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AI टूल्स डायरेक्टरी — निष्पक्ष पत्रिका
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🤖 AI टूल्स डायरेक्टरी

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निष्पक्ष पत्रिका · AI टूल्स डायरेक्टरी · संपादक: रविंद्र साहू
यह सूची केवल जानकारी हेतु है — हर टूल के इस्तेमाल की शर्तें संबंधित वेबसाइट पर देखें।

सोमवार, 29 जून 2020

😎बहादुर एवं 🤓बेवकूफ लोगों में नाम मात्र का अंतर होता है

दुनिया🌎 में 😎बहादुर एवं 🤓बेवकूफ लोगों मैं अंतर नाम मात्र का होता है सफल हो गए तो बहादुर ज्ञानवान कहलाओगे एवं चूक हो गई तो पूरी दुनिया पर हंसेगी टिक टॉक के लिए बनाया गया यह वीडियो जिसमें गिरने वाले व्यक्ति की स्टंट करने की बहादुरी धरी की धरी रह गई मात्र कुछ इंच के फैसले से जीवन और मृत्यु का मिलन होते होते रह गया कृपया ऐसे बेवकूफी भरे कार्य ना करें जिससे आपकी जान को खतरा हो क्योंकि यह जीवन बड़ा अनमोल है 🙏🎯

गुरुवार, 4 जून 2020

😷बेजुबान 🐘जानवर को 💣सताने का परिणाम हमें जरूर भुगतना होगा यूं ही नहीं 🐲जूझ रहा 👨‍👨‍👧‍👦इंसान ☠️मौत के 👹तांडव से कुछ तो 🤒पाप किए होंगे

आत्मा🐘को झकझोर देने वाली🌻 दया एवं  संवेदनशीलता को आघात पहुंचाने बाली केरल की दुख भरी घटना  जिसमें बेजुबान प्रकृति के अग्रदूत कहलाने बाली देव तुल्य जानवर हथनी को विस्फोटक से भरा अनानास खिलाकर उसके पेट में पल रहे बच्चे के साथ उसकी जान लेने का जघन्य अपराधिक कृत्य ने मानवता को शर्मसार एवं कुदरत को रुला दिया है

आज पूरा देश सदमे में है विश्व भर में बेजुबान जानवरों के साथ हो रही हिंसक घटनाएं जिसमें बुहान शहर में जीव जंतुओं को बहुत बड़े स्तर से मार्कर उनका व्यापारिक लाभ हो या ऑस्ट्रेलिया में हजारों लाखों की संख्या में ऊंटों को पानी का दुश्मन घोषित करके मारना ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग से 50 करोड़ से अधिक जानवरों का जलकर मरना

एवं विश्व भर  में भोजन के लिए अनेक शाकाहारी विकल्प होने के बावजूद भोजन के लिए जानवरों की हत्या करके उन्हें खाने के इस्तेमाल में उपयोग करने की घटनाओं से कहीं ना कहीं ईश्वर की सौंदर्य पूर्ण मानवतावादी परिकल्पना को गहरा धक्का लगा है  ईश्वर की सौंदर्य पूर्ण मानवतावादी प्राकृतिक परिकल्पना को इंसान ने लालच एवं अहंकार के लिए आघात पहुंचा कर  कहीं ना कहीं अपने ऊपर ईश्वरीय प्रकोप की मुसीबत मोल ले ली है

जिसका दुष्परिणाम हम सभी को उठाना पड़ेगा वर्तमान में विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं एवं विश्व भर में मची उथल-पुथल से हम सभी को महाकाल के प्रकृति संहारक विनाशक विकराल क्रोधित तांडव की शुरुआत के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रही है

मंगलवार, 2 जून 2020

डॉनल्ड ट्रंप विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति या सबसे बड़ा कार्टून इसके अजीबोगरीब कारनामों से अमेरिका की प्रगति हो गई शून्य

🗽इतिहास🗣️ अपने आप को 🎭दोहराता जरूर है 🌎पूरे विश्व में 😷कोरोना🐉वायरस 👹महामारी के बीच 🇱🇷संयुक्त राज्य अमेरिका में 🌚अश्वेत अमेरिकी नागरिक  रेस्टोरेंट गार्ड के साथ अमेरिकी पुलिस द्वारा की गई सख्ती से उसकी मौत से उपजे वहां के लोगों में असंतोष ने अमेरिकी जनमानस में डॉनल्ड ट्रंप की मीडिया एवं पैसे के दम पर बनाई गई छवि तार तार होते दिखाई दे रही है पूरे विश्व में अपने अजीबोगरीब निर्णय एवं वक्तव्य के कारण हंसी का पात्र बने डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर पूरे विश्व के राजनेताओं से लेकर आम नागरिक आलोचना करते आए हैं
उद्योगपति से राजनेता बने डॉनल्ड ट्रंप पूरी तरह से फिल्मी कार्टून की तरह अपनी छवि आम लोगों में बनाए हुए उनकी नीतियों के कारण आज संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थापना के बाद इस देश की बौद्धिक लोगों बुद्धिमता को हंसी का पात्र बना दिया है विश्व महाशक्ति कहलाने वाला देश संयुक्त राज्य अमेरिका अपने स्वर्णिम इतिहास में सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की है विश्व की सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति जैसे गरिमामय कुछ पद पर डॉनल्ड ट्रंप जैसे अयोग्य व्यक्ति के बैठने के बाद लगातार उनके मूर्खतापूर्ण निर्णय से अमेरिकी  के साथ पूरे विश्व में उथल-पुथल मची हुई है यह पहली बार है पूरे विश्व का नेतृत्व करने वाला अमेरिका आज देश के भविष्य को लेकर अपनी स्पष्ट नीति नहीं बना पा रहा है बौद्धिक आर्थिक सामरिक दृष्टि से अमेरिका को समृद्ध बनाने के लिए यहां के श्वेत एवं अश्वेत दोनों लोगों का बराबरी से योगदान रहा है मौलिक अधिकार के लिए अमेरिका पूरे विश्व में जाना जाता है लेकिन वर्तमान में जिस प्रकार से बेरोजगारी की दर अपने चरम पर है लोगों को खाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है वही लगातार गलत नीतियों के कारण अमेरिका जैसे देश को विभिन्न देशों से मतभेद एवं प्रतिस्पर्धा के लिए खड़ा होना पढ़ रहा है जिस प्रकार से वर्तमान में अमेरिकी लोग सड़कों पर उतर कर सबसे मजबूत सुरक्षा तंत्र को धता बताते हुए आगजनी तोड़फोड़ की घटनाओं से पूरे विश्व भर के राजनेताओं मीडिया उद्योगपतियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है आने वाले समय में विश्व के अनेक देशों में इस प्रकार के हालात होने की आशंका से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता आज पूरा विश्व दो भागों में बटा हुआ है अमीरों का विश्व गरीबों का विश्व इस लड़ाई में कहीं ना कहीं मानवता पिसती जा रही है कोई व्यक्ति अधिक समय तक पैसे  सैन्य बल मीडिया जैसे पावर को इस्तेमाल करके सर्वोच्च पर नहीं रह सकता क्योंकि मजबूर इंसान को एक हद तक डराया धमकाया एवं दबाया जा सकता है लेकिन इतना भी नहीं डराओ के लोग डरना भूल जाएं जब लोग डरना भूल जाते हैं तो वह चलता फिरता मानव बम बन जाता है वर्तमान में विश्व के सभी देशों के राजनेताओं शासन प्रशासन को चाहिए विश्व में फैल रही अशांति रोकने के लिए  अपने-अपने अहम अहंकार एवं महत्वाकांक्षा को छोड़कर अमीरी और गरीबी के के बीच बढ़ रहे फासले में संतुलन बनाकर चलने के साथ अपनी जवाबदेही भी बनाए🎯😷

शनिवार, 30 मई 2020

हिंदी पत्रकारिता संविधान का चौथा स्तंभ या सत्ता पक्ष विपक्ष एवं चंद उद्योगपतियों की व्यवसायिक दुकान

🎭आज 🖋️पत्रकारिता दिवस है लेकिन वर्तमान में देश में अधिकतर पत्रकार  सत्तापक्ष एवं विपक्ष की गोद मैं बैठकर कहीं ना कहीं इस पवित्र पेशे को बदनाम कर  रहे हैं कभी पत्रकार फटे हाल हुआ करते थे आज बड़े-बड़े ऑफिस लंबी चौड़ी गाड़ियां थानों की दलाली विभागों में कमीशन यह सब पत्रकारों के मुख्य कार्य बन चुके हैं पूर्व में पत्रकारिता का मुख्य कार्य उन बेजुबान लोगों की आवाज बन कर शासन-प्रशासन सत्ता में बैठे हुए अंधे बहरे हो चुके सिस्टम को झकझोर कर उसे याद दिलाना कि संविधान का चौथा स्तंभ मीडिया अभी जिंदा है लेकिन समय का ऐसा चक्र घुमा चंद उद्योगपतियों की घर के चौखट को चूमना ही पत्रकारिता बनता जा रहा है पत्रकार भी क्या करें कहीं ना कहीं व्यवसाय लोग इस पवित्र पेशे में कूद गए जो शाम दंड भेद सभी अपनाकर वही शब्द लेखनी एवं मुंह में डालते हैं जिससे उन्हें एवं उनके आकाओं को फायदा हो साथियों पानी के बहाव में तो लाशें  बहा करती हैं असली बहादुर वह है जब विपरीत दिशा में चल कर लोगों की दबी आवाज को आंधी बनाकर संविधान के चौथे स्तंभ को मजबूत बनाएं

शुक्रवार, 29 मई 2020

सहारा 🇮🇳इंडिया परिवार यदि भारत है तुम्हारा तो ₹ पैसा दे दो अब 😷हमारा 👳मेरा मुझ को अर्पण क्या 🙏लागे तेरा 👩‍🎓वित्त मंत्री एवं सेवी से 👩‍👩‍👧‍👧अनुरोध है 🙏मेरा ना रखो दिया तले अंधेरा🌚

🎭 विश्व भर में फैली🐉कोरोना वायरस महामारी के कारण 60 दिन से अधिक समय तक देश बंद होने से उपजे आर्थिक सुनामी ने पूरी तरह भारतीय परिवारों की आर्थिक स्थिति को तोड़ कर  रख दिया है पूरे देश में लोगों के पलायन एवं रोजगार खत्म होने के कारण आने वाले समय में लोगों को एक एक रुपए के लिए पूरी तरह से सरकार एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं साहूकारों के सामने हाथ फैलाने की नौबत आ गई है यह वही देश के नागरिक हैं जिन्होंने अपने खून पसीने और मेहनत से देश की प्रगति में अमूल्य योगदान किया है देश का किसान आज पूरे देश का पेट भरने की दम रखता था लेकिन वर्तमान में बढ़ रहा विदेशी टिडियो दल के समूहों का खतरा उन किसानों के साथ पूरे देश की खाद्य समस्या के भविष्य को लेकर एक डरावनी तस्वीर खींच रहा है इन सभी प्राकृतिक घटनाओं से उपजी बेरोजगारी  कहीं ना कहीं देश का  गरीब मजदूर एवं मध्यवर्गीय परिवार के साथ उद्योग धंधे पूरी तरह से तबाह होते जा रहे है पक्ष विपक्ष तमाम घटनाक्रम में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है विपक्ष सत्ता पक्ष पर लोगों के खातों में डायरेक्ट पैसे डालने की मांग कर रहा है वही सत्ता पक्ष विपक्ष द्वारा कार्यों में रोड़े अटकाने का आरोप लगा रहा है लेकिन गरीब को नहीं पता कौन सही कौन गलत है उसे तो इतना पता कैसे ना कैसे उसे तुरंत राहत पहुंचाई जा सके तुरंत राहत पहुंचाने के लिए सरकार के पास अनेकों रास्ते हैं  वर्तमान में लगभग देश के 2 करोड़ से अधिक लोग देश में काम कर रहे सहारा इंडिया परिवार एवं पल्स ग्रीन जैसी तमाम कंपनियों में अपना निवेश करके अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं उनकी खून पसीने की कमाई का जिसका वह इस बुरे वक्त में इस्तेमाल कर सकते थे वह देश की न्याय व्यवस्था एवं सेबी के नियमों के पचड़े में फंस कर रह गई है देश के नागरिक इतने स्वाभिमानी हैं कि इस दुख भरी घड़ी में समस्याओं से त्रस्त होकर जिंदगी से मुक्ति पाने के लिए आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे  हैं सहारा इंडिया पल्स ग्रीन जैसी अनेकों कंपनियों के कारण देशभर में करोड़ों लोगों का खुद का पैसा अधर में लटका हुआ है एवं लाखों की संख्या में वह बेरोजगार युवा जो उज्जवल भविष्य के लिए इन कंपनियों के एजेंट बनकर छोटे छोटे लोगों से गलियों गलियों मैं घूम कर निवेश के पैसे इकट्ठे करके इन कंपनियों में लोगों को उज्जवल भविष्य की गारंटी देकर निवेश कराता था उसकी हालत बड़ी दयनीय है सहारा इंडिया परिवार एवं पल्स ग्रीन जैसे बहु क्षेत्रों में कार्य करने वाली कंपनियों द्वारा देश के  बड़े बड़े फिल्मी राजनेता अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पत्रकार उद्योग समूह के चेहरों एवं विश्वसनीय लोगों की प्रचारक टीम लगाकर देश के लोगों की  देश प्रेम, देश सेवा, देश प्रगति के नाम पर भावनाओं को भड़का कर सब्जबाग दिखाते हुए उनके साथ एक प्रकार से गंभीर ठगी की है लोगों को विश्वास दिलाने के लिए कि आपका निवेश सुरक्षित है सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के प्रमाण पत्र देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनलों से लेकर पत्रिकाओं में आए दिन प्रचारित किए जाते थे एवं  देशके ऐसे लोग जो कि पूरे देश भर में प्रतिष्ठा का केंद्र माने जाते हैं वह लगभग सभी चैनलों पर देश के लोगों को भारत है हमारा हम हैं सहारा जैसे नारे दिया करते थे आज उन सभी नारा लगाने वाले लोगों के समूह  कहां है जब देश का हर व्यक्ति आर्थिक रूप से परेशान हैं आज सभी लोग जिनकी जमा पूंजी इन कंपनियों में लगी हुई है वह है एक एक रुपए के लिए मोहताज है देश के किसान मजदूर मध्यवर्गीय परिवार बेटी की शादी के लिए संचय करने वाली मां छोटे कामगार छोटे छोटे व्यापारी सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन  के कर्मचारी एवं की  बेरोजगार युवा  रोजगार की आस लगाने वाले एजेंट जिन्होंने जिंदगी भर की जमा पूंजी इन कंपनियों में लगा कर अपने अपने परिवार के लिए खुद ही फांसी का फंदा तैयार कर लिया हैं सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति उस बेरोजगार युवा की है जो इन कंपनियों के एजेंट बनकर आस पास पड़ोस रिश्तेदार आमलोगों को इन कंपनियों की योजना एवं पॉलिसिया बताकर निवेश कराते  थे लोगों के तानों एवं दबाव के कारण कई एजेंट आत्महत्या कर चुके हैं कई मानसिक तनाव से जीवन जी रहे हैं वर्तमान में यह सभी लोग देश की प्रमुख संस्था सेबी सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री वित्त मंत्री विपक्ष के नेता एवं तमाम सामाजिक संगठनों से अनुरोध कर रहे हैं कि इनका स्वाभिमान कायम रखने के लिए एवं शीघ्र राहत पहुंचाने के उद्देश्य से इनकी खुद की जमा पूंजी जो विभिन्न कंपनियों में फंसी हुई है उसे  अति शीघ्र ही इन्हें वापिस दिलायी जाएआर्थिक समस्या  झेल रहे करोड़ों लोगों की शीघ्र निदान दिलाने के लिए हमारे देश के माननीय सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति प्रधानमंत्री वित्त मंत्री कृषि मंत्री आरबीआई गवर्नर सेबी अध्यक्ष योजना आयोग अध्यक्ष सहारा श्री प्रमुख जी को संज्ञान लेना चाहिए कि जो भी अनियमिताये आर्थिक कमियां इन कंपनियों एवं उद्योगपतियों की है उसे शीघ्र ही वीटो पावर एवं 20 लाख करोड़ राहत पैकेज का इस्तेमाल करके हटाया जाए और इन सभी लोगों को इनके अकाउंट में इनका पूरा पैसा वापस दिलाया जाए जो वर्तमान में कई हजार करोड़ रुपए बनता है यह देश के करोड़ों लोगों के  लिए बहुत बड़ी राहत होगी  देश हित में छोटा सा प्रयास कृपया सभी लोगों से निवेदन है कि इस मुहिम को आगे बढ़ाएं

बुधवार, 13 मई 2020

आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश को मिला आर्थिक महा केज विश्व आर्थिक महाशक्ति बनेगा भारत

🎭 क्या 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज से आत्मनिर्भर बन पाएगा भारत आज हमारे देश के  🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को संबोधित करते हुए आर्थिक महा पैकेज की घोषणा की गई है जिसमें 20 लाख करोड रुपए के आर्थिक पैकेज जो भारत को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक महाशक्ति बनाने के तौर पर दिया जा रहा है जिसकी  जानकारी  कुछ दिनों में विस्तारपूर्वक दी जाएगी  लॉक डाउन 3 के बाद भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में लॉक डाउन जारी रहेगा कुछ विशेष शर्तों के साथ कुछ क्षेत्र एवं इकाइयां खुल सकती है एवं लोगों को रोना महामारी के कारण सोशल डिस्टेंस मास्क हैंड वॉश जैसे अनेक कार्यों को अपने जीवन में लंबे समय तक के लिए सम्मिलित करने की आदत डालनी होगी आर्थिक पैकेज की घोषणा भारत द्वारा अन्य देशों की तुलना में कुछ समय लगाने के बाद की गई है इसके पहले विश्व के अनेक देशों ने अपने अपने देश के औद्योगिक क्षेत्रों को आर्थिक मंदी से बचाने के लिए इस प्रकार के राहत पैकेज की घोषणा कर चुके हैं पूरे विश्व में सबसे अधिक जापान द्वारा लगभग सकल घरेलू उत्पाद का 21.1 प्रतिशत आर्थिक पैकेज के रूप में अपने देशवासियों के लिए दिया है आपको अवगत करा दें कि भारत की 65% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है इस कारण अन्य देशों की तुलना में भारत कुछ हद तक बेरोजगार हो रहे लोगों को मनरेगा जैसी योजनाओं से राहत पहुंचा सकता है एवं भविष्य में कृषि पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने एवं चीन से अपना व्यापार समेटकर भारत  आने वाली कंपनियों  के लिए इस प्रकार के औद्योगिक आर्थिक पैकेज का इस्तेमाल किया जा सकता है बुंदेलखंड बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड मध्य प्रदेश राजस्थान विदर्भ छत्तीसगढ़ पश्चिम बंगाल जैसे पिछड़े क्षेत्रों को कहीं ना कहीं इस आर्थिक पैकेज से बहुत आशाएं हैं जिस प्रकार पूरे देश भर से मजदूरों को पलायन करना पड़ रहा है उससे देश में यह मांग उठ रही  है कि देश के अति पिछड़े एवं बेरोजगार जनसंख्या वाले क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने एवं इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने को लेकर इन्हें क्षेत्रों में औद्योगिक स्थापित कराई जाए  जिससे भविष्य में इन क्षेत्रों के लोगों को किसी प्रकार के पलायन के लिए मजबूर ना होना पड़े यह आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भरता योजना के अंतर्गत दिया जा रहा है जिसमें पूर्व में दिए गए एक लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज भी शामिल हैं देश के प्रधानमंत्री द्वारा कोरोनावायरस भीषण काल को भारतीयों के लिए 21वीं सदी में आर्थिक निर्भरता एवं विश्व आर्थिक महाशक्ति के लिए बड़ा अवसर जैसा बताया है इस आर्थिक पैकेज का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न देशों से आ रहे आर्थिक निवेश को भारत में अधिक से अधिक कराने के लिए एवं भारत के उद्योगों में नई जान फूंकने के लिए अधिक माना जा रहा है इस आर्थिक महा पैकेज में किन उद्योगों को कितने प्रतिशत बजट किस शर्त एवं नियम के अनुसार आवंटन किए जाएंगे यह तो आने वाले समय में पूरी जानकारी उपलब्ध होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है लेकिन इतना जरूर है कि अन्य देशों द्वारा अपने देश के लिए आर्थिक पैकेज  की घोषणा करने के बाद भारत पर भी अपने देश में आर्थिक पैकेज देने के लिए विपक्ष सरकार को लगातार निशाना बना रहा था देश की दिन-प्रतिदिन गिरती हुई आर्थिक स्थिति एवं बेरोजगारी के कारण एकमात्र विकल्प आर्थिक  पैकेज  की घोषणा सरकार के पास रह गया था  यह आर्थिक पैकेज भारत की जीडीपी का लगभग 10% है इस पैकेज की घोषणा के पूर्व देश के विभिन्न राज्यों द्वारा श्रम कानून एवं विदेशी निवेश के लिए अनेकों आर्थिक नियमों बदलाव एवं श्रम संबंधित कानूनों मैं बदलाव किया है जिनसे कहीं ना कहीं देश के मजदूरों के अधिकारों के हनन की संभावना बन रही है चीन द्वारा अपने देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए श्रम कानून को पूरी तरह से खत्म कर दिया था इसके कारण पूरे विश्व में चीन आर्थिक महाशक्ति जरूर बन गया लेकिन आज भी वहां श्रमिक बंधुआ मजदूरों की तरह कार्य करते हैं देश को प्रगति के मार्ग पर फिर से लाने के लिए कुछ वर्षों के लिए श्रम कानून में बदलाव को श्रमिक सहर्ष स्वीकार कर सकते हैं परंतु श्ररम कानू मजदूरों के शोषण का जरिया ना बनाया  जाय🙏🙏🙏🙏🙏✍️😷😷😷😷😷😷

शनिवार, 9 मई 2020

एक बगल में 🌝चांद होगा 🛠️एक बगल में 🍪रोटियां @🇮🇳पलायन एक आशा या निराशा

 कोरोनावायरस से फैली महामारी के कारण एक और दर्दनाक दुखद मानवीय संवेदना को झकझोर देने वाली घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद में घटित हुई जिसमें प्रवासी मजदूर लगभग 6 सप्ताह से लॉक डाउन हटने का इंतजार करने के बाद अपने घर पहुंचने की आशा लिए  भूखे प्यासे सूखी रोटियां के साथ  राज्य एवं केंद्र सरकार के बीच में फिटबॉल बन चुके यह प्रवासी मजदूर सरकारों की लोगों को  उनके घरों की ओर भेजने की घोषणा होने के बाद आशा लेकर विभिन्न स्टेशनों पर पहुंचना शुरू हुए क्योंकि  महामारी बंदी के कारण विभिन्न यातायात के साधन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित थे एवं जितनी भी बचत पहुंची थी वह खत्म हो चुकी थी फैक्ट्री के मालिक से लेकर मकान मालिक अपने अपने तरीके से प्रवासी मजदूरों पर पलायन के लिए दबाव बना रहे थे इस कारण विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर अपने  परिवार के साथ रेल की पटरी के सहारे बड़े स्टेशनों के लिए निकल पड़े उन्हें आशा थी के वहां से उनके कई सैकड़ों किलोमीटर दूर गांव के लिए ट्रेनों में सरकार उन्हें भेजने की व्यवस्था करगी उन्हें क्या पता था की रेल लाइन पर चलते चलते बुद्ध पूर्णिमा पूनम की यह रात उनके लिए अंतिम रात होगी और  मौत मालगाड़ी का रूप बनकर अपने आगोश में ले लेगी

क्योंकि पूरे देश भर के रेलवे द्वारा ऑपरेशन अति शीघ्र चलाया जा रहा है जिसमें सभी गाड़ियां अपनी मानक समय स्पीड यानी के फुल स्पीड में चलाए जा सही हैं इसके लिए विभिन्न रेलवे में पहले से ही दिशा निर्देश दे दिए गए लोको स्पेक्टर इसकी निगरानी कर रहे हैं इसका प्रमुख उद्देश्य सही समय पर राहत सामग्री एवं लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था से है जब गाड़ियां अपनी फुल स्पीड में होती हैं तो हर प्रकार के ब्रेक लगाने के बाद भी गाड़ी को लगभग आधा किलोमीटर से भी अधिक दूरी की आवश्यकता होती है जिससे वह पूर्ण रूप से रोकी जा सके रेलगाड़ी  का कोई भी ड्राइवर एवं कर्मचारी कभी नहीं चाहता कि उससे किसी भी प्रकार की घटना घटित हो जिससे उसके दामन पर दाग लगे उसके साथ उसके परिवार एवं समाज के लोगों में उसकी छवि धूमिल हो हर तरीके से बचाने के बाद भी यह दुर्घटना टालने में ट्रेन के ड्राइवर एवं सहायक नाकाम हुए  विभिन्न न्यूज़ चैनलों द्वारा एवं सूत्रों द्वारा बताया गया कि सभी मजदूर रेल की पटरी पर सो रहे थे अगर इस प्रकार का साक्ष रेलवे द्वारा संज्ञान लिया जाता है तो उसमें मुआवजे में इन मजदूरों के परिवारों को दिक्कत आ सकती है रेल नियम अनुसार रेलवे ट्रैक पर किसी प्रकार की गतिविधि रेल कानून तोड़ने के रूप में मानी जाती है जिसके लिए रेल लॉ एक्ट मैं विभिन्न प्रकार की कानूनी प्रावधान हैं  घटनास्थल पर  पड़ी सूखी रोटियां पलायन की मजबूरी को दिखा रहा है

कि लोग 2 जून की रोटी के लिए अपने घर परिवार से हजारों किलोमीटर दूर संघर्ष करते-करते यूं ही मर जाते हैं वही कुछ लोग हजारों करोड़ों रुपए का घोटाला करके जिंदगी मजे से काटते हैं   मानवता को शर्मसार कर देने वाली 2 जून रोटी के लिए पलायन उसके बाद  संघर्ष करते-करते अपनी जिंदगी को यूं ही लूटा देना जिंदगी कितनी सस्ती होती है ऐसी घटनाओं से  मानवता के असंतुलित बेरहम चेहरे नजर आते है लगभग दर्जन लोग मृत्यु एवं गंभीर रूप से घायल हो चुके   विभिन्न न्यूज़ चैनल एवं समाचार पत्रों  अपने तरीके से अपने आकाओं के अनुसार कवरेज को अंजाम दिया जा रहा है कुछ न्यूज़ चैनल इस घटनाओं को दिखाने की जगह अपना पुराना एजेंडा भारत-पाकिस्तान को दिखाने में कि भारत देगा पाकिस्तान के मौसम की जानकारी मैं लगे हुए हैं प्रत्येक घटना के राज्य सरकार   केंद्र सरकार एवं विभिन्न संस्थान इन मजदूरों के लिए मुआवजा की घोषणा करेंगे लेकिन अभी तक के इतिहास से यह कह पाना मुश्किल है कि इन मजदूरों के परिवार तक संवेदना प्रोत्साहन राशि पहुंच पाएगी या नहीं कहीं ना कहीं देशभर में फंसे हुए लोगों  मजदूरों तीर्थयात्रियों छात्रों के लिए रणनीति बनाने में सरकार से चूक हुई है लॉक  डाउन के शुरुआती चरण में जब विभिन्न देशों में भारतीय लोगों को देश में लाने की बात चली तो विभिन्न प्रकार की एयरलाइंस कंपनी अपने अपने तरीके से घोषणा करने लगे क्या हुआ थे कि विदेशों से लोगों को अपने एयरलाइंस कंपनी द्वारा शीघ्र से शीघ्र भारत में ला सकती हैं लेकिन देश के ही एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक गरीब मजदूरों को पहुंचाने के लिए किसी भी प्रकार की कंपनियों द्वारा घोषणा नहीं की गई विभिन्न प्रकार की ऑफर उपलब्ध कराने वाली एयरलाइंस कंपनियां जो कि मात्र हजार ₹700 में देश के एक कोने से दूसरे कोने की यात्रा करा दिया करती  थी अब जब पूरे विश्व में तेल सस्ता है विश्व भर की सभी एयरलाइंस जमीन पर खड़ी हैं और अपने हो रहे घाटे को दिन प्रतिदिन सरकार को बतला कर अपने कर्ज माफी की याचना करने के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किए हुए फिर इस भीषण प्राकृतिक महामारी में उन सभी कंपनियों द्वारा अपने आप को अलग करना क्यों  उचित समझा वहीं रेल द्वारा भी घोषणा करने के बावजूद लोगों से टिकट के पैसे वसूलने की घटना कहीं ना कहीं देश को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की गई एक अमीरों वाला देश एक गरीब मजदूरों वाला देश उद्योगपतियों का कर्जा माफ या बट्टे खाते में डालने जैसी घटनाएं कहीं ना कहीं उस किसान और मजदूर की जेहन में तीर की तरह चुभ रही है जिसके मात्र पांच ₹10000 के कर्जे के लिए उसकी जमीन और ट्रैक्टर नीलाम किया जाता था विभिन्न प्रकार के औद्योगिक संस्थानों के मालिकों द्वारा अपने पावर का फायदा उठाकर महामारी से बचाव के लिए पलायन कर रहे मजदूरों को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए लेबर कानून को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है कुछ दिन पूर्व एक फैक्ट्री के गैस प्लांट अकेली हो ने के कारण हजारों लोग बीमार पड़ गए लगभग एक दर्जन लोगों की मृत्यु हो गई ऐसी घटनाओं में 4 दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात 2 दिन मीडिया चिल्लाएगी तीसरे दिन से घटना के साथ सभी मांगो एवं जांचों का वजूद  खत्म हो जाता है बीमा कंपनी भी अपने हाथ खड़े कर देती हैं जांच कमेटी भी अपनी रिपोर्ट को फैक्ट्री मालिकों के हिसाब से बना देते हैं देश का क्या होगा यह तो पता नहीं लेकिन शोषण हमेशा गरीब का होता ही रहेगा

रविवार, 3 मई 2020

@ ना आना अभी हमारे देश# ☠️ दम तोड़ता पर्यटन उद्योग

विश्व भर में महामारी बन के कोरोनावायरस ने पूरे विश्व का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है इसके कारण विश्व भर में खाद्य पदार्थ दवाइयां एवं जरूरी संसाधन के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है आने वाले समय में से भारी आर्थिक उथल-पुथल पूरे विश्व भर में हो सकती है भारत में भी इसका असर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा सबसे अधिक भारत के पर्यटन उद्योग की कमर टूटने वाली है क्योंकि प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व भर से देश के पर्यटक स्थलों को देखने के लिए लाखों की संख्या पर्यटक आकर यहां पर लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते थे पर्यटन उद्योग के लिए बड़े-बड़े उद्योग समूह द्वारा भारी भरकम इन्वेस्ट करके रखा था देश की जहां तक पर्यटन स्थल रेल मार्ग यातायात मार्ग वायु मार्ग से जुड़े हुए हैं विभिन्न लग्जरी वाहनों के साथ विश्वस्तर की डेकोरेट इंपोर्टेड सामानों से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कराया जाता था भारत के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को देखने के लिए पूरे विश्व भर से लोग भारत की ओर खींचे चले आते थे लेकिन वर्तमान में पूर्व विश्व में फैली कोरोनावायरस विचित्र बीमारी के कारण कहीं ना कहीं पूरे विश्व भर के लोगों  में दूरियां बढ़ चुकी हैं सोशल डिस्टेंस जैसे शब्द लोगों की दिनचर्या में स्थान बनाने लगे इसके कारण पूरे विश्व भर में लोगों में विश्व पर्यटन के लिए अवधारणाएं पूरी तरह से बदल चुकी हैं आर्थिक महामारी बन के आई यह बीमारी से पूरे विश्व भर में करोड़ों की संख्या में लोगों का रोजगार छिन चुका है लोगों को जीवन के लिए संघर्ष करना पड़ेगा लाखों की संख्या में विश्व के सबसे बड़ी आर्थिक महा शक्तियों वाले देशों के लोगों की लाखों की संख्या में जान गंवानी पड़ रही है इस स्थिति में भविष्य में पर्यटन उद्योग को बढ़ने की कल्पना करना सपने जैसा होगा इस उद्योग पर निर्भर लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार होकर कहीं ना कहीं अपने जीवन के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे देश के विकास मैं बहुमूल्य योगदान देने वाले पर्यटन उद्योग को औद्योगिक दिशा में मोड़ कर कहीं ना कहीं इसका लाभ उठाया जा सकता है क्योंकि संसाधनों से युक्त पर्यटक क्षेत्रों में औद्योगिक इकाई स्थापित करने में जाना कठिनाइयां नहीं होगी देसी विदेशी निवेश पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा संसाधन युक्त पर्यटक क्षेत्रों में सरकार थोड़े से ही प्रयास में अधिक लाभ उठाकर कहीं ना कहीं लाखों की संख्या में बेरोजगार होने वाले लोगों को राहत प्रदान कर सकती हैं|भारत सरकार के साथ राज्य सरकारों को विशेष कार्य योजना बनाकर आर्थिक पैकेज में इन क्षेत्रों को विशेष महत्त्व देकर अति शीघ्र विश्व भर मैं आर्थिक उथल-पुथल का लाभ उठा सकती हैं

बुंदेलखंड के लिए वरदान साबित हो सकता है कोरोना वायरस

पूरे विश्व में इतिहास की सबसे बड़ी भयानक महामारी का रूप ले चुके कोरोनावायरस से अब तक लाखों की संख्या में लोग अपनी जान गवा बैठे हैं एवं  पूरे विश्व भर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है आज   फिर से  देशभर में लॉक डाउन को दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया  है पूरा विश्व भर के देश वर्तमान समय मैं दवा भोजन एवं राहत सामग्री के लिए एक दूसरे देशों के मुंह ताक रहे हैं विश्व भर का एक बड़ा हिस्सा घरों में कैद होकर रह गया  इस महामारी के कारण पूरे विश्व भर में व्यापारिक आर्थिक सामाजिक लाभ लेने के कारण कहीं  ना कहीं पूरे विश्व भर में चीन देश की छवि एक मौकापरस्त एवं लालची देश की बन चुकी है विश्व के प्रमुख देशों ने चीनी सरकार से कोरोना वायरस के कारण हुए नुकसान का हर्जाना मांगा जा रहा है विश्व में चीन को अलग-थलग करने की विश्व के देशों द्वारा एकजुटता  की आशंका जताई जा रही आने वाले समय में चीन में औद्योगिक इकाइयां लगाकर व्यापार कर रही विश्व भर की हजारों कंपनियां अपने व्यापार को उठाकर कहीं दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए मजबूर हैं विभिन्न आर्थिक महाशक्ति कहलाने वाले देशों ने अपने अपने देश की कंपनियों से चाइना जैसे मौकापरस्त देश से अपने व्यापार को अलग करने के लिए दिशा निर्देश देना चालू कर दिया है विभिन्न देशों द्वारा चीनी निवेश को प्रतिबंधित कर के आने वाले भविष्य में चीन के प्रति किसी प्रकार की रियायत नहीं देने का स्पष्ट संकेत दे दिया हैजिस प्रकार भारत द्वारा विश्वसनीय रूप से पूरे विश्व भर में राहत सामग्री दवाइयां एवं खाद्य पदार्थ भेज कर पूर्व से चली आ रही विश्व बंधुत्व की भावनाओं को बनाए रखा उससे विश्व भर में भारत की छवि एक ईमानदार राष्ट्र के रूप में फिर से उभरी हुई है आने वाले समय में हजारों की संख्या में कंपनियां भारत में उद्योग लगा सकती हैं जिस प्रकार देशभर के बड़े महानगरों से इस महामारी में कामगार मजदूरों का पलायन हुआ एवं अभी भी लाखों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं महानगरों में जनसंख्या घनत्व भी अत्यधिक विस्फोटक  रूप तक पहुंच रहा है उससे आने वाले भविष्य में भारत में उद्योगों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा जहां श्रमिकों की संख्या एवं भूमि के साथ संसाधन उपलब्ध हो ऐसी जगह औद्योगिक इकाइयां स्थापित कराने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकारें कार्य करेंगे आने वाले समय में देश के सबसे पिछड़े कहलाने वाले

बुंदेलखंड उड़ीसा झारखंड छत्तीसगढ़ पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश से औद्योगिक इकाइयां लगाकर विश्व व्यापार को संतुलन में लाने की कोशिश की जाएगी इस कारण इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह महामारी कोरोना जैसीघातक बीमारी भविष्य में वरदान बनकर कार्य कर सकती है आपको बता दें पूरे देश भर में मध्य में स्थित बुंदेलखंड क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है इसकी पिछड़ेपन को अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर के नेताओं द्वारा एवं मीडिया के माध्यम से उठाया जा चुका है अनेकों बार पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर विभिन्न प्रकार के आंदोलन होते रहे बुंदेलखंड प्रसिद्ध खजुराहो ओरछा  विदेशी पर्यटकों के लिए केंद्र बिंदु बने हुए थे लेकिन कोरोना जैसी बीमारी से अब आने वाले भविष्य में पर्यटन उद्योग फिर से उठ पाएगा यह कहना सही नहीं बुंदेलखंड का यह क्षेत्र पठारी होने के कारण सस्ती श्रम शक्ति भूमि सस्ते संसाधन होने के कारण उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में आर्मी एवं रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क होने के  कारण सुरक्षित एवं संरक्षित है यहां इलेक्ट्रॉनिक फूड इंडस्ट्रीज सोलर एनर्जी खनिज संसाधन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज ग्रेनाइट उद्योग के साथ अनेक प्रकार के औद्योगिक इकाई लगाने के लिए अनुकूल है भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुछ वर्ष पूर्व से यहां पर डिफेंस कॉरिडोर की योजना को लेकर काफी कार्य किए जा रहे हैं अगर डिफेंस कॉरिडोर में विश्व भर की इकाइयों को समायोजित करके एक बड़ी कार योजना स्थापित की जाए तो आने वाले 10 वर्षों में यह पूरा क्षेत्र विश्व भर में उभर कर आ सकता है आपको बता दें यह आगरा भोपाल कोटा इलाहाबाद कानपुर एवं जबलपुर जैसे देश के बड़े शहरों के मध्य बसा हुआ है इनके आसपास खनिज पदार्थों की अपार संपदा छुपी हुई है बुंदेलखंड पूरे देश भर से रेल के माध्यम से जुड़ा हुआ है यहां किसी भी स्थिति में देशभर के किसी भी कोने में 24 घंटों के अंदर जाया जा सकता वर्तमान में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के मध्य स्थित बुंदेलखंड के लिए अनुकूल स्थिति है क्योंकिकेंद्र एवं मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश तीनों स्थान पर एक ही पार्टी की सरकार है जिस कारण आर्थिक निर्णय लेने में किसी प्रकार की परेशानी की संभावना बेहद कम है भारत सरकार एवं राज्य सरकार से अनुरोध है कि विश्व भर से आने वाले औद्योगिक निवेश मैं बुंदेलखंड को केंद्र में रखकर कार्य योजना बनाई जाए जो भविष्य में देश के साथ पूरे विश्व के लिए हितकर रहेगा क्योंकि यह क्षेत्र पूरी तरह से भूकंप बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटनाओं से पूरी तरह से सुरक्षित एवं महफूज है बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े सभी राजनैतिक आराजनैतिक  युवा किसान व्यापारी वकील पत्रकार मजदूर छात्र साथियों से निवेदन है की औद्योगिक विकास एवं इकाई लगाने के लिए एक विशेष मुहिम चलाकर बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को सामने रखकर इस क्षेत्र के विकास के लिए आंकड़े जुटाने की कृपा करें जिससे इस क्षेत्र का भला हो सके हमें पता है कि कोरौना जैसी घातक बीमारी पूरे विश्व के साथ भारत के लिए भी एक चुनौती का विषय है लेकिन हर एक रात के बाद सुबह जरूर होती है आज नहीं तो कल हम सभी इस घातक वायरस से लड़कर इस पर विजय प्राप्त करके रहेंगे |   

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

रेल को टारगेट बनाकर युवा कर रहे हैं जीवन से खिलवाड़ वीडियो फोटो से जांदा कीमती मनुष्य जीवन है

पिछले दिनों यह वीडियो पूरे देश भर में वायरल हुआ जिसमें एक युवा द्वारा यूट्यूब वीडियो बनाने के लिए आती हुई ट्रेन के बगल में खड़े होकर चलते हुए बिना किसी गति एवं दूरी का अनुमान लगाकर जिस कारण ट्रेन का पार्ट उस युवक ने टकराता है और वह दूर जाकर गिर जाता है मुझे पता नहीं क्यों है इस दुनिया में है या नहीं लेकिन ऐसे हादसे कहीं ना कहीं उस युवा के परिवार एवं रेल गाड़ी चला रहे चालक एवं सहायक चालक एवं आसपास तैनात रेल कर्मचारियों के लिए जीवन भर के लिए   टीस दे जाते हैं की कहीं ना कहीं वह सोचती है कि  मैं शायद उसे बचा सकता था और सतर्कता ना बरतने के कारण यह दुर्घटना हुई थी आए दिन रेल के संबंध में ऐसी घटनाएं आती रहती है जिसमें नवयुवक  एवं व्यक्ति परिवार की समस्याओं से जूझ कर  ट्रेन के आगे आकर अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं जाने वाला तो चला जाता है लेकिन कहीं ना कहीं कई लोगों के दिमाग में एक सदमा जैसा दे जाता चालक एवं सहायक चालक के साथ रहने वाले गार्ड उस एरिया में काम करने वाले पॉइंटमैन लाइनमैन एवं गेटमैन कहीं ना कहीं घटित होने वाली दुर्घटना के बाद काफी दिनों तक सदमे में रहते हैं  एवं उनके लिए कुछ घटनाएं याद के रूप में बड़ी दुखद यादें दे जाती है परिवार के साथ एवं खाना खाने के समय पूजा करने के समय उसे वही दृश्य घूमता रहता है पता नहीं किन परिस्थितियों में लोग जीवन से तंग आकर ऐसे अपराधिक निर्णय ले लेते हैं जिसकी भरपाई करना उनके परिवार के लिए बड़ा ही असंभव कार्य होता है आए दिन रेलवे की  विद्युत लाइन ओ एच ई को पकड़कर जल जाने की घटनाएं होती रहती है ओ एच ई का करंट इतना हाई होता है की छूते ही संबंधित व्यक्ति के पूरे शरीर को पल भर में जला देती है लोगों द्वारा कई तर्क दिए जाते हैं दिमागी रूप से कमजोर व्यक्ति तार को पकड़ते लेकिन समझ में नहीं आता आखिर लोग रेल को ही क्यों टारगेट बना रहे हैं धीरे धीरे आत्महत्याओं करने का सबसे आसान तरीका रेलवे बनता जा रहा है लोगों को पता भी है की ऐसी दुर्घटनाओं में रेल प्रशासन संबंधित व्यक्ति के परिवार को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं देती फिर भी लोग रेलवे को टारगेट करते हैं आपको बता दें की कटकर रेल दुर्घटना होने के बाद अनेक प्रकार की फॉर्मेलिटी पोस्टमार्टम होने के उपरांत ही संबंधित दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के शव को उनके परिवार को सौंपा जाता इस प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा समय लग जाता है इस प्रक्रिया में संबंधित रेल कर्मचारियों के साथ व्यक्ति के परिवारिक सदस्यों को जो पीड़ा एवं तनाव झेलना पड़ता है उसकी कल्पना करना असंभव है जीवन जैसी अमूल्य निधि की महत्ता को समझते हुए रेल प्रशासन एवं रेल कर्मचारियों द्वारा विशेष प्रयास किए जाते हैं कि किसी भी प्रकार की दुर्घटनाएं ना घटित हो जिससे जेल प्रशासन पर एवं कर्मचारियों पर किसी भी प्रकार का दाग लगे भारतीय रेल द्वारा समय-समय पर लोगों को अनेक प्रकार से जागरूक किया जाता है की जितना हो सके रेल लाइन से  दूर  रहे एवं ट्रैक को पार करते हुए किसी प्रकार के मोबाइल एवं गैजेट का प्रयोग ना करें एवं  मोबाइल फोन से वीडियो फोटो खींचने के लिए अपने जीवन को जोखिम में ना डालें वाहन को गेट बंद होने के बाद जबरदस्ती  रेल लाइन से निकालने की कोशिश ना करें जैसे अनेक प्रकार के कारण जो दुर्घटना का कारण बनते हैं रेल प्रशासन एक मोटी राशि खर्च कर लोगों को जागरूक करने का कार्य करती है उसके बाद भी इस प्रकार की दुर्घटनाएं कहीं ना कहीं लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त ना होने का कारण हो सकती है जीवन अमूल्य है जीवन का मूल्य उनसे पूछिए जो एक किडनी एक आंख बिना हाथ पैर गंभीर बीमारी से ग्रसित होकर एक-एक दिन ईश्वर से दया के रूप में मांगते हैं फिर क्यों व्यक्ति छोटी-छोटी मानसिक समस्याओं एवं लापरवाही मैं जीवन को दांव पर लगा देते कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिन्हें माफ करना भगवान के लिए भी असंभव हो जाता है रेल  से दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बचने वाले लोगों का हाल भी बहुत बुरा हो जाता है इसीलिए सभी  छोटे बड़े भाई बहन एवं अन्य समस्याओं से ग्रसित लोगों से निवेदन है जीवन में भगवान ने भी संघर्ष  किया हम तो मात्र इंसान हैं मनुष्य जीवन का नाम ही संघर्ष होता है सभी के जीवन में संघर्ष आता है एवं दुख के बादल छठते भी हैं अच्छे समय का इंतजार कीजिए आत्म संतोष रखिए आज नहीं तो कल आप जीवन में जरुर सफल होंगे असफलता ही सफलता की कुंजी होती है खुश रहे अपने एवं अपने परिवार का ख्याल रखें सुरक्षित रहें संरक्षित रहें

मंगलवार, 19 नवंबर 2019

1857 की क्रांति की प्रथम दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई जन्मदिन विशेष

देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति की प्रमुख  लीडर महारानी  लक्ष्मीबाई जी का जन्म आज पूरे विश्व भर में मनाया जा रहा है वीरता ऐश्वर्या नेतृत्व क्षमता परिवारिक संरक्षण घुड़सवारी युद्ध कौशल जैसे अनेक क्षमताओं से दक्ष महारानी लक्ष्मी बाई देवता का पर्याय मानी जाती थी लॉर्ड डलहौजी की राज्य हड़प नीति के माध्यम से देश की अनेकों रियासतों को अंग्रेजी शासन में शामिल करने के लिए किए गए कुचक्र के विरोध में रानी लक्ष्मीबाई द्वारा अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक कर देशभर में फैली अंग्रेजों के प्रति धधकती ज्वाला को तीव्र किया था एवं अनेक क्रांतिकारी गुटों का नेतृत्व कर कर विश्व भर के  देशों का ध्यान भारत की तरफ आकर्षित कराया था रानी लक्ष्मीबाई देश के लिए लड़ते लड़ते अपनी जान निछावर कर गई महारानी लक्ष्मी बाई जी के जन्मदिन पर हम सभी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं रानी लक्ष्मी बाई के जीवन पर महान कवित्री सुमित्रा कुमारी चौहान जी द्वारा लिखित  विश्व प्रसिद्ध कविता                                                         सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।

वीर शिवाजी की गाथायें उसको याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़।

महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुघट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आयी थी झांसी में।

चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव को मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।

निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।

अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।

रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात?
जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।

बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
'नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।

यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी,

जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में।

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,

दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।

तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

जीने के लिए भोजन जरूरी है पैसा ही सब कुछ नहीं होता



भागदौड़ भरी जिंदगी में रुकना मना है पैसा है परिवार है इज्जत है सम्मान फिर भी कभी-कभी हम भूखे रह जाते ऐसी ही जिंदगी है कुछ देश की कठिन नौकरियों की जिनमें देश की सरहद पर रक्षा करने वाला फौजी रेल में दिन-रात सर्दी गर्मी कोहरा सब  का डटकर मुकाबला करने वाले रेल के कर्मचारी लोको पायलट एवं गार्ड अनेकों सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के कर्मचारी  जोकि भागते दौड़ते अपनी मंजिल  पर पहुंचने की आपाधापी मैं भूखे रह जाते हैं उन्हीं को भोजन डिलीवरी करते हुए बनाई गई कुछ सेकेंड की वीडियो  देखकर  सच में  आंसू आ जाएंगे वैसे तो देश में अनेकों विभाग एवं ऑफिस  विपरीत परिस्थितियों में कठिन एवं भागदौड़ भरा कार्य करते हैं उनमें से एक है भारतीय रेलवे कर्मचारी उनकी जागरूकता एवं सतर्कता से ही देश की लाइफलाइन भारतीय रेलवे दिन रात निरंतर चलती रहती है सबसे ज्यादा समस्या लर्निंग कर्मचारी को होती है ड्यूटी पर आने पर किसी प्रकार का कोई टाइम टेबल नहीं होता जिसमें मालगाड़ी की वर्किंग बड़ी ही कठिन होती है ड्यूटी आने के मात्र 2 घंटे पहले पता चलता है की आज कहां जाएंगे उसके बाद शुरू होता है उनका झटपट तैयार होकर नित्य क्रिया से निर्मित होकर अपने पूरे काम कर बैग में राशन पानी भर के दौड़ कर दो घंटे के अंदर ड्यूटी ऑन करनी पड़ती है रेलवे से संबंधित औजार किताबें पानी खाना कपड़े आदि से भरकर पूरा बैग फुल हो जाता है अगर किसी कारण बस घर पर खाने का इंतजाम नहीं हो पाया उस दिन भगवान भरोसे ही इनकी नौकरी चलती है मुंबई के डिब्बे वाले पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है जो कि मुंबई के अधिकतर ऑफिसों में खाना पहुंचाते हैं और लोगों को खाने के इंतजाम से पूरी तरह से टेंशन फ्री रखते हैं लेकिन देशभर में ऐसी व्यवस्था नहीं है लेकिन वर्तमान में जिस तरह से स्टार्टअप की वजह से शहरी क्षेत्रों में ओला जोमैटो जैसे सुविधा जनक संसाधन उपलब्ध होने से कहीं ना कहीं लोको पायलट  एवं गार्ड जैसी विपरीत परिस्थितियों वाली  नौकरियों में कहीं ना कहीं राहत मिली है किसी कारण बस खाना उपलब्ध ना होने के कारण पहले से ही संबंधित स्थान पर ऑर्डर बुक करा दिया जाता है तारीफ के काबिल है वह डिलीवरी ब्वॉय जो अपने कार्य में सक्रियता दिखा कर कहीं ना कहीं अपनी कंपनी एवं मानवीय कार्य को मजबूत बनाते हैं जोमैटो  जैसी कंपनियों में कार्य करके डिलीवरी करने वाले यह कर्मचारी जोकि कई लोगों के द्वारा धर्म और जाति का ईशु बनाकर बखेड़ा खड़ा कर देने से दुविधा में पड़ जाते हैं कहीं ना कहीं ऐसे अनेक लोगों के पास मुंह का निवाला लेकर पहुंच जाते हैं जिनके पास सब कुछ है पैसे इज्जत शोहरत सब कुछ लेकिन उनके पास उनका  किसी कारण बस भूखे रहने की  स्थिति  या मनपसंद खाना बनाने बनाने वाले एवं पहुंचाने वाले शायद पैसों की लिए कहीं दौड़ लगा रहे हैं कई ऐसे परिवार हैं जिनकी कई मंजिलों के ऊपर रिटायर्ड हो चुके जिनके  बुजुर्ग मां बाप के लिए यह डिलीवरी बॉय उनके  परिवार से भी बढ़कर है एक बात हमेशा ध्यान रखिए इंसान हमेशा भोजन खाता है ना कि पैसे जीवन के लिए पैसा ही सब कुछ नहीं होता कृपया भागदौड़ भरी जिंदगी में अपना एवं अपने परिवार का ख्याल रखें 

सोमवार, 4 नवंबर 2019

छठ का त्यौहार हिमालय स्वर्ग या स्विजरलैंड नहीं यह हमारी राजधानी दिल्ली की यमुना नदी है

सूर्य की उपासना का प्रमुख त्योहार छठ जो कि पूरे विश्व में पूर्वांचल एवं बिहार के लोगों द्वारा मनाया जा  रहा है साल दर साल बढ़ती इस पवित्र त्यौहार की लोकप्रियता को देखकर बड़ा ही आश्चर्य होता है प्रकृति के साथ जुड़ाव एवं अपनी मूल जड़ों की ओर लौटने वाला अपनी संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए प्रत्येक वर्ष दीपावली  के बात छठे दिन मनाए जाने वाली प्राकृतिक उपासना पर्व पर डूबते हुए सूर्य की उपासना की जाती है इस पर्व पर विश्व भर में फैले बिहार एवं पूर्वांचल छत्तीसगढ़ झारखंड जैसे अनेक उत्तर भारतीय क्षेत्रों के राज्यों में निवास करने वाले लोग अपने घरों में लौटते हैं एवं अपने परिवार के साथ इस पवित्र त्योहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं यह त्योहार वर्तमान नव पीढ़ी को प्रकृति के साथ जोड़ने एवं अपनी मूल जड़ों की ओर वापस लौटने का संदेश देता है आधुनिक हो चली दुनिया में शहरों में नदी तालाबों का हाल बद से बदतर होता जा रहा है
आने वाले भविष्य में बस किताबों में नदियां तालाब दिखाए जाएंगे पूरे विश्व भर में मनाए जा रहे इस त्योहार की तस्वीरें न्यूज़ चैनल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर में छाई हुई थी उसी बीच कुछ तस्वीरें दिल्ली के यमुना नदी से सूर्य उपासना करती महिलाओं की  तस्वीरें आनी चालू  हुई
लोग आश्चर्यचकित रह गए प्रथम दृष्टया स्वर्ग जैसी एवं  पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव  एवं पृथ्वी के स्वर्ग  स्विजरलैंड कश्मीर की भांति दिखने वाली यमुना नदी पर प्रदूषण से बने झाग कहीं ना कहीं रेगिस्तान में बनने वाले मृग मारीच जैसी अनुभूति लाने के लिए पर्याप्त  थे देश की प्रमुख नदियों में शुमार यमुना नदी जोकि भगवान श्री कृष्ण के कर्म स्थली एवं पांडवों की राजधानी के किनारे से बहने वाली प्रमुख नदी थी इस नदी का वर्तमान में यह आलम है कि यह मात्र एक बदबूदार नाला बन कर रह गई है जिसमें सैकड़ों की संख्या में कारखानों एवं  सीवर का पानी जमा हो रहा है जो कि वर्तमान  एवं आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा ही घातक सिद्ध होगा पूर्वांचल के लोगों द्वारा मनाया गया जाने वाला छठ का त्यौहार हम सभी मानव जाति को प्रकृति के इस पवित्र रूप नदियों एवं तालाबों की दुर्दशा को दिखला गया है एवं एक संदेश भी दे गया है कि आने वाले समय में देश एवं दुनिया के लिए बड़ा ही कठिन होने वाला है छठ का उपवास रहने वाली महिलाओं को इन बदबूदार नदी तालाबों में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते हुए देखना दिल को अंदर तक झकझोर देने वाला सीन था

जहां एक और स्वर्ग एवं बर्फीले क्षेत्र की अनुभूति देने वाली इस नदी के झाग में तमाम युवा सेल्फी लेकर आनंद ले कर टिक टॉक फेसबुक इंस्टाग्राम के लिए कलेक्शन बना रहे थे वही कुछ दार्शनिक एवं प्राकृतिक प्रेमी आने वाले भविष्य को देखकर व्यथित एवं चिंतित थे अनेक प्रकार के दिशा निर्देश एवं कार्य योजना बनने के बाद कई हजार करोड़ रुपए खर्च कर देने के उपरांत भी देश की नदी तालाबों की हालत बद से बदतर होती चली जा रही है जहां  देश में बढ़ गई भयंकर जनसंख्या एवं कम होते प्राकृतिक संसाधनों से लोगों  के जीवन को कठिन बना दिया है  विश्व की प्रमुख संस्थाएं इस भीषण समस्या से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही हैं वही हमारे देश में नदी  तालाबों कुओं के उत्थान एवं हालात को सुधारने के लिए होने वाले बजट में कमी की जा रही है जिसमें एक कारण सबसे अधिक भ्रष्टाचार का है विश्व की सबसे प्रमुख एवं पवित्र नदी गंगा के हालात सुधारने के लिए एक मोटा बजट जल संसाधन मंत्रालय को दिया गया था अनेक प्रमुख एजेंसी एवं विशेषज्ञों को गंगा उत्थान के लिए लगाया गया था सभी नदियों के बजट को अनदेखा कर गंगा के उत्थान में जितना बजट लगाया गया था उससे भी गंगा नदी के हालात जस के तस बने हुए हैं हमारे देश में राष्ट्रीय स्तर पर छठ जैसे पवित्र त्योहारों को भारत सरकार द्वारा मान्यता देनी चाहिए जिससे हमें भविष्य में इन प्राकृतिक स्त्रोतों को बेहतर एवं संभालने के लिए एक प्रेरणा मिल सके

अनेक संपन्न परिवार के लोगों द्वारा अपने घरों के पास ही गड्ढे खोदकर नदी एवं तालाबों का रूप देकर परिवार की महिलाओं को छठ के पवित्र त्यौहार पर सूर्य की उपासना करने के लिए विशेष प्रयास कराएं आने वाले समय में नदी एवं तालाबों की नाला बन  चुके हैं उनके पास भी खड़ा होना भी मुश्किल हो जाएगा पैर रखने की तो बात ही छोड़िए  आपको बता दें कि दिल्ली के यमुना के आसपास इसी नदी के पानी से अनेक प्रकार की सब्जियां एवं फल उगाए जाते हैं जो कि पूरे दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में धड़ल्ले से बेचे जाते हैं इस सब्जी एवं फलों में कहीं ना कहीं नदी में फैला घातक केमिकल एवं रसायन खाने के माध्यम से  हमारे शरीर में पहुंचकर हमारी आने वाली पीढ़ी को कमजोर करने का कार्य कर रही है जिसके भविष्य में बेहद घातक दुष्परिणाम सामने आएंगे केंद्र एवं राज्य सरकार एवं आम लोगों के साथ देश में सामाजिक कार्य कर रहे अनेक सरकारी एवं गैर सरकारी स्वयं सहायता समूह एवं संगठन युवा पीढ़ी जो कि मात्र सोशल मीडिया में खोई हुई है यह सब मिलकर विश्व स्तरीय कार्य योजना बनाकर देश की जीवनधारा नदियों को अपने मूल स्थिति में लाने के लिए प्रयास करें जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी भी अपनी आंखों से नदी तालाबों को देख सकें🎯🕊✍😢😢😢☠