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AI टूल्स डायरेक्टरी — निष्पक्ष पत्रिका
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निष्पक्ष पत्रिका · AI टूल्स डायरेक्टरी · संपादक: रविंद्र साहू
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बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

देश की सबसे चहेती एवं लाभ देने वाली ट्रेन पुष्पक एक्सप्रेस

भारतीय रेलवे कितनी ही नई ट्रेनें चला ले लेकिन लोगों में जिस ट्रेन के प्रति दीवानगी बढ़ जाती है वह उसे कभी नहीं छोड़ते जी हां हम बात कर रहे हैं देश की ऐसी ट्रेन जिसके लिए लोगों में दीवानगी की हद तक प्यार है  वह ख्याति प्राप्त सबसे अधिक आय देने वाली यात्री ट्रेन है पुष्पक एक्सप्रेस जोकि उत्तर प्रदेश की राजधानी एवं नवाबों के शहर लखनऊ से देश की औद्योगिक नगरी मुंबई के मध्य चलती है यह लखनऊ से मुंबई के बीच चलने वाली एक ऐतिहासिक ट्रेन है इस ट्रेन से यात्रा करने की चाहत हर आम एवं खास यात्रियों को रहती है इस ट्रेन से यात्रा करने वालों में सबसे अधिक व्यापारी बिहार पूर्वांचल एवं गोरखपुर के साथ लखनऊ के आसपास क्षेत्रों के मुंबई में मेहनत मजदूरी करने वाले लोग एवं वह छात्र  एवं कलाकार जो की माया नगरी में अपना कैरियर बनाने के लिए जाते है वैसे तो लखनऊ से मुंबई जाने के लिए  अनेकों ट्रेन चलती हैं लेकिन लोगों में इस पुष्पक ट्रेन के लिए दीवानगी इस कदर है कि  इस ट्रेन का लखनऊ के पूर्वोत्तर रेलवे स्टेशन लखनऊ जंक्शन से प्रस्थान का समय 19:45 है लेकिन लोग इसमें जगह पाने के लिए सुबह 10:00 बजे से ही स्टेशन पर पहुंचकर लाइन लगाना चालू कर देते हैं
इसका स्लीपर एवं एसी का रिजर्वेशन कई हफ्तों एवं महीनों तक एडवांस बुकिंग रहती है लोगों को यात्रा करने के लिए इस ट्रेन में रिजर्वेशन पाना बहुत ही कठिन कार्य क्योंकि हर कोई इस ट्रेन से यात्रा करने के लिए तत्पर रहता है क्योंकि यह ट्रेन पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 6 से मुंबई के मध्य प्रस्थान करती है लेकिन अनेक यात्रियों की लखनऊ के स्टेशनों से अनभिज्ञ हैं वह इस ट्रेन का इंतजार लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर पहुंचकर करते रहते हैं लेकिन जब प्रस्थान का समय नजदीक हो जाता है तो वह इस ट्रेन के विषय में अन्य लोगों से जानकारी लेते हैं और लखनऊ जंक्शन स्टेशन से प्रस्थान होने की जानकारी पाने के बाद पकड़ने के लिए दौड़ते रहते हैं अनेकों बार कई यात्रियों की ट्रेन जानकारी के अभाव में छूट जाती है क्योंकि ट्रेन पूर्ण रूप से भर कर जाती भेड़ बकरियों की तरह भरे इस ट्रेन के जनरल स्लीपर डिब्बे देखकर कोई भी डर जाए लखनऊ से  मुंबई जाने वाली कई ट्रेनें जनरल डिब्बे के मामले में पुष्पक से भी ज्यादा बदनाम है जिसमें कई ट्रेनें है जोकि गोरखपुर से आती हैं उन ट्रेनों में जनरल के साथ स्लीपर  क्लास डिब्बे की हालात बद से बदतर  होते  है जहां शौचालय में भी लगभग 4 से 5 लोग खड़े खड़े गोरखपुर से मुंबई तक की यात्रा करते हैं अनेकों यात्री जोकि पुष्पक एक्सप्रेस से अंतिम चरण में यात्रा करते हैं वह जनरल का टिकट लेकर  स्टेशन पर ही मौजूद स्थानीय चेकिंग स्टाफ द्वारा स्लीपर के लिए रसीद बनवा लेते हैं जिससे उनको स्लीपर में यात्रा करने की परमिशन मिल जाती है इस कारण स्लीपर में भी जनरल जैसी हालत हो जाते है यात्रियों के द्वारा जनरल टिकट से  रसीद कटवा कर स्लीपर में यात्रा करनी के कारण स्थानीय चेकिंग स्टाफ के साथ उस वक्त में चलने वाला चेकिंग स्टाफ का महीनों एवं सालों रसीद बनाने का जो टारगेट होता है वह मात्र कुछ ही दिनों में पूर्ण हो जाता है इस ट्रेन के विषय में लगभग सभी लोग जानते हैं कि यह एक तरह से रेलवे को आए देने वाली स्पेशल ट्रेन है अगर भविष्य में ऐसी ट्रेनों को प्राइवेट कंपनियों को दे दिया जाए तो एक तरह से आम एवं खास यात्रियों पर आसमान ही टूट पड़ेगा इस ट्रेन में जरूरत है  जनरल कोच के डिब्बों को बढ़ाने की एवं लोगों को जागरूक करने की के अन्य ट्रेन भी मुंबई की ओर जाती है वह उनमें में भी यात्रा कर सकते हैं एवं  इसके प्रस्थान के समय चारबाग स्टेशन  पर भी इस ट्रेन के लखनऊ जंक्शन से जाने का  उद्घोषणा कराने की जरूरत है

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019

₹25000 तो दिए नहीं पर होमगार्डों की नौकरी छीन ली न माया मिली ना मिले राम

उत्तर प्रदेश के होमगार्ड को नवरात्रि के पहले मिली खुशी दीपावली के पहले गम में बदली साथियों वर्तमान समय मैं देश एवं प्रदेश  का राजनैतिक व्यवसायिक आर्थिक सामाजिक मौसम सच में बहुत ही खराब चल रहा है  लोगों  को पता ही नहीं चलता की किस पर बिजली गिरने वाली है वर्तमान में बिजली गिरी है उत्तर प्रदेश के 25000 होमगार्डों  एवं उनके परिवार के ऊपर जो कि एक ही झटके में सड़कों पर आ गए आपको बता दें की उत्तर प्रदेश में होमगार्ड एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं यह समाज के वह कड़ी हैं जोकि उच्च अधिकारियों से लेकर धनाढ्य लोगों के साथ आम जनता की डांटने फटकार  गुस्सा   तिरस्कार गालियां एवं   हिंसा  आदि का प्रशासन के सबसे निम्नतम पायदान पर खड़े होकर सहन करता है  ज्यादातर होमगार्ड छोटे परिवारों एवं जातियों से आने वाले वह लोग हैं जो कि  परिवारिक पृष्ठभूमि गरीबी एवं अन्य कारण से शिक्षा प्राप्त नहीं कर   सके लेकिन शारीरिक एवं मानसिक रूप से समाज एवं देश की सेवा के उद्देश्य से एवं बेरोजगारी  मैं अपने परिवार का भरण- पोषण करने के लिए सबसे कम मानदेय में होमगार्ड के पद पर नियुक्त हुए थे जहां से वह जैसे तैसे अपने परिवार का पेट भरने का भी इंतजाम करते थे पूर्व में इनकी  ड्यूटी महीने के कुछ दिनों के लिए ही लगाई जाती थी जिसका उन्हें नाम मात्र का मानदेय दिया जाता था एवं ड्यूटी लगाने के लिए भी उन्हें उच्च अधिकारियों की जी हजूरी करनी पड़ती थी अनेकों होमगार्ड परिवार ऐसे हैं कि जो कम मानदेय के कारण भुखमरी की कगार पर थे और वर्तमान में भी हैं लेकिन पिछले दिनों माननीय सुप्रीम कोर्ट के उत्तर प्रदेश सरकार को दिए हुए आदेश अनुसार उत्तर प्रदेश के होमगार्डों का मानदेय 25000 करने की घोषणा के बाद इनमें खुशी की लहर दौड़ गई थी  और इन्हें अपने परिवार एवं बच्चों का भविष्य उज्जवल दिखाई देने लगा था लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई  और कुछ लोगों को इनकी बड़ी हुई सैलरी हजम नहीं हुई और आदेश निकाल दिया कि उत्तर प्रदेश के 25000 होमगार्डों को हटाया जाएगा इस आदेश  ने एक ही झटके में   उत्तर प्रदेश के होमगार्ड की खुशी को आसमान से जमीन पर पटक दिया उत्तर प्रदेश के लगभग 25000 होमगार्ड जिनके साथ जुड़े उनके लगभग परिवार के 100000 सदस्यों पर यह आदेश आते ही मानो इन पर आसमान टूट पड़ा हो हर जगह उनके परिवारों में कोहराम मच गया इस आदेश के बाद सबसे अधिक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के गरीब परिवारों को समाज की मुख्यधारा से अलग होना पड़ेगा उत्तर प्रदेश के होमगार्ड उत्तर प्रदेश की यातायात व्यवस्था के साथ रेलवे के गेटों प्रमुख संस्थानों धार्मिक आयोजनों राजनीतिक रैली एवं सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा से संबंध बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेवारी निभाते   रहे हैं ज्यादातर होमगार्ड स्थानीय होने के कारण इनका मुखबिर तंत्र इतना मजबूत होता था जिससे कई बड़ी घटनाओं को रोका जाता था उत्तर प्रदेश के 25000 होमगार्डों को निकालने का निर्णय किस संदर्भ में लिया गया यह तो होमगार्ड एवं उनके परिवार के साथ आम जनता की भी समझ से परे  है क्योंकि ज्यादातर होमगार्ड 25000 की खुशी के चक्कर में अपनी रोजी-रोटी से भी हाथ धो बैठे उत्तर प्रदेश के 25000 होमगार्ड अपने आप को ठगा महसूस  कर रहे हैं  अब तो वह अपने पुराने मानदेय पर ही नौकरी करने के लिए तैयार हैं अपने बच्चों को उच्च शिक्षा एवं  परवरिश ना सही कम से कम अपने परिवार का   रूखा सूखा करके पेट तो भर सकेंगे अब इतना तो तय है कि वर्तमान समय कर्मचारियों के लिए बड़ा ही विपरीत समय है पता नहीं सुबह उठते ही किसकी नौकरी पर खतरा मंडराना शुरू हो जाए माननीय सुप्रीम कोर्ट के साथ ही राज्य सरकार को 25000 होम गार्डों को परिवार को ध्यान में रखकर अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की  जरूरत है🕊🙏🙏🙏🙏😢😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭✒📣

सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

🚅तेजस ट्रेन वाली 🕵कंपनी बिना कुछ🤔 किए हुई 💰मालामाल

देश में प्राइवेट कंपनियों को किस प्रकार से लाभ दिलाया जाए यह वर्तमान सरकार से ज्यादा कोई नहीं जान सकता पिछले दिनों  तेजस को संचालित करने वाली प्राइवेट कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड  जो घाटे में चल रही थी उसे एक ही झटके में आसमान पर ला दिया
शुक्रवार को इस कंपनी का शेयर ₹320 मात्र था जो कि आज मार्केट खुलने पर सीधा 115 परसेंट बढ़कर  ₹ 690 रुपए पहुंच गया अब उसे तेजस जैसी ट्रेनों से फायदा हो या नुकसान हो यह तो भविष्य  मैं पता चलेगा लेकिन कंपनी की पूंजी  कई गुना बढ़ जाएगी आपको बता दें की केंद्र सरकार एवं भारतीय रेल द्वारा 150 ट्रेनों को प्राइवेट कंपनियों द्वारा संचालित कराने का निर्णय लिया है जिसको देखकर शेयर मार्केट में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड के शेयर में भूचाल ला दिया हर कोई इस कंपनी के शेयर खरीदने के लिए उतारू हो गए जिससे एकाएक इसका शेर ऊंचाई पर पहुंच गया और इसकी मार्केट वैल्यू ज़ूम मार गई भविष्य में  ट्रेनों के निजीकरण से रेल कर्मचारियों का क्या भविष्य होगा इससे कंपनी को कोई लेना देना नहीं लेकिन इस कंपनी का भविष्य बिना कुछ किए ही उज्जवल हो चुका है

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

तेजस को समय से चलाने के लिए सुरक्षा एवं संरक्षा से खिलवाड़

 क्या आपको पता है देश की प्रथम प्राइवेट ट्रेन तेजस को चलाने के लिए  हजारों यात्रियों को असुविधा हुई है  भारत की प्रथम  निजी  ट्रेन को संचालित करने का निर्णय लिया  जो ट्रेन संचालित की जा रही है वह देश में  रेल के आधुनिक भारत की शुरुआत  के नाम से प्रचारित की जा रही   है इसका किराया  हवाई जहाज किराए के  लगभग है एवं संचालन करने वाली कंपनी किसी भी समय इसका किराया अपने हिसाब से बढ़ा सकती है इसमें  रेलवे ड्राइवर एवं गार्ड को छोड़कर किसी भी  सरकारी रेल कर्मचारी का प्रत्यक्ष  रूप से कोई हस्तक्षेप नहीं  है  कंपनी द्वारा तेजस एक्सप्रेस के संचालन से पूर्व ही यात्रियों को लुभाने के लिए  घोषणा कर चुकी है कि ट्रेन के 1 घंटे लेट होने पर  पर यात्रियों को ₹100  एवं 2 घंटे लेट होने पर  ₹250 दिए जाएंगे इसी लोक लुभावने वादे को पूरा करने के लिए ट्रेन संचालन कंपनी द्वारा भारतीय रेल के तंत्र को ही दूषित करना चालू कर दिया तेजस को समय सीमा में चलाने के लिए जितनी भी   सुपर फास्ट एक्सप्रेस  मेल  पैसेंजर  माल गाड़ियां तेजस के आने एवं जाने के समय पूर्व या बाद में  चलाई जाती हैं उन्हें तेजस एक्सप्रेस के आने एवं जाने से  कई घंटों एवं मिनट पहले रोक दिया जाता है गेटमैन गैंगमैन पॉइंटमैन स्टेशन मास्टर से लेकर पूरे कंट्रोल को एक हाउवा बनाकर रख दिया है कि तेजस आने वाली है सभी गाड़ियों को साइड में करके उसे पहले  वरीयता देकर चलाया जाए जिससे भविष्य में  आम पब्लिक को निजी करण से चलने वाली तेजस एक्सप्रेस ट्रेन का गुणगान किया जा सके  आपको बता दें की रेल इंजन में लोको पायलट सहायक लोको पायलट एवं रेल से संबंधित अधिकारी एवं तकनीकी कर्मचारी के अलावा किसी भी व्यक्ति को जाना अलाउड नहीं होता है लेकिन तेजस एक्सप्रेस ट्रेन के टाइम टेबल को सही बनाए रखने के लिए प्राइवेट कर्मचारी रेल इंजन में उपस्थित होकर एक तरह से स्पीडो मीटर पर नजर रखकर कहीं ना कहीं लोको पायलट एवं असिस्टेंट लोको पायलट पर मंडली प्रेशर बनाते रहते हैं एवं स्पीड को लेकर ड्राइवर से लेकर स्टेशन मास्टर और कंट्रोल को दिशा-निर्देश देते रहते हैं जिससे रेलवे का मूल उद्देश्य एवं मंत्र संरक्षण एवं सुरक्षा को पलीता लगाया जा रहा है जिससे भविष्य में यह भारतीय रेल एवं यात्रियों  के लिए बड़ा घातक सिद्ध हो सकता है  क्योंकि प्राइवेट ट्रेन की शुरुआत आनन-फानन में की गई है उसके लिए अभी तक सुरक्षा संरक्षण से संबंधित एवं प्राइवेट कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रकार के दिशानिर्देश तय नहीं किए गए हैं ना ही रेल नियमावली जी आर एस आर मैं किसी प्रकार का नवीन अध्याय नहीं जोड़ा गया जोकि रेल के नियमों को प्राइवेट ट्रेन संचालन के नियमों से संबंध करके कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों एवं अधिकार से अवगत करा सकें भारतीय रेल कर्मचारियों ने मांग की है कि  निजी करण से Tejas एक्सप्रेस लाभ कमाने के उद्देश्य संचालन की शुरुआत के साथ रेल कर्मचारियों की सुरक्षा एवं संरक्षा का विशेष ध्यान रखें क्योंकि देश के प्रत्येक सरकारी रेल कर्मचारी को शपथ दिलाई जाती है समय सीमा उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितनी सुरक्षा एवं संरक्षा अनेकों बार किसी भी प्रकार की  अनहोनी होने की आशंका एवं दुर्घटना होने का आभास होने पर रेल  लोको पायलट अपने स्वविवेक से निर्णय लेकर ट्रेन की स्पीड को कम करके अनहोनी को  टालते रहते हैं एवं उसके विषय में कंट्रोल को अवगत कराते रहते हैं लेकिन जब उन्हें ट्रेन संचालित करने के लिए इंजन में उपस्थित होकर समय सीमा का दबाव बनाया जाएगा तो वह कहीं ना कहीं सुरक्षा से खिलवाड़ करके अपने टारगेट को पूरा करेंगे जिससे भविष्य में रेल के साथ रेल यात्रियों को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है इसलिए रेल प्रशासन रेल के संरक्षण एवं सुरक्षा के  जाल को  किसी भी प्राइवेट संचालित  कंपनी को  तोड़ने की अनुमति ना दे क्योंकि पैसा एवं समय बचाने से महत्वपूर्ण है लोगों की  संरक्षा एवं सुरक्षा  आप सभी  रेल कर्मचारी एवं यात्री  सुरक्षित रहें  संरक्षित रहे आपकी यात्रा मंगलमय हो  आपका अपना भारतीय रेल परिवार 🚄🔊✍✍✍✍✍🙏🙏🌷🌷

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

ट्रेन🚄 ड्राइवर भी एक 🙏इंसान है रेल कर्मचारियों के प्रति सोच बदलिए

🚄यह वीडियो  क्लिप  रेल कर्मचारियों के बारे में बहुत कुछ कहती है  कृपया ध्यान से देखें देश को आजाद हुए 70 वर्ष से अधिक हो चुके हैं लेकिन आज भी आम यात्रियों में भारतीय रेलवे के विषय में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है आए दिन लोगों के रेल कर्मचारियों से वाद विवाद होते रहते हैं सबसे ज्यादा लोगों के गुस्से का शिकार रेलवे के ट्रेन ड्राइवर को उठाना पड़ता है सभी लोगों को ज्ञात है कि रेल व्यवस्था पूरी तरह से सिग्नल पर आधारित है लाल हरा पीला इन्हीं  रंगो पर  रेल यातायात चलता है एवं रेल में रेल को सबसे ज्यादा लाभ माल भाड़े में  होता है उसके बाद जितनी भी बीआईपी  सुपरफास्ट मेल एक्सप्रेस ट्रेनें होती हैं उनको पहले वरीयता दी जाती है पैसेंजर लोकल ट्रेन आए दिन लेट लतीफ होती रहती हैं आम पब्लिक जोकि प्रतिदिन रेल यात्रा करती है लेट लतीफ होने पर उसका सारा  दोषी रेलवे के लोको पायलट को ठहरा देती है पिछले वर्ष विजयदशमी के पर्व के समय पंजाब मैं रेल ट्रैक पर विजयदशमी रावण दहन का कार्यक्रम बना रहे  लोगों के ट्रेन की चपेट में आने से हुए हादसे मैं 150  से अधिक लोगों का रन ओवर हो जाने पर देशभर में लोको पायलट को जी भर कर गालियां एवं कोषा  गया किंतु किसी ने नहीं सोचा की  घर परिवार  अपने कर्तव्य को ईमानदारी से करने  वाला व्यक्ति किसी  जानवर को बचाने के लिए पूरी ट्रेन को संकट में डाल देता है फिर वह आखिर क्यों इतने सारे लोगों को जानबूझकर क्यों मारेगा जहां रावण दहन किया जा रहा था वह पूरी तरह से असुरक्षित था मोड़ होने के कारण ड्राइवर को जानकारी भी नहीं हुई  क्योंकि रेल पूरी तरह से सिग्नल व्यवस्था एवं समय पर चलती है जहां स्पीड का निर्धारण फिक्स होता है पूरा ट्रैक सेक्शन के हिसाब से बड़ा होता है जहां पर रेलगाड़ियों की गति नियम अनुसार बनाए रखनी होती है तेज गति से कम या अधिक होने पर उपरोक्त चालक को चार्जसीट के रूप में सजा दी जाती है भारतीय रेल  परिचालकों को विपरीत परिस्थितियों में पूर्व निर्धारित श्रम कानून के बावजूद कई घंटों अधिक समय तक रेल कार्य करने के लिए मजबूर   होना पड़ता है ट्रेन इंजन में किसी प्रकार की सुविधा एवं शौचालय उपलब्ध ना होने के बाद भी ट्रेन चालक  रेल यात्रियों को सही समय पर सुरक्षित एवं संरक्षित पहुंचाने का कार्य करता है आप सभी से निवेदन है कि रेल के नियम एवं कार्यों को जानने की कोशिश करें एवं रेल कर्मचारियों का हमेशा आत्मसम्मान का ध्यान रखें क्योंकि वह भी आप ही की तरह किसी परिवार का बेटा भाई पिता एवं पति सबसे बड़ी बात की वह भी एक इंसान है🌷🔊🙏✍✍✍🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

ऑल इंडियन रेलवे फेडरेशन के तत्वधान में हुआ रनिंग कर्मचारियों का संवाद कॉन्फ्रेंस प्रोग्राम बीजेपी प्रत्याशी ने मांगा समर्थन

वर्तमान समय  रेल एवं रेल कर्मचारी के लिए बड़ा दुविधा का समय है जहां रेल कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर तमाम प्रकार की आशंका है एवं भय व्याप्त है वही कुछ लोग कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार की राजनीति   करने से बाज नहीं आ रहे ताजा मामला लखनऊ में ऑल इंडियन रेलवे फेडरेशन द्वारा स्वर्गीय कॉमरेड टी एन बाजपेई जी की स्मृति में रेल रनिंग कर्मचारियों का संवाद कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी जिसमें ऑल इंडियन रेलवे फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री  शिव गोपाल मिश्रा जी लखनऊ डीआरएम एवं एडीआरएम महोदय के साथ पूर्वोत्तर रेलवे की एडीआरएम महोदय उपस्थित रही
इस कांफ्रेंस के माध्यम से रेलवे के रनिंग कर्मचारियों द्वारा अपनी-अपनी समस्याएं एवं मांगे रखकर वर्तमान में रनिंग कर्मचारियों के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार पर निराशा प्रकट की एवं बताया कि वर्तमान समय में जिस प्रकार से रेल के संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा  कठोर  कदम उठाकर रेल कर्मचारियों के अंदर भय का माहौल बना दिया है रेल कर्मचारी खासकर रनिंग का जो कि अपनी मेहनत ईमानदारी एवं लगन शीलता के लिए रेलवे की रीढ़ माना जाता है एवं जीवन का बहुमूल्य समय रेल के लिए समर्पित कर देता है उसके बाद भी कर्मचारी को न्यू पेंशन स्कीम से लेकर तमाम द्वेष और नियमों के कारण अपने भविष्य को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती है कांफ्रेंस के मध्य में ही लखनऊ कैंट विधानसभा से पूर्व विधायक एवं वर्तमान उपचुनाव में प्रत्याशी तिवारी जी पहुंच गए उन्हें देखते ही कई कर्मचारी सकते में आ गए   यह शोध का विषय है की उन्हें आमंत्रित किया गया था कि अपने मन से कार्यक्रम में उपस्थित हुए क्योंकि प्रोग्राम रनिंग कर्मचारियों के लिए  था एवं राष्ट्रीय यूनियन नेता एवं अधिकारी मंचासीन थे और उन सभी के पास सीमित समय होने के कारण संवाद कार्यक्रम में समस्याओं को लेकर बोलने वाले  इन कर्मचारियों  समय कम दिया जा रहा  था उसी बीच कैंट विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव के उम्मीदवार तिवारी जी मंच पर आकर रेल कर्मचारियों के साथ सभी कर्मचारियों की पेंशन स्कीम को खत्म करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेई जी का गुणगान करने लगे इससे कर्मचारियों में एकाएक रोष व्याप्त  हो गया रनिंग कर्मचारियों ने खुलकर विरोध तो नहीं किया लेकिन कानाफूसी करते हुए जरूर दिखाई दिए कि क्या यह मंच  नेताजी के लिए सही था जहां एक और केंद्र सरकार कर्मचारी के हितों पर चोट पर चोट किए जा रही वही यह नेता पार्टी एवं पेंशन को खत्म करने वाले अटल बिहारी जी का गुणगान करते हुए नजर आए इनके बोलते  ही रनिंग कर्मचारी सीटों से उठकर जाने लगे उत्सुकता पूर्वक चल रहा प्रोग्राम एकाएक महत्वहीन दिखाई देने लगा रनिंग कर्मचारियों ने अपील की कि भविष्य में यूनियने कर्मचारियों के हित में ऐसे प्रोग्राम आयोजित करें लेकिन इन्हें राजनीति  राजनीतिक मंच ना   बनने दे

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

अखिलेश यादव जी द्वारा देश की सबसे बड़ी बरुआसागर की अदरक अरबी मंडी का जाना हाल एवं छात्र को दी शुभकामनाएं


आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव द्वारा बुंदेलखंड की झांसी मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित बरुआसागर नगर  यहां पर  पूरे देश  की अदरक अरबी की सबसे बड़ी मंडी है  यहां अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में स्थापित एवं  व्यवस्थित कराए जाने वाले कार्यों को देखा आपको बता दें कि अखिलेश सरकार में पूरे बुंदेलखंड में अनेक मंडिया बनाई गई थी एवं जिन मंडियों में संसाधनों की कमी थी उन्हें पूर्ण रूप से संसाधन उपलब्ध कराए गए एवं व्यवस्थित तरीके से मंडियों को स्थापित किया गया था पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा बरुआसागर स्थित मंडी से पूरे देश भर में भेजने वाले फलों सब्जियों के विषय में जानकारी ली स्थानीय लोगों के साथ व्यापारियों माननीय अखिलेश यादव जी को अवगत कराया  कि  एक दशक से अधिक  से बुंदेलखंड में सूखा एवं प्राकृतिक असंतुलन से किसानों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है उसी के दुष्परिणाम स्वरूप बरुआसागर की यह मंडी जो पूरे साल आबाद रहती थी एवं सैकड़ों ट्रकों से माल देश की बड़ी बड़ी मंडियों में पहुंचाया जाता था वह अब सीमित हो गया है इस विश्व स्तरीय मंडी से व्यापारियों के साथ अनेक बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध होता था किसानों के बर्बाद होने से अब मजदूर भी पूरी तरह से काम के अभाव में भुखमरी की कगार पर है प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव जी द्वारा किसानों मजदूरों एवं व्यापारियों  की समस्याओं को जानकर किसानों एवं व्यापारियों की वर्तमान हालात पर दुख प्रकट किया बरुआसागर प्रवास के दौरान प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी नगर के मेधावी छात्र जिन्हें पूर्व में लखनऊ में मुख्यमंत्री काल के दौरान सम्मानित किया था एवं लखनऊ से झांसी की हेलीकॉप्टर द्वारा यात्रा करा कर नगर के सम्मान को रखा था उनके आवास पर रुक कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की पूर्व मुख्यमंत्री के नगर आगमन पर अनेक लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया🙏✍✍🔊

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

🚄तेजस ट्रेन चलाकर रेल☠ निजीकरण की हुई शुरुआत रेल 🛠कर्मचारी हुआ हताश😭


आज देश में एक नया अध्याय शुरू हो गया लखनऊ में आज प्रथम प्राइवेट ट्रेन चलाई गई जिसका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हरी झंडी देकर रवाना किया यह ट्रेन लखनऊ से दिल्ली के मध्य सप्ताह में 5 दिन चलेगी इसका किराया एयरलाइंस की बराबर होगा इस ट्रेन में लखनऊ से नई दिल्ली का न्यूनतम किराया चेयर कार का 1125 रुपये और एक्जीक्युटिव चेयर कार का 2310 रुपये है. दिल्ली से लखनऊ की यात्रा के लिए एसी चेयर कार का टिकट 1280 रुपये होगा जबकि एक्‍जीक्‍यूटिव चेयर कार के लिए 2450 रुपये खर्च करने होंगे. वहीं, लखनऊ से कानपुर के लिए एसी चेयर कार का टिकट 320 रुपये होगा. दिल्ली से लखनऊ की यात्रा में खाना भी दिया जाएगा इसलिए इसका किराया थोड़ा ज्यादा है. रेलवे बोर्ड अन्य मार्गों पर भी ऐसी ट्रेन चलाने पर विचार कर रहा है. तेजस ट्रेन की निगरानी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के जिम्मे है. यह वही कंपनी है जो अभी तक रेलवे के भोजन  वितरण का कार्य करती है आप सभी को तो ज्ञात होगा कि किस प्रकार की क्वालिटी भोजन की रेलवे में होती है  अब यह कंपनी ट्रेन चलाएगी इस प्रथम निजी ट्रेन के विरोध स्वरूप ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ अलारासा  संगठन के नेतृत्व में पूरे देश भर के रेल कर्मचारियों
के सहयोग द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया रेल कर्मचारियों को आशंका है कि यह  भारतीय रेल के निजीकरण की शुरुआत है भविष्य में रेल कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर कर पूरी  रेल को प्राइवेट कंपनियों को बेच दिया जाएगा
वही आम व्यक्तियों का इस ट्रेन के विषय में मानना है कि है आम एवं गरीब यात्रियों को रेल यात्रा से पूर्ण रूप से वंचित करने की शुरुआत है क्योंकि इसका न्यूनतम किराया लखनऊ से दिल्ली के मध्य हवाई जहाज किराए के बराबर है एवं दूसरी सरकारी रेलवे ट्रेन का लखनऊ से दिल्ली के मध्य कराया इसके किराए से लगभग आधा है

जहां एक ओर सरकार आम जनता को बिना नाराज किए ही रेल का का किराया आधे से  दोगुना करना चाहती है क्योंकि जितनी भी सरकारी ट्रेन है वह पूर्ण रूप से  फुल होने के बाद भी लगभग 300 से ज्यादा वेटिंग होने और जनरल डिब्बों को जानवरों जैसा भरने के बाद भी लाभ नहीं कमा पा रही है तो साधारण सा हिसाब है कि प्राइवेट कंपनियां इसमें जबरदस्त किराया बढ़ाकर ही फायदा ले पाएंगे इस ट्रेन में लगभग दोगुना किराया वसूलने के बाद यात्रियों के लिए घोषणा की गई है की ट्रेन 1 घंटे लेट होने पर ₹100 एवं 2 घंटे से अधिक लेट होने पर 250 दिए जाएंगे लेकिन किस प्रक्रिया के माध्यम से  दिए जाएंगे अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है वहीं रेल यात्रियों का दुर्घटना बीमा लाखों रुपए दिया जाएगा जो कि पहले ही किराए में वसूल लिया गया है वही  सुविधा पसंद संपन्न  यात्रियों का मानना है कि वर्तमान मैं ज्यादातर सरकारी  कर्मचारी कामचोर और लापरवाह होने के कारण   भारतीय रेल लेट लतीफ एवं कई कमियों से जूझ रही थी यह प्राइवेट होने के कारण इस पर लगाम लग सकेगी वहीं कर्मचारियों का मानना है की  भारतीय रेल में मात्र 1% कामचोर कर्मचारियों  की सजा 99% ईमानदार रेल कर्मचारियों को देना नाइंसाफी है सरकार के पास पर्याप्त संसाधन एवं तंत्र है जो कामचोर कर्मचारियों पर लगाम लगा सकती है देश की सरकार इस ओर ध्यान दें 99 % कर्मचारियों को गेहूं के साथ घुन की तरह मत पीसे सरकार के पास पर्याप्त संसाधन एवं एजेंसियां हैं जो  कामचोर कर्मचारियों को पकड़कर   रेल  से बाहर कर सकती है वह उसका  प्रयोग क्यों नहीं कर रही आपको बता दें  यात्रियों पर बोझ डालकर रेल किराया दोगुना हो जाएगा जिसका लाभ सीधे-सीधे उद्योगपतियों को होगा अगर रेल का निजीकरण कराना है तो उद्योगपति खुद के ट्रैक बिल्डिंग एवं संसाधन जोड़कर प्राइवेट रेल चला सकता है इस और सरकार को ध्यान देना चाहिए रेल की 150 वर्षों से अधिक की पसीने की मेहनत को उद्योगपति द्वारा ना  लूटी जाए जहां यह रेल के निजीकरण को सरकार युवाओं को रोजगार का एक अफसर दिखाकर युवाओं को बरगला रही है तो बता दें प्राइवेट करण का अनुभव भी कुछ ठीक नहीं है रेल में अनेकों स्थानों पर प्राइवेट कर्मचारी लगाए गए हैं उनकी  जितनी सैलरी निर्धारित है उससे लगभग आधा देकर उनसे पूरी सैलरी  पर हस्ताक्षर कराकर ठेकेदार एक मोटी कमाई करते है उनकी सैलरी भले ही बैंक खातों में आए लेकिन निकालकर उन्हें ठेकेदार को देना पड़ता है निजी तौर पर किसी भी सफाई कर्मचारी एवं लोको पायलट के विश्राम स्थल में लगे खाना बनाने से लेकर अन्य प्राइवेट कर्मचारियों से ली जा सकती है यह पूरी तरह से प्राइवेट में लगे लोगों का खुले तौर पर शोषण है जो उन्हें दैनिक मजदूरी से भी कम रुपए देकर उनसे काम कराया जा रहा है  भारतीय रेल का भविष्य क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है लेकिन इतना जरूर है आने वाला समय रेल कर्मचारियों से लेकर आम यात्रियों के लिए   अच्छा दिखाई नहीं दे रहा क्योंकि निजीकरण के बाद प्रवेश चार्ज सामान लगेज चार्ज सफाई चार्ज जैसे अनेकों चार्ज शामिल हो जाएंगे फिर जीएसटी के साथ उसके बाद गरीब पोटली धारी साधारण यात्री स्टेशन  के अंदर प्रवेश करना भी दुर्लभ हो जाएगारेल में यात्रा करने की भी तो भूल के भी ना सोचना ☠💣🙈🙉🙊💣☠🚄🚝🚅🚆🚉🚇🛠🛠✍✍✍✍

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

2 अक्टूबर विश्व अहिंसा दिवस पूरे विश्व की दुर्लभ निधि थे महात्मा गांधी जी बारूद के ढेर पर बैठे विश्व को बस गांधी दर्शन ही बचा सकता है

 
आज पूरे विश्व में महात्मा गांधी जी की 150   बी जन्म शताब्दी मनाई जा रही है 2 अक्टूबर पूरे विश्व में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है पूरा विश्व दक्षिण अफ्रीका की रेल यात्रा  विश्व युद्ध के पहले एवं द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से लेकर आज तक  महात्मा गांधी जी दर्शन से अत्यधिक प्रभावित  है एवं गांधी जी के रूप में  विश्व शांति के लिए  उन्हें एवं उनके विचारों को शांति दूत एवं संदेश के रूप में  देखता है  भारतीय लोग भी गांधी जी को देश के लिए एवं विश्व के लिए विशेष निधि मानते हैं गांधी जी का जीवन और उनके विचार गांधी दर्शन के रूप में जाने जाते हैं गांधी दर्शन के विषय में  विश्व के अनेक देशों के महान दार्शनिकों एवं साहित्यकारों एवं राजनेताओं ने अनेक शोध किए एवं अपना पूरा जीवन गांधी जी के  सत्य अहिंसा दर्शन में लगा दिया
जिसमें  अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला  जैसे अनेक अंतरराष्ट्रीय नेता रहे वर्तमान में कुछ वर्षों से देश में व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्तमान युवा पीढ़ी को एक अलग ही गांधी जी के जीवन दर्शन  एवं चरित्र चित्रण से रूबरू होना  पढ़ रहा है जिसमें यता कथित कुछ लोगों ने काल्पनिक आधार पर युवा पीढ़ी में गांधी के प्रति दुर्भावना एवं बुरे विचार ला दिए जो देश एवं भविष्य में विश्व शांति के लिए बेहद एक गंभीर होंगे बहुत से युवा तर्क देते हैं गांधी ने यह किया वह किया गांधी जैसे थे वैसे थे मुझे नहीं पता गांधीजी कैसे थे गांधीजी को समझना एवं  जानना  सोशल मीडिया पर चंद रुपए में कुछ संगठनों को लाभ देने के लिए गांधी दर्शन पर कीचड़ उछालने के लिए बनाए गए चंद लाइनों के  संदेशों से समझना असंभव है अगर गांधी दर्शन को समझना है तो गांधी जी द्वारा लिखित पुस्तकों का अध्ययन निकलना होगा वह शायद देश की सबसे बड़ी युवा बेरोजगार जनसंख्या को बेहद कठिन लगे क्योंकि लोग अब व्यक्ति के चरित्र की व्याख्या मात्र कुछ लाइनों में ही कर देता है जितनी किताबें महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई हैं शायद उतनी किताबें कथित युवा पीढ़ी जो अपने आप को बेरोजगार कहते हैं लेकिन जब किताबें पढ़ने की बारी आती है तो कहते हैं हमारे पास इतना समय नहीं कि इतनी मोटी मोटी किताबें पढ़ सकें अगर जीवन में धर्म के बारे में जानना चाहते हो तो गीता पढ़ना जरूरी है उसी प्रकार अगर गांधी दर्शन को जानना चाहते हो तो गांधी जी द्वारा लिखित किताबों को पढ़ना बड़ा ही आवश्यक है अगर गांधी जी द्वारा लिखित किताबें भी नहीं पढ़ सकते तो मैं एक ऐसे महापुरुष के बारे में बताना चाहता हूं जिसने अपना पूरा जीवन गांधी दर्शन में लगा दिया उनका पूरा नाम राष्ट्रीय युवा योजना के एमएस सुब्बा राव जी मैंने जीवन में गांधी जी को तो नहीं देखा लेकिन जब मैं

सुबाराव जी को देखता हूं तो महसूस करता हूं सच में कितने महान व्यक्तित्व के धनी होंगे महात्मा गांधी जी और अपने आप को धन्य मानता हूं की मुझे एक गांधीजी देखने को नहीं मिले लेकिन उनके अंश सुबाराव जी को देखकर मैं गांधी दर्शन को भलीभांति समझ सकता हूं यह वही सुब्बा राव जी हैं जिंदगी के गांधी दर्शन से प्रभावित होकर सैकड़ों खतरनाक डकैतों ने देश के प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर के गांधी दर्शन से जीवन को जीने की कला सीखी जिन युवाओं को अभी गांधी जी के दर्शन एवं गांधी जी के विचारों पर थोड़ा भी संदेह है तो वह 94 साल के युवा डॉक्टर सुब्बा राव जी के राष्ट्रीय युवा योजना विश्व एकता एवं शांति के लिए लगाए जाने वाले  शिविरों में रहकर जीवन मैं सत्य और अहिंसा के विषय में   सही से समझ सकता है

बुधवार, 18 सितंबर 2019

केंद्रीय कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस गत वर्षो की भांति मात्र ₹17951 ही मिलेगा

देश में प्रत्येक वर्ष केंद्रीय कर्मचारियों को दीपावली  एवं दुर्गा पूजा का बोनस दिया जाता है सरकारें बोनस देने के  पूर्व से ही इसका प्रचार करने लगती है कि केंद्रीय कर्मचारियों को विशेष सौगात वर्तमान में लगभग  78 दिन का बोनस दिए जाने की घोषणा की गई एवं समाचार पत्रों के माध्यम से बताया गया कि इस बोनस देने पर सरकार को 2024 करोड़  रुपए का बोझ पड़ेगा आपको बता दें कि 78 दिन का बोनस का मतलब यह नहीं कि ढाई महीने की   सैलरी मिलेगी क्योंकि आम लोगों को लगता है कि सरकार द्वारा फ्री में इन कर्मचारियों को लगभग ढाई महीने की सैलरी दी जाएगी ऐसा बिल्कुल नहीं है केंद्रीय कर्मचारियों को लगभग 17951  रुपए दिए जाएंगे जो ऊंट के मुंह में जीरा है इससे ज्यादा बोनस तो कई प्राइवेट कंपनियां अपने कर्मचारियों को देती हैं आप सभी को स्पष्ट कर दूं कि बोनस पीएलबी के आधार पर किया जाता है  यह मूल वेतन की सीलिंग होती है
इसकी अनुसार ही वेतन का निर्धारण होता है छठे वेतन अनुसार पीएलवी ₹7000 थी  लेकिन सातवें वेतन के अनुसार पीएलबी लगभग ₹18000 होनी चाहिए  लेकिन वर्तमान सरकार 3 वर्ष से छठे वेतन  आयोग  के अनुसार 7000 पीएलबी पर 78 दिन का बोनस मिलाकर लगभग ₹17951 दे रही है लेकिन प्रचार किया जाता है कि केंद्रीय कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन  के रूप में  बोनस दिया जा रहा है  औसत वेतन को मानकर चलें तो प्रत्येक कर्मचारी का लगभग 50,000 जो कि 78 दिनों के हिसाब से लगभग सवा लाख रुपए होता है यह देना सरकार के लिए असंभव है लेकिन मीडिया के माध्यम से आम जनता में इस प्रकार से प्रोपेगेंडा चलाया जाता है कि केंद्रीय कर्मचारियों को आम व्यक्तियों को बोनस के विषय में समझाना समझाना कठिन हो जाता है एवं बहस के बाद हकीकत जानने पर आम लोगों एवं रिश्तेदारों को शर्मसार होना पड़ता है मीडिया वाले भी समाचार पत्रों के हेडलाइंस ऐसी बनाते हैं कि लोग भी कंफ्यूज हो जाते हैं जिससे जनता में केंद्रीय कर्मचारियों के प्रति एक गलत संदेश जाता है आप सभी कर्मचारियों से निवेदन है कि लोगों को बोनस के विषय में जागरूक करें एवं मीडिया एवं सरकार से निवेदन है कि सीधी सीधी बात लोगों को बताएं सरकार पर खजाने पर बोझ का क्या मतलब हुआ क्योंकि जो केंद्रीय कर्मचारियों की राज्य कर्मचारियों बोनस दिया जाता है कर्मचारी उसे त्योहारों पर बाजारों में दिल खोलकर खर्च करते हैं इसके कारण देश की जो आर्थिक मंदी होती है वह खत्म हो जाती है और बाजारों में रौनक आ जाती जहां एक ओर सरकार आर्थिक मंदी दूर करने के लिए आईटी उद्योग बैंकिंग क्षेत्र से लेकर तमाम प्रकार के उद्योगों को राहत पैकेज दे रही वहीं कर्मचारियों के हकों में कटौती की जा रही है यह समझ से परे है  ✍✍🔊💰🛠🛠🛠🛠🙈🙉🙊🙏🙏🙏

शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

10 घंटे में गाड़ी खड़ी करने का दुष्परिणाम जाना था लखनऊ पहुंच गए पनकी धाम

 रेलवे में लोको पायलट सहायक लोको पायलट एवं गार्ड की दयनीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है तमाम प्रकार के आदेशों एवं कानूनों को दरकिनार करके 10 घंटे से अधिक ड्यूटी शाम दंड भेद अपनाकर कराया जाना आम बात है ताजी घटना लखनऊ डिवीजन के लखनऊ यार्ड लॉबी की है जहां पर लोको पायलट सहायक लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को अंडर अरेस्ट में ड्यूटी लगाई गई   लोको पायलट सहायक लोको पायलट एवं गार्ड द्वारा 1 -9- 2019 को 11:00 बजे साइन on किया गया ड्यूटी के  लखनऊ यार्ड मैं ही 4 घंटे होने के उपरांत लोको पायलट द्वारा लिखित मेमो उस समय क्रू कंट्रोलर को देकर  जिसमें 4 घंटे होने के बाद यार्ड ऑफ कराने के लिए मेमो दिया लेकिन क्रू कंट्रोलर द्वारा हंस के मेमो को एक तरफ रखकर कहा कि लखनऊ में  कभी यार्ड ऑफ  होता है  लिखित में रिसीविंग देते हुए  जहां आपके 10 घंटे हो वहां गाड़ी खड़ी कर दीजिएगा मेमो देने के तुरंत ही कंट्रोल द्वारा सिग्नल ऑफ करके गाड़ी को चलाया गया यार्ड में ही 4 घंटे होने के उपरांत चली गाड़ी सोनिक में जाकर खड़ी हो गई वहां पर ड्यूटी के लगभग साडे 10 घंटे होने के उपरांत  लोको पायलट  जो  की धार्मिक स्वभाव ईमानदारी एवं गुरु ईमानदारी एवं गुरू भक्ति एवं शोले फिल्म के  विलन के नाम से मिलते जुलते  नाम से पूरे लखनऊ मैं जाने जाते हैं   उन्होंने सोनिक स्टेशन   के स्टेशन मास्टर को अवगत करा दिया के आगे अगले स्टेशन पर कुरु ड्यूटी टाइम पूरा होने के कारण गाड़ी को खड़ा करेगा यह आप अगले स्टेशन मास्टर को अवगत करा दीजिए लेकिन जैसे ही गाड़ी अगले स्टॉपेज उन्नाव पहुंची तो वहां पहले से ही  आगे के सभी सिग्नल ग्रीन कर रखे थे  उन्नाव पहुंचते ही 10 घंटे से अधिक होने के कारण लोको पायलट द्वारा 1 दिन पूर्व की लॉन्ग ड्यूटी शारीरिक दुर्बलता का हवाला देकर 10 घंटे से अधिक  ड्यूटी ना कर पाने के कारण गाड़ी को आगे ले जाने में असमर्थता व्यक्त कर दी उसके बाद स्टेशन मास्टर द्वारा तमाम प्रकार का दबाव एवं कंट्रोल की धमकियां दी गई उसके उपरांत कंट्रोल से लेकर तमाम लोगों द्वारा दबाव बनाया गया लेकिन लोको पायलट ने 10 घंटे से अधिक नियम विरुद्ध सुरक्षा एवं संरक्षण की अनदेखी करने से स्पष्ट इनकार कर दिया जब सभी तरीके से संचालन मंडल गाड़ी ना चलवा सका तो लोको पायलट सहायक लोको पायलट एवं  गुड्स गार्ड को लिखित में   देकर अदर्स हेड क्वार्टर के जीएमसी  में बैलेंस इन करने का मेमो पकड़ा दिया और कंट्रोल के सख्त आदेश का हवाला दिया गया एवं जिस गाड़ी से भेजने का आदेश दिया उस पर लोको पायलट द्वारा स्टेशन मास्टर को मेमो दिया गया है कि इस गाड़ी का स्टॉपेज कानपुर के बाद सीधे दिल्ली है अगर यह गाड़ी  जीएमसी यार्ड में नहीं रुकती तो उसका जिम्मेवार  रेल प्रशासन होगा उसके बाद भी सेक्शन कंट्रोल ने बात को हल्के से ले लिया और उन्होंने कहा कि हां गाड़ी  जीएमसी में रुकआई जाएगी  लगभग 12 घंटे के बाद जैसे ही कुरु जीएमसी जाने के लिए इस गाड़ी में बैठा जीएमसी पहुंचने के उपरांत भी जब गाड़ी नहीं रोकी और आगे बढ़ गई तो इस घटना के बारे में लोको पायलट एवं  गुड्स गार्ड द्वारा सभी को अवगत कराया गया लेकिन लखनऊ डिप्टी और कानपुर डिप्टी एक दूसरे के पाले में गेंद फेंकते नजर आए कि जीएमसी डिप्टी द्वारा कहा गया कि हमें  गाड़ी रुकवाने के लिए नहीं बताया  और लखनऊ डिप्टी द्वारा कहा गया कि हमने  अवगत करा दिया था  अधिकारियों के गैर जिम्मेवार   व्यवहार से दुखी होकर लोको पायलट द्वारा कंट्रोल को अवगत कराया कि पूरे  कुरु के साथ अगले स्टॉपेज दिल्ली जाकर वह अब सीधे जीएम से ही शोषण की शिकायत कर कर आएंगे और संबंधित लोगों को  भविष्य मैं रनिंग का इस तरीके से शोषण करने पर सबक मिलेगा  इसके बाद डिप्टी जीएमसी द्वारा आनन-फानन में ग्रीन सिग्नल पर अगले स्टॉपेज पनकी धाम में गाड़ी को रुकवाया गया एवं कुरु से पनकी धाम में उतर कर वापस लखनऊ जाने के लिए  निवेदन किया और डाउन की गाड़ी रुकवा कर उस में बैठने के लिए कहा गया लेकिन लोको पायलट द्वारा लिखित मेमो का हवाला देते हुए जीएमसी में ही बैलेंस इन करने की बात कहकर लगभग साढे 14 घंटे बाद अपनी ड्यूटी जीएमसी गुड्स लॉबी में खत्म की रात्रि के लगभग 1:30 बजे ड्यूटी ऑफ होने के उपरांत जीएमसी रनिंग रूम में पहुंचने के बाद भोजन पानी का राशन भी ना मिल सका इस कारण  लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट को को भूखे पेट ही सोना पड़ा उसके मात्र 6 घंटे बाद पुनः गाड़ी लगने के बाद लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट जीएमसी में ऑन ड्यूटी करके  वापस लगभग 8:30 घंटे की ड्यूटी करके गाड़ी लेकर लखनऊ वापस आया

बुधवार, 11 सितंबर 2019

लखनऊ डिवीजन के रेलवे गार्डों द्वारा बैठक कर की ओवरटाइम देने की मांग


  • @लखनऊ@ ऑल इंडिया रेलवे गार्ड  काउंसिल लखनऊ के तत्वाधान में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें जिसमें प्रमुख रूप से रेलवे गार्ड  से   डब्ल्यू एम आई  बने गार्ड श्री आशीष सागर जी को बधाई देकर सभी गार्ड द्वारा द्वारा हर्ष प्रकट किया गया वही सभी गार्ड यूनियन पदाधिकारियों सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि लखनऊ डिवीजन मैं गार्डों के ओवरटाइम के संबंध में शीघ्र ही अधिकारियों से मिलकर उचित निर्णय लिया जाएगा एवं सभी गार्डों  को ओवरटाइम भरकर संबंधित बाबू को जमा करने का दिशा निर्देश दिया गया एवं इस विषय में पूर्व में संबंधित अधिकारी से मिलकर की गई परिचर्चा के बारे में अवगत कराया बता दें कि लखनऊ  डिवीजन में गार्डों को ओवरटाइम अभी नहीं मिल पा रहा है एवं ओवरटाइम के लिए गार्डों को पूरी डिटेल भरकर बाबू को जमा करनी पड़ती है उसके विपरीत लखनऊ में लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलटों को ओवरटाइम  सीएमएस कंप्यूटर वाली माइलेज सीट पर ही दे दिया जाता है जिसमें समय की बचत एवं निष्पक्षता बनी रहती है गार्ड कौंसिल द्वारा संबंधित उच्च अधिकारियों से मांग की गई कि गुड्स गार्डों  को भी सीएमएस माइलेज सीट के आधार पर ओवरटाइम  दिलाया जाए जिससे समस्त लखनऊ डिवीजन के गुड्स गार्ड मेल पैसेंजर गार्ड पूरे जोश एवं उर्जा से रेल कार्य मैं अपनी सहभागिता निभाकर लखनऊ डिवीजन को भारतीय रेलवे का सबसे अधिक आय वाला डिवीजन बनाने के लिए कार्य कर सकें ! इस  कार्यक्रम की अध्यक्षता आशीष कुमार सागर जी द्वारा एवं संचालन ओमप्रकाश कुशवाहा जी द्वारा किया गया इस अवसर पर  शुभेंदु मिश्रा आशु शर्मा सुनील गुप्ता अभय  पांडे  प्रवेश कुमार शकील अहमद राम नारायण बाजपेई दुष्यंत शर्मा आलोक आलोक कुमार  बृजेश कुमार राम लाहोड़ी मीणा उपस्थित रहे