्कुराते बहुत है,_

        _और हम थक गए_
        _दर्द छुपाते छुपाते._

_खुश हूँ और सबको_
_खुश रखता हूँ,_

        _लापरवाह हूँ फिर भी_
        _सब की परवाह करता हूँ._

_मालूम है_
_कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी_

        _कुछ अनमोल लोगों से_
        _रिश्ता रखता हूँ._

💌✍✍✍💘💘💘

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019

👮पुलिस ने बनाया 👦लल्लनटॉप 💝मौज से मनी दीपावली

दुनिया में कितना ही अधर्म एवं लोगों में   इंसानियत मर चुकी हो लेकिन कुछ लोग मानवतावादी झंडे को लेकर हमेशा एक एहसास दिलाते रहते हैं कोई भी युग एवं समय हो मानवता ही सबसे बड़ा धर्म  कहलाता है ऐसा ही एक उदाहरण मध्य प्रदेश के सागर जिले की  टोंक थाना क्षेत्र के पुलिस प्रभारी सुनील यादव एवं उनकी टीम द्वारा दीपावली के अवसर पर एक मानसिक  दिव्यांग ताराचंद जोकि  टोंग क्षेत्र की गलियों  मैं घूमता था उसे नहला धुला  बालों को व्यवस्थित  कटवा कर कर नवीन कपड़े पहनाकर पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराते हुए राजा बाबू जैसा बना दिया

इस  दिव्यांग को  समाज की मुख्यधारा का इंसान बनाने  के इस कार्य को करने के समय पर समस्त  टोंक  थाना स्टाफ उपस्थित रहा

एवं उसकी साफ-सफाई में सहयोग करता रहा टोंक थाने के मानवता एवं इंसानियत भरे कार्य के लिए समस्त देश में सराहना की जा रही है

इस मानवता भरे कार्य को देखकर लोग इस प्रकार की करने के लिए लाली यत होने लगे की काश हम भी इसी तरीके से दिवाली मना पाते आप सभी लोगों से निवेदन है कि आपके आसपास भी अगर इस प्रकार की दिमागी दिव्यांग  लोग समाज की मुख्यधारा से हटकर घूमते हैं अक्सर लोगों  उन्हें परेशान करते रहते हैं  कभी कभी पागल कहकर कभी उन पर पत्थर फेंक कर कहीं ना कहीं ओ है अपने आपको पागल सिद्ध  करते हैं अगर आपके आसपास भी इस प्रकार के लोग हैं और आप भी इस प्रकार की मानव आदि कार्य करते हैं तो उसकी फोटो भेज कर हमारे आवाज एनजीओ की तरफ से ₹200 पेटीएम द्वारा  मदद स्वरूप ले  सकते हैं ऐसे लोगों की मदद एवं सहायता करने में जो आनंद एवं चैन की नींद आती है उसका एक अलग ही मजा होता है एक बार ऐसा पुनीत कार्य आप भी करके देखें 🎯✍✍🙏

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019

🎆दीपावली 🕊हो या हो 🚩छठ भारतीय 🚅रेल एवम रेल👷कर्मचारी पहुंचाएंगे 👪यात्रियों को फटाफट🌻🙏

देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली एवं छठ  यह त्यौहार पूरे विश्व भर में भारतीयों द्वारा  बड़ी धूमधाम से मनाएं  जाते है पूरे विश्व भर में सबसे अधिक उत्तर भारतीय राज्यों के विहार उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश झारखंड राजस्थान इन राज्यों के निवासी  सबसे अधिक विदेशों  दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ देश की राजधानी  एवं  अनेक औद्योगिक क्षेत्रों में  जीवन यापन के लिए कार्य करते हैं एवं आर्थिक लाभ कमा कर साल में एक बार दीपावली एवं छठ पर अपने परिवार के साथ त्यौहार मना कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं

विश्व के सबसे अधिक  क्षेत्रफल घनत्व बाले क्षेत्र मैं करोड़ों की संख्या में एक ही समय पर लोगों को पहुंचाना एवं त्योहारों के बाद वापस अपने अपने कार्यों के लिए वापस गंतव्य पर भेजना भारत जैसे विकासशील देशों के यातायात तंत्र के लिए लिए एक चुनौती होता है इसीलिए त्योहारों के पहले ही देश का सबसे बड़ा यातायात तंत्र भारतीय रेलवे अपनी तैयारियां शुरू कर देता है इसके लिए अपने कर्मचारियों की सुविधा अनुसार लिए जाने वाले अवकाश एवं रेस्ट को पूरी तरह से प्रतिबंधित करके मात्र आपात स्थिति में ही उन्हें राहत लेने के लिए दिशा निर्देश दे देता है जिसके कारण भारतीय रेलवे  मैं विशेष जिम्मेवारी निभाने करने वाले विभागों के कर्मचारियों के लिए कोई भी त्यौहार हो वह भारतीय रेलवे एवं देश के यात्रियों की सेवा में ही समर्पित हो जाता है त्योहारों के पहले से ही सबसे अधिक  दबाव भारतीय रेलवे  पर बढ़ जाती है विश्व की सबसे बड़ी आबादी  एक साथ  एक ही समय पर  एक ही क्षेत्र में  यात्रा  करती है  अनेकों अतिरिक्त ट्रेनें एवं यातायात साधन बढ़ाने के बाद भी एक जन सैलाब उमड़ता है  जो कि हर इंतजाम  पर भारी पड़ता है  जिसके कारण लोगों को  आरामदायक  सफर मुश्किल भरा हो जाता है छठ एवं दीपावली  जैसे त्योहारों पर आपाधापी भरे माहौल में सफर करना बड़ा ही संघर्ष  का कार्य है इन त्योहारों पर कई महीनों पूर्व ही हवाई रेल सड़क यात्रा के जितने भी साधन हैं वह पूरी तरह से बुक हो चुके होते हैं लेकिन हर किसी को हर कीमत पर अपने घर पहुंचने की लालसा कहीं ना कहीं भारती यातायात व्यवस्था के लिए समस्याएं पैदा कर जाती है सबसे अधिक भीड़  मुंबई एवं दक्षिण भारत के साथ देश की राजधानी दिल्ली से आने वाली ट्रेनों में अधिक होती है तत्काल कोटा जैसे  सुविधाओं में  तय कीमत से अधिक कीमत करने के बाद भी किसी प्रकार की सीट उपलब्ध नहीं है ट्रेन से यात्रा करना हवाई जहाज की यात्रा करने से भी महंगा बन जाता है जनरल बोगी से यात्रा करना अपने जीवन से खिलवाड़ जैसा हो जाता है जनरल बोगी में यात्रा नारकीय जीवन से भी बदतर बन जाती है मजबूरी में लोग एक पैर पर खड़े होकर अपने घर पहुंचने के लिए सैकड़ों मिलो की यात्रा कर रहे हैं  देश का सबसे बड़ा यातायात जाल भारतीय रेलवे जोकि देश की यातायात व्यवस्था की लाइफलाइन भारतीय रेल  त्यौहार में के साथ-साथ अपनी छवि को बनाए रखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां चलाकर  अपने  रेल कर्मचारियों से उनकी क्षमता से अधिक कार्य  कराके लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने का बीड़ा उठा रखा है इसके लिए भारतीय रेलवे के कर्मचारी जो कि अपने त्यौहार को खराब  करके लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं आपको बता देंगे भारतीय रेलवे में देश के विभिन्न त्योहारों के आने के पूर्व ही विशेष आदेश निकल जाता है  एवं कुछ  प्रतिशत या आपातकाल स्थिति में कर्मचारियों को अवकाश  दिया जाता  है लेकिन वह भी  तेल मालिश एवं विशेष कृपा के माध्यम से गिने चुने लोगों को उपलब्ध हो पाता है अनेकों कर्मचारी ऐसे हैं कि जिन्हें हर त्योहारों पर रेल कार्य करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो वह हर त्योहार अपना घर पर ही मनाते हैं  इसे उनकी किस्मत  कहें या फिर ऊपरी कृपा वर्तमान में भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए अनेक दीपावली स्पेशल अतिरिक्त ट्रेन चला रखी हैं जिससे रेलवे की रनिंग कर्मचारियों की जिम्मेवारी लगभग दोगुनी हो चुकी है चुकी रनिंग कर्मचारियों की विशेष दायित्व का निर्वहन करते हैं साथ ही साथ ट्रैक पर काम करने वाले ट्रैक मैन गेट मैन एवं तमाम रेलवे कर्मचारी जो कि सुरक्षित एवं संरक्षित रेल चलाने के लिए   कमर कसे हुए है  शायद इस बार भी रेल यात्रियों को सुरक्षित अपने घरों में त्यौहार मनाने के लिए पहुंचाने में ही  ड्यूटी पर ही दीपावली एवं छठ पूजा मनानी पड़ेगी

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

कमरतोड़ महंगाई एवं बेरोजगारी में करवा चौथ का व्रत बना आम लोगों की मुसीबत

महिलाओं के जीवन  मैं सबसे महत्वपूर्ण त्योहार करवा चौथ होता है जिस दिन भारतीय महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है जिसमें बिना कुछ अन्य एवं जल ग्रहण किए हुए चौथ के सबसे ऊर्जावान चांद को देख एवं  उसके बाद अपने पति की पूजा कर उसके हाथ का पहला निवाला एवं पानी  पीकर अपना व्रत तोड़ती है यह त्यौहार महिलाओं के साथ उनके पतियों के लिए खर्चे वाला त्योहार माना जाता है जिसके लिए महिलाएं कई दिनों से बाजारों में खरीददारी एवं तैयारियां करना चालू कर देती  है यह त्योहार वर्तमान में टेलीविजन सोशल मीडिया के माध्यम से उच्च वर्गीय परिवार से निम्न स्तर के परिवारों तक पहुंच चुका है   पूर्व में जमीदार एवं संपन्न परिवार की महिलाएं इस व्रत को किया करती थी लेकिन धीरे-धीरे यह  छोटे-छोटे कस्बों एवं  गांव  के गरीब किसान मजदूर के घरों तक पहुंच चुका है वर्तमान समय में कमरतोड़ महंगाई एवं बेरोजगारी में जहां  परिवार के मुखिया को अपने परिवार एवं बच्चों का पेट भरने के लिए भी  बड़ा संघर्ष  करना पड़ रहा है वही इस प्रकार की खर्चीले त्यौहार लोगों के घरों में विवाद का कारण बन  रहे हैं समाज में जिस तरीके से सोशल मीडिया एवं टेलीविजन  जैसा परिधान  एवं अत्याधुनिक दिखने की चाहत का समाज में वातावरण बना हुआ है  वही आम महिलाओं की   स्वाभाविक मानसिकता   एक दूसरे  की देखा देखी अपने पति एवं परिवार की बिना आर्थिक स्थिति जाने तमाम आशाएं एवं सपने संजोने लगती हैं महिलाओं के सपने एवं  मांगे  पूरी  ना होने पर परिवार में मानसिक एवं बेमतलब का विवाद फैल जाता है जोकि परिवारिक अटूट बंधन को खोखला बना देता है  परिवारों में खोखला पन भविष्य में अलगाव का कारण बन जाता है भारतीय महिलाओं को चाहिए कि बिना किसी दूसरे को देख कर इस विपरीत समय जहां लोगों में  आर्थिक संकट व्यापार में आर्थिक मंदी युवाओं में बेरोजगारी एवं कमरतोड़ महंगाई मैं परिवार के हालात को समझ कर परिस्थितियों से समझौता कर करवा चौथ जैसी पवित्र त्यौहार को  सादगी पूर्वक  अपने परिवार के साथ मना कर अपने परिवार को स्वर्ग बनाएं💝🌻🌻🌻🎂🎂🎂🎂⚘⚘⚘✍🙏🙏🙏🙏🙏🙏